
कोरबा। नगर के प्रतिष्ठित व्यवसायी कन्हैया लाल बुधवानी का विगत दिनों देहावसान हो गया। कुछ समय पूर्व कन्हैया भाई कोरबा से रायपुर स्थानांतरित होकर वही व्यवसाय कर रहे थे।
यहां कोरबा में उनका बचपन बीता और प्राथमिक शिक्षा दीक्षा शासकीय आदिम जाति कल्याण विभाग शाला में हुई ।
उनके असामयिक निधन पर उनके मित्र उन्हें आत्मिकता से याद कर रहे हैं । जैसे ही उनके दुखद देहावसान की खबर आई लोगों में शोक व्याप्त हो गया।
मुझे अच्छी तरह स्मरण है कि
कन्हैया बुधवानी ने अल्पायु में ही अपनी बखर बुद्धि का लोहा मनवाया था। उन्होंने मुझसे 1 वर्ष पूर्व छठी क्लास उत्तीर्ण की थी। इस तरह वह मेरे सीनियर थे साथ ही पड़ोसी भी थे ही। जब मैं छठवीं क्लास पहुंचा तो कन्हैया भाई ने मुझे अपनी अंग्रेजी की काफी दी थी सच!! वह अंग्रेजी की कॉपी देखकर मैं अचंभित रह गया था इतनी सुंदर राइटिंग और इतने प्रभावशाली उत्तर उन्होंने लिखे थे कि देखकर जब मैं दंग रह गया। वह कापी साल भर मेरे काम आती रही। इस तरह मैं कन्हैया भाई का एक तरह से ऋणी हो गया। पढ़ाई में कन्हैया बुधवानी बहुत अच्छे थे मगर परिवारिक परिस्थितियों के कारण उन्होंने अपनी शिक्षा बीच में ही छोड़ दी और परिवार की जिम्मेदारी संभाल ली।
मुझे लगता है वह जन्मजात प्रतिभाशाली थे यही कारण है कि युवा होते होते उसने अपने परिवार का बोझ अपने कंधे पर उठा लिया। आने वाले वक्त में परिवार को इस मुकाम तक पहुंचा दिया की लोग बुधवानी परिवार की ओर देखते हुए रश्क किया करते थे।
सच कहूं तो लोग कहते हैं ना! हे भगवान!! पुत्र देना… क्योंकि पुत्र परिवार को तार देता है सो, उनके पिता स्वर्गीय आनंद बुधवानी जी और परिवार ने जीवन में जो कठिनाइयां देखी थी कन्हैया भाई ने देखते ही देखते उन्हें दूर कर दिया। और लोगों को बतलाया कि एक योग्य पुत्र क्या होता है। कुल मिलाकर के वे अपने परिवार के लिए श्रवण कुमार थे। कन्हैया बुधवानी कोरबा पूज्य सिंधी समाज के वरिष्ठ सदस्य रामचंद्र बुधवानी के अनुज थे। भाई कन्हैया बुधवानी की स्मृति को मेरा नमन और श्रद्धांजलि।
- सुरेश रोहरा , संपादक लोक सदन कोरबा







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