
कोरबा (mediasession24.in)। कोरबा जिले में जिला खनिज संस्थान न्यास मद (डीएमएफ) और मनरेगा से जुड़े करोड़ों-अरबों रुपये के घोटाले की जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) करेगी। पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर की ओर से दस्तावेजी साक्ष्यों सहित की गई शिकायत के बाद केंद्र सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच एजेंसी को कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए हैं।राज्य शासन के खनिज संसाधन विभाग ने निर्देश जारी करते हुए कहा है कि डीएमएफ व मनरेगा में हुए कथित घोटालों की जांच सीबीआई से कराई जा रही है। विभाग के इस आदेश के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। बताया जा रहा है कि जांच के घेरे में कई वरिष्ठ अधिकारी, ठेकेदार और बिचौलिए भी आ सकते हैं।पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने 15 मई को आवेदन के माध्यम से कोरबा जिला खनिज संस्थान न्यास मद और मनरेगा में हुए वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि डीएमएफ और मनरेगा की भारी भरकम राशि विकास कार्यों के नाम पर केवल कागजों में खर्च दिखा दी गई है। शिकायत में तत्कालीन कलेक्टर एवं जिला खनिज संस्थान न्यास मद के अध्यक्ष रानू साहू, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत कोरबा एवं सचिव, जिला खनिज संस्थान न्यास मद नूतन कंवर तथा उप संचालक पंचायत जिला पंचायत जूली तिर्की पर मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।राज्य शासन के अवर सचिव मारुवारा चंद्रशेखर द्वारा संचालक भौमिक एवं खनिकर्म विभाग को जारी आदेश में कहा गया है कि प्राप्त शिकायतों की तथ्यपरक जांच कर रिपोर्ट शीघ्र मंत्रालय को भेजी जाए। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि केंद्र से प्राप्त सीबीआई के निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई की जाए और दोषियों पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।खनिज न्यास मद की राशि का उद्देश्य खनिज प्रभावित क्षेत्रों और गांवों का विकास है, लेकिन ननकीराम कंवर के अनुसार यह राशि “अधिकारियों की तिजोरियां भरने में” खर्च कर दी गई। उन्होंने कहा कि खनिज न्यास की राशि जनता के विकास के लिए है, न कि फर्जी कामों और भ्रष्टाचारियों के ऐशो-आराम के लिए।इस आदेश के बाद कोरबा जिले के प्रशासनिक गलियारे में भारी हलचल मच गई है। कई विभागीय फाइलें दोबारा खोली जा रही हैं। अब कोरबा की डीएमएफ और मनरेगा फंड से जुड़ी सभी फाइलें सीबीआई के हाथों में हैं।ज्ञात हो कि ननकीराम कंवर पूर्व में भी कई बड़े घोटालों का पर्दाफाश कर चुके हैं, जिनमें छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग परीक्षा घोटाला, शराब घोटाला, महादेव सट्टा एप घोटाला, सीजीएमएससी दवाई घोटाला, राष्ट्रीय राजमार्ग मुआवजा घोटाला और कोयला चोरी घोटाला शामिल हैं। इन मामलों में कई आईएएस अधिकारी, राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी और अन्य नेता जेल भेजे जा चुके हैं।डीएमएफ और मनरेगा घोटाले की यह जांच आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में कई चेहरों को बेनकाब कर सकती है।









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