
कोरबा (mediasession24.in)। कोल इंडिया की सहायक कंपनी एसईसीएल (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) की गेवरा कोयला परियोजना के विरोध में प्रदर्शन कर रहे भू-विस्थापितों पर रविवार को सीआईएसएफ बल द्वारा लाठीचार्ज किया गया, जिसमें कई लोग घायल हो गए। प्रदर्शन का नेतृत्व छत्तीसगढ़ किसान सभा (अखिल भारतीय किसान सभा से संबद्ध) कर रही थी। संगठन ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए सीआईएसएफ अधिकारियों पर अपराध दर्ज करने की मांग की है।जानकारी के अनुसार, कोरबा-पश्चिम क्षेत्र की मेगा परियोजना गेवरा ओपनकास्ट माइंस के विस्थापित ग्रामीण रोजगार, पुनर्वास और मुआवजा की मांग को लेकर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस और सीआईएसएफ बल मौके पर तैनात था। इसी बीच, सीआईएसएफ के एक अधिकारी और प्रदर्शनकारियों के बीच कहासुनी हो गई। आरोप है कि अधिकारी ने अभद्र भाषा का प्रयोग किया, जिसके बाद अचानक बल ने लाठीचार्ज शुरू कर दिया।लाठीचार्ज में किसान सभा के जिला सचिव दीपक साहू, रमेश दास, बिमल दास और गुलाब दास समेत कई लोगों को चोटें आईं। घायल प्रदर्शनकारियों को बाद में दीपका थाना ले जाया गया। घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण थाने पहुंच गए और उन्होंने लाठीचार्ज का आदेश देने वाले अधिकारियों पर अपराध दर्ज करने की मांग की।थाना प्रभारी प्रेमचंद साहू ने घायलों का मुलायजा करवाने और उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।छत्तीसगढ़ किसान सभा के प्रदेश संयुक्त सचिव प्रशांत झा ने कहा कि —
“एसईसीएल के तानाशाही रवैये के चलते भू-विस्थापितों पर बल प्रयोग निंदनीय है। जब तक रोजगार, पुनर्वास और मुआवजा की समस्याओं का समाधान नहीं होता, तब तक किसी भी स्थिति में खदान विस्तार नहीं होने दिया जाएगा।”
उन्होंने आगे कहा कि संगठन की मांग है कि प्रभावित प्रत्येक खातेदार को नियमित रोजगार, उचित मुआवजा और पुनर्वास की सुविधा दी जाए, तथा नए और पुराने मुआवजा प्रकरणों में हो रही कटौती को तत्काल रोका जाए।किसान सभा के जिला सचिव दीपक साहू ने भी घटना की आलोचना करते हुए कहा
“आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण था, फिर भी सीआईएसएफ ने लाठीचार्ज किया। लाठी और बंदूक के दम पर खदान विस्तार नहीं होगा। पहले रोजगार, पुनर्वास और मुआवजा की समस्याओं का समाधान जरूरी है।”
संगठन ने चेतावनी दी है कि जब तक अधिग्रहित ग्रामों के लंबित रोजगार और मुआवजा प्रकरणों का निपटारा नहीं किया जाता, तब तक खदान विस्तार कार्य का विरोध जारी रहेगा। किसान सभा के पदाधिकारी अब आगे की रणनीति तय करने में जुटे हैं और आंदोलन को व्यापक रूप देने की तैयारी कर रहे हैं।उक्त प्रदर्शन में गेवरा क्षेत्र के प्रभावित ग्रामों के सैकड़ों भू-विस्थापित शामिल हुए।घटना के बाद से क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है और प्रशासन हालात पर करीबी नजर रखे हुए है।









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