
हम्म… हाँ, आपने सही पढ़ा। दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित शांति पुरस्कार समिति, नोबेल कमेटी, ने उस व्यक्ति को अवॉर्ड नहीं दिया जिसने ट्विटर को रणभूमि बनाया, ट्वीट्स से अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को 280 कैरेक्टर का खेल बना दिया और हर प्रेस कॉन्फ्रेंस को एक लाइव कॉमेडी शो में बदल दिया — डोनाल्ड जे. ट्रंप।सोचिए ज़रा — इंसान जिसने ‘अल्टरनेटिव फैक्ट्स’ को इतना ग्लैमरस बना दिया कि लोग इसे पढ़कर हँसने के बजाय सिर खुजाने लगे, उसे शांति का नोबेल क्यों नहीं मिला? 🤔 शायद नोबेल कमेटी यह समझ नहीं पाई कि “शांति” का नया स्वरूप क्या होता है। अब उनके हिसाब से शांति का मतलब है “दुनिया में कोई झगड़ा न हो।” पर ट्रंप के हिसाब से शांति का मतलब था “असली युद्ध से बचाना, बस शब्दों से इतना धमाका करना कि पूरी दुनिया ट्रेंडिंग में चले जाए।”हाँ भाई, अगर आप भी मान लें कि शब्द भी हथियार होते हैं, तो ट्रंप से बड़ा पीस मेकर कोई नहीं। उन्होंने दुनिया को हँसाया, डराया, और चौंकाया — वो भी सिर्फ़ 280 कैरेक्टर में! ट्विटर पर उनके ट्वीट्स इतने शक्तिशाली थे कि कुछ लोग कहते हैं, “ये शांति से ज़्यादा शब्दों का आर्ट ऑफ़ वार है।” 😎और विज्ञान में उनका योगदान? ओह हो! बिना मास्क घूमें, महामारी का सामना किया और आत्मविश्वास दिखाया — भाईसाब, यह साइकॉलजी ऑफ़ रिस्क का मास्टरक्लास है! 🏆 दुनियाभर के रिसर्चर्स उनके तरीक़ों को देखकर नोट्स बना रहे होंगे, और नोबेल कमेटी शायद डर गई कि अगर ट्रंप को पुरस्कार मिला, तो मंच पर खड़े होकर कह देंगे:”ये पुरस्कार बढ़िया है, पर मेरा वाला ज़्यादा बड़ा होना चाहिए था! मेक नोबेल ग्रेट अगेन!” 😂लेकिन नोबेल वालों ने फैसला किया कि इस बार पुरस्कार किसी शांत, समझदार, और… आम तौर पर ‘नो ट्विस्ट’ वाले इंसान को दिया जाएगा। सही है, दुनिया को अभी फिलहाल सुकून चाहिए, और ट्रंप के भाषणों में “सुकून” ढूँढना अलास्का में गर्मी ढूँढने जितना मुश्किल है! 🧊सोशल मीडिया पर तो ये विषय क्लिप का गोल्डमाइन बन गया है:वीडियो आइडिया: ट्रंप मंच पर, नोबेल कमेटी सामने — और ट्रंप कहते हैं, “यू आर फ़ायर्ड!”। 😂मेम आइडिया: “नोबेल कमेटी + ट्रंप = वो जोड़ी जो कभी नहीं बनी।”कमेंट स्फीयर: लोग हँसते हुए लिख रहे हैं, “अगर शब्द भी हथियार हैं तो ट्रंप ने दुनिया की ट्रेंडिंग को जीत लिया।”सच कहूँ, यह पूरा दृश्य एक मॉडर्न आर्ट पीस है — राजनीति, शांति, विज्ञान, कॉमेडी और सोशल मीडिया का परफेक्ट मिक्स। और सबसे मज़ेदार बात? नोबेल कमेटी शायद यही सोच रही होगी कि “शांति का ये तरीका हमारे किताबों में नहीं लिखा।” 🤷♂️ख़ैर, ट्रंप को नोबेल न मिलने से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ा होगा। उनके पास पहले ही इतना “सम्मान” और हिट्स हैं कि वो कह सकते हैं, “नोबेल? आई मेड इट ग्रेट अगेन!”तो इस साल नोबेल गया किसी शांत और समझदार इंसान को। लेकिन ट्रंप की क्लास, कॉमेडी और ट्विट्स अभी भी हम सबको हँसते-हँसते सोचने पर मजबूर कर रही हैं। दुनिया चाहे कुछ भी कहे, ट्रंप की यह वर्ल्ड क्लास पीस मेकिंग टेक्निक कहीं नहीं जाती। 😎









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