स्वास्थ्य के मामले में काफ़ी तेज़ी से विकसित होते कोरबा शहर के जानेमाने वरिष्ठ सर्जन ,कोरबा स्वास्थ्य सेवाओं के एक आधार स्तंभ ,न जाने कितनी साँसों को उखडने से रोकने वाले ,हर दिल अज़ीज़ ,ज़िंदादिल डॉक्टर के एल वाधवानी सर्जन डॉ जी एल वाधवानी पंच तत्व में विलीन हो गए।
गरीबों के मसीहा के नाम से पहचाने जाने वाले डॉक्टर वाधवानी का जाना ना सिर्फ़ कोरबा बल्कि चिकित्सकीय जगत की एक अपूर्णीय क्षति है ।डॉक्टर वाधवानी कोरबा वासियों के लिए किसी परिचय के मोहताज नहीं है ।विनम्र श्रद्धांजलि के रूप में एक छोटा सा परिचय एक महान हस्ती का ,जिसमें वो बातें संजोने का प्रयास किया है जो सर्वविदित होनी चाहिए ।
डॉक्टर जी एल वाधवानी का जन्म 29 सितंबर 1952 को एक व्यावसायिक परिवार में हुआ था ।छह भाइयों में सबसे बड़े गिरधारी लाल वाधवानी अपने पिता के बेहद लाड़ले थे।पिता की पारखी नज़रों ने बेटे में छिपी प्रतिभा को परख लिया था ।व्यावसायिक होते हुए भी उन्होंने बेटे को चिकित्सा के क्षेत्र में जाने को प्रेरित किया।पिता के सपनों को पूरा करने हेतु के एल ने 1970 में रायपुर मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लिया ।उनकी मेहनत और लगन ने उन्हें एक बेहतरीन “शल्यचिकित्सक” बनने की ओर अग्रसर किया ।
रायपुर और बिलासपुर के शहरी जीवन को छोड़ डॉक्टर वाधवानी ने कोरबा की छोटी सी पीएससी से अपनी यात्रा आरंभ की ।यह वह समय था जब कोरबा एक गाँव से अधिक कुछ नहीं था ।लेकिन ये डॉक्टर वाधवानी का सेवा भाव और अपने पेशे के प्रति निष्ठा ही थी कि कोरबा कि वो छोटी सी हासपिटल और डॉक्टर वाधवानी एक दूसरे का पर्याय बन गये ।
यहाँ यह बताना बहुत सामयिक होगा कि कोरबा का सरकारी अस्पताल भारत का पहला सरकारी अस्पताल है जिसे आई एस ओ प्रमाण पत्र मिला था और इसे प्राप्त करने में डॉक्टर वाधवानी की मेहनत और निष्ठा ही थी ।
डॉक्टर वाधवानी की धर्मपत्नी लगभग 5 वर्ष पूर्व ही दिवंगत हो गई थी ।उनका 1 पुत्र और एक पुत्री है ।
आज कोरबा के समस्त चिकित्सकों के आम लोगों के नयन अश्रुपूरित है।भरे कंठ और नयनों संग हर वह चिकित्सक और नागरिक डॉक्टर वाधवानी को याद कर रहा है जिसने उनके साथ वक़्त बिताया है जिसने उनके हाथों का संस्पर्श पाया है और स्वस्थ हुआ है।

श्रद्धा सुमन अर्पित हैं: डॉ मंजुला साहू
आज इस भौतिक युग में जब हर कोई सुख और संतोष की चाहत में भाग रहा है तब डॉक्टर जी एल वाधवानी जैसे विरले व्यक्तित्व का शून्य में विलीन हो जाना अति दुखद है ।जिंदादिली की मिसाल क़ायम करने वाले डॉक्टर वाधवानी हम सबके दिलों में हमेशा ज़िंदा रहेंगे ।
सादर नमन
डॉक्टर मंजुला साहू “निर्भीक “








Comments are closed.