छत्तीसगढ़ सरकार के इस एक आदेश ने निजी स्कूलों के उड़ा दिए होश, मचा हड़कंप

छत्तीसगढ़ सरकार के इस एक आदेश ने निजी स्कूलों के उड़ा दिए होश, मचा हड़कंप

लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी एक आदेश से प्रदेशभर के निजी स्कूलों में बवाल मच गया है। आदेश के माध्यम से निजी स्कूलों से परीक्षा लेने का अधिकर छीन लिया गया है।

रायपुर से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहाँ लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के एक नए आदेश ने प्रदेश के निजी स्कूल संचालकों की नींद उड़ा दी है। सरकार ने निजी स्कूलों से उनकी परीक्षाओं के आयोजन का अधिकार छीनकर उसे जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) के हाथों में सौंप दिया है। इस फैसले के बाद शिक्षा जगत में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

आदेश की मुख्य बातें: क्या बदलेगा?

केंद्रीकृत परीक्षा: प्रश्नपत्रों का निर्माण, मॉडरेशन और वितरण जिला शिक्षा अधिकारी की देखरेख में गठित समितियां करेंगी।

समय-सीमा: 28 फरवरी तक सिलेबस पूरा करना होगा। वार्षिक परीक्षाएं 25 मार्च से 10 अप्रैल के बीच आयोजित होंगी।

नतीजों का गणित:कक्षा 1-4, 6-7: त्रैमासिक (20%), छमाही (20%) और वार्षिक (60%) के अंकों को जोड़कर रिजल्ट बनेगा।

कक्षा 9 व 11: छमाही (30%) और वार्षिक (70%) अंकों के आधार पर परिणाम तैयार होगा।

कोई फेल नहीं होगा: आदेश के अनुसार, यदि कोई छात्र पूरक परीक्षा में भी अनुत्तीर्ण होता है, तो भी उसे अगली कक्षा में प्रवेश (Promotion) दिया जाएगा। किसी को भी फेल कर रोका नहीं जा सकता।

निजी स्कूलों का तीखा विरोध: “ताला लगाकर चाबियां सौंप देंगे”

इस आदेश को निजी स्कूल संघ ने “तुगलकी फरमान” करार दिया है। मंगलवार रात हुई आपातकालीन बैठक में स्कूल संचालकों ने साफ कर दिया कि वे इस हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करेंगे।

“कई स्कूलों ने अपनी समय-सारणी घोषित कर दी है। ऐन वक्त पर ऐसा आदेश थोपना अन्याय है। अगर सरकार ने यह आदेश वापस नहीं लिया, तो हम स्कूलों में ताले लगाकर चाबियां शासन को सौंप देंगे।”

निजी स्कूल संघ

परीक्षा का पूरा शेड्यूल (Timeline)

कार्य

अंतिम तिथि

समितियों का गठन

5 फरवरी 2026

प्रश्नपत्र निर्माण (3 सेट)

15 फरवरी 2026

प्रश्नपत्र मॉडरेशन

20 फरवरी 2026

संकुलों को वितरण

20 मार्च 2026

वार्षिक परीक्षा

25 मार्च – 10 अप्रैल

नतीजों की घोषणा

30 अप्रैल 2026

सरकार का तर्क है कि इससे शिक्षा की गुणवत्ता में एकरूपता आएगी, जबकि निजी स्कूलों का मानना है कि यह उनकी स्वायत्तता पर हमला है। अब देखना होगा कि शासन इस विरोध के बाद अपने कदम पीछे खींचता है या यह विवाद कोर्ट तक पहुँचता है।इधर, आपातकालीन बैठक
आदेश जारी होने के बाद से ही निजी स्कूलों में हड़कंप मच गया है। मंगलवार रात्रि में आपातकालीन बैठक बुलाई गई। ऑनलाइन हुई इस बैठक में आदेश के विरोध का निर्णय लिया गया है। निजी स्कूल संघ के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने कहा, कई निजी स्कूल समय सारिणी घोषित कर चुके हैं। चंद दिनों पूर्व इस तरह का तुगलकी फरमान जारी करना अन्याय हैं। यदि आदेश वापस नहीं हुआ तो हम अपने स्कूलों में ताले लगाकर चाबी शासन को सौंप देंगे

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