

रायपुर । गुढ़ियारी सेक्टर के आंगनवाड़ी केंद्र ज्योतिबा नगर में मॉड्यूल-18 के अंतर्गत कुपोषण और मृत्यु से बचने के लिए बीमारियों से बचाव विषय पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया गया। यह कार्यक्रम सतत सीख प्रक्रिया के अंतर्गत आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन जिला कार्यक्रम अधिकारी अशोक पांडे के नेतृत्व में किया गया। कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ बनाने हेतु छत्तीसगढ़ सरकार ने गढ़बो सुपोषित छत्तीसगढ़ का लक्ष्य बनाया है जोकि बहुत अनूठी पहल है। इस तरह के प्रयास से हमारा छत्तीसगढ़ राज्य सुपोषित राज्य बन सकता है | प्रशिक्षण के दौरान मितानिन, वर्ल्ड विजन के वॉलिंटियर्स और डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम वार्ड की पार्षद मंजू वारेन साहू भी उपस्थित रहीं। इस अवसर पर व्यक्तिगत स्वच्छता पर विशेष रूप से ध्यान देने हेतु समझाइश दी गई। कहा गया कि, हाथ हाथ धोने की प्रक्रिया को 20 से 30 सेकंड तक नियमित रूप से जारी रखना स्वास्थ्य के लिए हितकर है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता द्वारा हाथ सफाई की विधि बताने के क्रम में सुमन-के विधि की विस्तृत व्याख्या की गई। इस विधि का विडियो क्लिप बनाकर हितग्राहियों को भी शेयर करने के लिए कहा गया। साथ ही कोरोना संक्रमण के खतरे के प्रति आगाह करते हुए वैश्विक कोरोना संक्रमण काल में सामाजिक दूरी बनाकर रहने, मास्क पहनने तथा हाथों को सैनेटाइज करने पर जोर दिया गया।
इसके साथ ही क्षेत्रीय आंगनवाड़ी कार्यकर्ता व मितानिन ने लाभार्थियों को सुपोषण के विभिन्न तरीकों की जानकारी दी। उन्होंने बताया, “पोषक तत्वों की कमी से भी बच्चा कुपोषण का शिकार हो सकता है और ऐसे में बच्चे को सिर्फ सामान्य खाना खिलाना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि बच्चे के आहार में पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में शामिल हों। कुपोषण के लक्षण दिखने पर सबसे पहले बच्चे को संतुलित व पोषक तत्वों से भरपूर आहार देना चाहिए।“
बच्चे को एक ही बार में सारा खाना न खिलाएं बल्कि खाने के बीच नियमित अंतराल रखें। बच्चे को कुपोषण से दूर रखने के लिए उसे ज्यादा से ज्यादा पानी पिलाएं। इस संबंध में गुढ़ियारी क्षेत्र की पर्यवेक्षक रीता चौधरी ने बताया, “सुपोषण के लिए मां का दूध ही बच्चे के लिए सबसे पौष्टिक आहार होता है। यह बच्चे को हर तरह की बीमारी से दूर रखता है। ऐसे में जरूरी है कि मां अपने बच्चे को रोजाना पर्याप्त मात्रा में स्तनपान कराए।“
शिशु को 6 माह तक सिर्फ मां का दूध ही पिलाना चाहिए । इसके सिवाय किसी भी प्रकार की जन्म घुट्टी या पानी नहीं देना है, क्योंकि मां के दूध में पर्याप्त मात्रा में सभी पोषक तत्व मौजूद रहते हैं ।6 माह तक सिर्फ स्तनपान कराना चाहिए क्योंकि इससे शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है तथा स्वास्थ्य और पोषण अच्छा रहता है।
