शहीद भगत सिंह के विचारों को आत्मसात करना जरुरी

हमारे देश के माटी में अनेक वीर क्रांतिकारियों ने जन्म लिया जिन्होंने अपने क्रांतिकारी विचारों से आवाम के भीतर बूझी हुयी आजादी के लौ को जलाया. क्रांतिकारियों के बलिदान ने देश के युवाओं के भीतर देशप्रेम एवं राष्ट्रवाद की भावना जगाई थी. उनके विचारों से प्रभावित होकर विशेषकर युवा, अपनी मातृभूमि को अंग्रेजी हुकूमत से मुक्त कराने के लिए वे अपना घ्रर दार तक छोड़ देते थे. ऐसे ही एक महान क्रांतिकारी, सरदार भगत सिंह का जन्म २८ सितम्बर १९०७ को पंजाब के जिले लायलपुर के बंगा गांव में हुआ था, अब यह जगह पाकिस्तान में है. भगत सिंह बचपन से ही निर्भीक एवं तीक्ष्ण बुद्धि के थे. बचपन में जब उन्होंने जलियांवाला बाग़ हत्याकांड देखा तो उनके बाल मन पर अंग्रेजो के प्रति घृणा निर्माण हो गयी थी. वर्ष १९२० में जब गांधीजी ने असहकार आंदोलन की शुरुआत की थी उस वक्त इस १३ वर्षीय बालक ने गांधीजी के आंदोलन से प्रभावित होकर इसमें बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था. भगत सिंह अपने उम्र से अधिक परिपक्व थे तथा वे बचपन से ही समाजवाद ,मार्क्सवाद एवं लेनिन जैसे लेखकों की किताब पढ़ते थे जिस वजह से वे हमेशा समाज में समानता प्रस्थापित करने के विचार रखते थे.
शहीद भगत सिंह का उद्देश्य मात्र आजादी नहीं था उनके अनुसार, देश को आजादी दिलाना केवल पहला कदम है. उनका मकसद एक आदर्शवादी वतन बनाना था . वे एक ऐसे आजाद भारत की कल्पना करते थे जहाँ हर तबके के लोगो को जीने का हक़ मिले. जहाँ मजहब के नाम पर समाज में बटवांरा ना हो. एक ऐसा वतन जो इंसान का इंसान के ऊपर जुल्म बर्दाश ना करें. वे भ्रष्ट्राचार एवं शोषण मुक्त देश की कल्पनां करते थे. दरअसल वे एक समाजवादी वतन बनाना चाहते थे. ताकि देश के पिछड़े, शोषित, दलित ,किसान एवं मजदुर वर्ग देश में खुशहाल जीवन व्यतीत कर कर सके. हालाँकि, वर्तमान में अभी जो देश की स्थिति है तथा जिस तरह देश में आज भी किसान आंदोलन एवं मोब लिंचिंग जैसी घटनाये होती है, इससे यही जाहिर होता है कि भगत सिंह के सपनो का भारत बनाने में हम अब तक नाकामयाब साबित हुए है.
वास्तव में, भगत सिंह सांप्रदायिकता, अंधविश्वास आदि को उपनिवेशवाद जितना ही खतरनाक मानते थे. वे मानते थे की धर्म यह इंसान का निजी मामला है इसलिए जनता ने अपने भीतर धर्म के प्रति सहनशीलता की समझ विकसित करना चाहिए. “मैं नास्तिक क्यों हूँ “ इसमें वे लिखते है प्रगति के लिए संघर्षशील व्यक्ति को अंधविश्वासों की आलोचना करना ही होगा और पुराणपंथी विचारो पर तार्किकता से विचार करना होगा. अतः आज यह बात समझना जरुरी है कि भगत सिंह का मतलब बन्दुक लेकर आजादी के लिए कूद पड़ना नहीं था बल्कि भगत सिंह का मतलब उच्च वैचारिकता ,तार्किकता, धर्मनिरपेक्षता, सहिष्णुता विद्वत्ता, अध्ययन वृत्ति और अपने तार्किक एवं निष्पक्ष समझ से सही को सही तथा गलत को गलत कहकर अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज निर्भीकता से बुलंद करना होता है.

निशांत महेश त्रिपाठी

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