छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष अमित बघेल के द्वारा सिंधी समाज और उनके आराध्य देव साईं झूलेलाल (वरुण देव) के प्रति की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद पूरे सिंधी समाज में गहरा आक्रोश फैल गया है।समाज के लोगों ने इसे धार्मिक आस्था और सामाजिक सम्मान पर सीधा प्रहार बताया है।सिंधी समाज का कहना है कि साईं झूलेलाल केवल आराध्य देव नहीं, बल्कि एकता, शांति और संस्कृति के प्रतीक हैं। ऐसे में किसी भी व्यक्ति द्वारा उनके प्रति अपमानजनक शब्दों का प्रयोग असहनीय है।समाजजनों ने थाना पहुंचकर अमित बघेल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और कठोर कार्रवाई की मांग की है।विरोध कर रहे प्रतिनिधियों ने कहा कि
“अभिव्यक्ति की आज़ादी का मतलब किसी की आस्था का अपमान नहीं होता।”
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि ऐसे मामलों में सख्ती बरती जाए ताकि भविष्य में कोई भी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने की हिम्मत न कर सके।
14 आपराधिक मामलों में आरोपी हैं अमित बघेल
MyNeta.info के अनुसार, अमित बघेल पर कुल 14 आपराधिक मामले दर्ज हैं।इनमें धारा 307 (हत्या का प्रयास), 295A (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना) और 153A (सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाना) जैसी गंभीर धाराएँ शामिल हैं।उनकी घोषित संपत्ति लगभग 3 करोड़ रुपये है।इतने गंभीर मामलों में आरोपी होने के बावजूद, अमित बघेल द्वारा धार्मिक विषयों पर इस तरह की टिप्पणी न केवल निंदनीय बल्कि समाज में विभाजन फैलाने वाली कही जा रही है।
पहले भी जैन मुनियों पर की थी अभद्र टिप्पणी — हुई थी गिरफ्तारी
News18 हिंदी की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 में बालोद पुलिस ने अमित बघेल को गिरफ्तार किया था,क्योंकि उन्होंने जैन मुनियों के खिलाफ अभद्र और आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।उनकी इस टिप्पणी से जैन समाज में भारी आक्रोश फैल गया था और पूरे जिले में विरोध-प्रदर्शन और बंद का ऐलान किया गया था।पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बघेल को हिरासत में लिया और अदालत में पेश किया, जहाँ से उन्हें जेल भेज दिया गया था।यह घटना यह साबित करती है कि धार्मिक समुदायों के प्रति अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना उनका पुराना और दोहराया जाने वाला व्यवहार रहा है।
सिंधी समाज का कहना — “आस्था पर राजनीति नहीं
तिल्दा नेवरा, कोरबा और रायगढ़ समेत कई इलाकों में सिंधी समाज ने रैलियाँ निकालकर, ज्ञापन सौंपकर और नारेबाज़ी करते हुए प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है।समाज के वरिष्ठों का कहना है कि “हमने हमेशा प्रेम, सौहार्द और सह-अस्तित्व का संदेश दिया है, लेकिन अपने आराध्य देव का अपमान कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे।”उन्होंने यह भी कहा कि “कानून का सम्मान सभी के लिए समान है। जो बार-बार धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ करेगा, उसे सख्त सजा मिलनी चाहिए।”









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