हिंदी के उत्थान का, आओ करें विमर्श,
मिलकर कर लें आज हम,
भाषा का उत्कर्ष।।

भाषा में हो शुद्धता, लिख लो सभी विधान।
करो परिष्कृत लेख को, बनों तभी विद्वान।।
हिंदी लिख कर के करें भाषा को समृद्ध।
हिंदुस्तानी हैं सभी,
करना होगा सिद्ध।।
हिंदी के भी साथ में, आंग्ल हुई है ग्राह्य।
मातृ भाष्य हिंदी हुई, अंग्रेजी हो बाह्य।।
हिंदी अंग्रेजी सगी, बहनें है यह मान।
अंग्रेजी में ही लिखे, अपने सभी विधान।।
हिंदी भाषा है सरल, प्यारे इसके बोल।
सब भाषाओं की सखी, इसका करो न मोल।।
हिंदी भाषा है सदा, अपने आप समर्थ।
समझ सकें हम जब कभी, अपने हित का अर्थ।।
सभी राजभाषा लिखें, बोलें हिंदी बोल।
दूजे भाषा के लिए हिंदी को मत तोल।।
हिंदी भाषा के लिए, करते रहें प्रचार।
हिंदी का ही मान हो, माध्यम हो संचार।।
आशा मेहर’किरण’
रायगढ़ छत्तीसगढ़







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