
पखांजुर । प्रदेश के दूरस्थ अंचलों में ग्रामीण लाचारी के दिन काट रहे हैं। बस्तर संभाग के ग्रामीण अंचलों में आज भी स्वास्थ्य व्यवस्था खाट पर लटकी हुई है। आजादी के 72 साल बीत जाने के बाद भी प्रदेश के कई ऐसे हिस्से हैं जहां स्वास्थ्य व्यवस्था दम तोड़ चुकी है और लोगों को दम तोड़ने के लिए विवश कर रही है।
ऐसा ही एक मामला कोयलीबेड़ा विकासखंड का सामने आया है। यहां एक महिला को प्रसव पीड़ा होने पर अस्पताल जाने के लिए एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो पाया, जिसके चलते उसे ग्रामीणों की मदद से खाट पर लाद कर कोटरी नदी को पार कराया गया और अस्पताल पहुंचाया गया।
ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार 102 को फोन लगाया। लेकिन कोई रिस्पांस नहीं आया। जिसके बाद ग्रामीणों ने महिला को बांदे अस्पताल खुद ही खाट पर पहुंचाया। अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने महिला का सुरक्षित प्रसव कराया। फिलहाल जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।
लगातार बड़े-बड़े दावे करने वाले स्वास्थ्य मंत्री के सभी दावे खोखले साबित होते दिख रहे हैं। आम से खास सबको स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने का हमेशा दावे करते रहते हैं। जो कहीं न कहीं साबित हो रहा है। ऐसा नजारा पहली बार देखने को नहीं मिला है। पहले भी सामने आ चुका है। ऐसे में संवेदनशील स्वास्थ्य मंत्री विभाग के आला अधिकारियों की लापरवाहियों पर सख्ती बरतने की जरूरत है।







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