
अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए कल वित्त मंत्री द्वारा की गई घोषणाओं में से दो केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों से संबंधित है।
पहली है “स्पेशल फेस्टिवल एडवांस स्कीम” जिसके अंतर्गत
केंद्र सरकार के कर्मचारियों को 10,000 रुपये ब्याज मुक्त एडवांस की रकम प्री-पेड रूपे कार्ड के रूप में मिलेगी। कर्मचारियों को 1,000 रुपये की 10 किस्तों में यह रकम वापस करनी होगी।इस रकम को 31 मार्च, 2021 तक खर्च किया जा सकेगा।इसका इस्तेमाल पीओएस मशीन पर किया जा सकता है पर इस पैसे को एटीएम से नहीं निकाला जा सकता है।
केंद्र सरकार के अनुसार इस स्कीम के तहत 4,000 करोड़ रुपये की रकम जारी की जा सकती है। यह मानकर कि राज्यों की ओर से भी ऐसी योजना लाई जाएगी तो इस पर अतिरिक्त 8,000 करोड़ रुपये की रकम खर्च होगी। सरकार का मानना है कि इससे मांग में इजाफा होगा और अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
दूसरी योजना है “एलटीसी कैश वाउचर” की सुविधा।केंद्रीय कर्मचारियों को एलटीसी के तौर पर कैश वाउचर दिये जायेंगे जिससे उन्हें गैर खाद्य वस्तुएं जिन पर 12 प्रतिशत या उससे अधिक का जीएसटी लगता हो को डिजिटल मोड में खरीदना होगा।इस योजना के एक महत्वपूर्ण बिंदु का हिंदी के कुछ अखबारों ने उल्लेख नहीं किया है।एलटीसी के लिए किराया निर्धारण कर्मचारी की पात्रता के अनुसार तीन स्लैब में किया गया है।बिजनेस क्लास के लिए रू 36000, इकोनामी के लिए रू 20000 तथा रेल किराए के लिए 6000रू।टैक्स में छूट पाने के लिए कर्मचारी को इस रकम का तीन गुना खर्च करना पड़ेगा।उदाहरण के लिए यदि कोई कर्मचारी रेल किराए के आधार पर अपने 5 लोगों के परिवार के लिए 6000रू प्रति व्यक्ति के हिसाब से ₹30000 के लिए पात्र होगा।उसको इनकम टैक्स में छूट कर देने के लिए ₹90000 खर्च करने पड़ेंगे। वित्त मंत्री जी के सारे आंकड़े इस अनुमान पर आधारित है कि सभी पात्र कर्मचारी सुविधा का लाभ उठाएंगे और तीन गुना खर्च करेंगे।एक महीने के वेतन के बराबर का पैसा तो लीव एनकैशमेंट से मिल जाएगा परंतु शेष पैसे का कर्मचारी को इंतजाम करना पड़ेगा।वित्त मंत्री ने इसमें ₹5675 करोड़ रुपए के खर्च का अनुमान किया है और 1900 करोड़ रुपए पीएसयू और बैंकों से खर्च की उम्मीद है।इसी आधार पर शायद इस स्कीम से सरकार 28000 करोड़ रुपए अतिरिक्त मांग की उम्मीद लगाए बैठी है।यहां पर यह उल्लेखनीय है कि सरकारी उपक्रमों और बैंकों में एलएलटीसी के नकदीकरण की व्यवस्था पहले से लागू है और उस पर खर्च करने के तरीके पर कोई नियंत्रण नहीं है।
अभी तक भारतवर्ष के स्वतंत्र नागरिक को जहां भी फेस्टिवल एडवांस या एलटीसी का नगदीकरण मिलता था वहां कर्मचारी को अपने विवेक से खर्च करने की पूरी छुट्टी थी।अब सरकारी कर्मचारी त्योहार के अवसर पर अपने परिवार के लिए फल,मिठाई,कपड़े जैसी आवश्यकताओं के लिए अपनी मर्जी से छोटे कामकाजी,रेहड़ी वाले से,फेरी वाले से या पटरी वाले दुकानदार से सामान नहीं खरीद सकता है।इसके लिए उसे पीओएस वाली मशीन पर ही जाना पड़ेगा।इसी प्रकार एलटीसी नकदीकरण पर भी अपनी मर्जी से खर्च करने की अनुमति नहीं है।देश मे क्या कोई फाइनेंशियल इमरजेंसी चल रही है जो अपने ही पैसे इतनी पाबंदी लगाई जा रही है?इस निर्देशित तरीके से खर्च करने के लिए आदमी को बांध देने से जो पैसा असंगठित क्षेत्र में स्वरोजगारियों के पास जा सकता था ऊस पर भी विपरीत प्रभाव पडेगा। यह कदम आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्य से मेल नहीं खाता है।
आदरणीय वित्त मंत्री महोदया को अपने आंकड़े ठीक कर लेने चाहिए।आंकड़े और पूर्वानुमान “एक्ट ऑफ गॉड” नहीं है। आंकड़ों का पूर्वानुमान लगाते समय उसका व्यवहारिक पक्ष भी देखना चाहिए वरना यह केवल एकेडमिक एक्सरसाइज रह जाएगी।






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