
इतनी ही चिंता है तो
इतना रहम कर दीजिये l
एन्ड्राईड़ फोन हरेक
विद्यार्थी को भेट कीजिये l
आप बडे है आपको
हम क्या सिखा सकते है l
पर कैसे बच्चे पढ़ेंगे
ये कला हमसे सीखिए l
संवेदनशील नही हैं
ये जाहिर हुआ आदेश से
हमदर्द बनना है तो
दृगनीर से भींजिए l
सटीक परमारथ से बड़ा
पुण्य कोई भी नही
पुण्य ऐसा कर उसका
फायदा आप लिजिए l
बिन आधार कह के
ईमारत ख़डी करने को
मूर्खता है जनाब ये
कह रहा हूँ न खिझिये l
कहने से, कुछ कर ने से
कोई लक्ष्य नही मिलता l
उचित कार्य कर के
रस आनंद का पीजिए l
नवाचार जो शुरू किए
क्या उनपे मुग्ध होना
जो सही पथ में चलाये
तनिक उन पे रिझिये l
प्रभात कटगीहा
कटगी






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