खेतों के मेड पर, हिंगलाज के फूल खिले
कितने मनोहर
देखने में ये लगते हैं !
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हमें भी देखो, जैसे देखते उन फूलों को
सुंदरता उनसे
कम हम नहीं रखते हैं !
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औषधीय गुणों से, भरपूर हम हैं
क्या होगा पूजा में,
ईश शीश न चढ़ते हैं !
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जाने उनके लिए, महत्वपूर्ण हम हैं
न जाने उनके लिए,
व्यर्थ ही खिलते हैं !
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प्रभात कटगीहा
कटगी







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