
पिता ने उंगली पकड़कर इंदौर से निकलने वाले दैनिक प्रभात किरण अखबार की पत्रकारिता से इंदर को जोड़ा था। तिल्दा नेवरा जैसे छोटे से नगर में 80 के दशक से पत्रकारिता का आगाज करने वाले इंदर कोटवानी ने नवभारत, भास्कर, अमृत संदेश, समवेत शिखर, पत्रिका, जी न्यूज छत्तीसगढ़,आईबी सी 24 जैसे अनेक अखबार चैनल में काम करते हुए पत्रकारिता को सदैव मिशन माना और राष्ट्रीय स्तर पर अनेक मामलों का भंडाफोड़ किया। प्रस्तुत है उनसे उनके जन्म जयंती पर लोक सदन संपादक सुरेशचंद्र रोहरा द्वारा खास बातचीत-
? आपका पत्रकारिता में कब और कैसा आगमन हो गया.
मैं बताऊं मेरी रुचि देख कर के मेरे पिता एक बार इंदौर गए तो वहां से मेरे लिए एक दैनिक प्रभात किरण अखबार का अथारिटी लेटर लेकर आए और मैं पत्रकार बन गया।
? आपकी रुचि बचपन से ही एक पत्रकार बनने में थी.
हां, मैंने जैसे ही हो संभाला मुझे लगा मैं पत्रकारिता के लिए ही पैदा हुआ हूं। उन दिनों मुझे स्कूल में बड़ी मार पड़ती थी और मैं अपने शिक्षकों को साफ साफ कहता था कि मैं 1 दिन पत्रकार बनूंगा और आप लोगों के खिलाफ लिखूंगा।
? इंदर भाई उन शिक्षकों के बारे में बताइए, क्या नाम थे उनके.
मैं बहुत ही सम्मान के साथ याद करता हूं क्योंकि वह विद्वान शिक्षक थे उनके नाम प्यारे लाल वर्मा और बीपी शर्मा था। हालांकि मैं पढ़ने लिखने में होशियार था मगर मैं लड़ाकू बहुत था। इसलिए मुझे शिक्षक अक्सर पिटाई करके रास्ते पर लाने की कोशिश करते थे। जो बाद में मुझे धीरे-धीरे समझ में आया।
? अच्छा और जब आप पत्रकार बन गए तो फिर क्या हुआ.
मैं 79 सन में पत्रकारिता में आ गया तब प्यारे लाल वर्मा जी और शर्मा जी ने कहा था कि तुमने जो कहा वह करके दिखा दिया! उनका मुझे बहुत स्नेह और प्यार मिलता था मैं उन्हें हमेशा जब भी कहीं भी मिलता तो चरण स्पर्श करके आशीर्वाद लिया करता था।
? आप भास्कर, नवभारत जैसे बड़े अखबारों में पत्रकारिता करते रहे आपका कैसा अनुभव रहा।

मैं लंबे समय तक नवभारत में पत्रकारिता करता रहा मगर बाद में संपादक से तालमेल नहीं बैठा मैंने इस्तीफा दे दिया! फिर भास्कर में मैंने 1996 से लेकर 2017 तक अपनी सेवाएं दी यहां भी अंततः मुझे इस्तीफा देना पड़ा!! मैं सिर्फ यही कहूंगा कि जब तक मैं अपनी खबरें छपवाता रहा मैं पत्रकारिता करता रहा। मगर जब मालिक और संपादक अपनी खबरें प्लांट करने की बात करने लगे तो मैंने इस्तीफा दे दिया. पहले पत्रकारिता मिशन होती थी अब व्यवसाय बन गई है। एक बात बताऊं आपको मैं 20 साल तक, जिसके खिलाफ मै लगातार लिखता था उसकी पोल खोलता था बाद में फिर मेरे अखबार ने मेरे हटने के बाद उसे अपना पत्रकार बना लिया। यह है बड़े अखबारों की पत्रकारिता।
? आपकी पत्रकारिता का स्वर्णिम काल अवसर किसे कहेंगे।
दो बातें हैं एक है – मैंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को 1985 में रायपुर स्टेशन में मिल करके उनसे बातचीत की थी। सुषमा स्वराज का एक साक्षात्कार लिया था। सुंदरलाल पटवा का साक्षात्कार तिल्दा से रायपुर हेलीकॉप्टर में बैठकर लिया था। कितनी बार डॉक्टर रमन सिंह से इंटरव्यू लिया। बड़े-बड़े नेताओं से मुलाकात हुई यह मुझे महत्वपूर्ण अवसर के रूप में याद है।
? पत्रकारिता में आप क्या उपलब्धि मांनेगे।
मैंने रिपोर्टिंग की थी “कोख निकालने का गोरखधंधा”जो भास्कर के ऑल इंडिया संस्करण में पब्लिश हुई थी इसी तरीके से मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ के विभाजन से पूर्व एक मंत्री का नाम लिखकर के एक लड़के ने आत्महत्या कर ली थी, जिसे मैंने छाप दिया था। तब मंत्री जी बौखला गए थे और पुलिस मेरे पीछे घूम रही थी। तब रमेश नैयर संपादक हुआ करते थे नव भास्कर में। इसी तरीके से सोहैला हत्याकांड और सोमनाथ में बाढ़ जो तिल्दा से 18 मीटर की दूरी पर है सोमनाथ मैं ने नाव से रिपोर्टिंग की इस पर मुझे सम्मानित किया गया था।
?मैंने सुना है आपकी पुलिस से भी अक्सर मुठभेड़ हो जाए करती थी।
बलौदा बाजार में मैं भास्कर का ब्यूरो चीफ था उस समय एक नगर निरीक्षक ने एक सिख की पिटाई कर दी थी। समाचार छपा तो एक्शन हुआ। सुहेला हत्याकांड में थाने का सारा स्टाफ जेल चला गया था मेरी रिपोर्टिंग के कारण।
? इंदर भाई यह बताइए कि आप की विदेश यात्रा कब कहां कहां हुई।