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शिक्षक, देखो यदी कल तुमने स्कूल का फिस जमा नहीं किया तो तुम्हें स्कूल से निकाल दिया जाएगा…….और तुमने यह फटे हुए कपड़े क्यों पहने हैं…..एक काम करो कल तुम अपने पिता के साथ स्कूल आना अगर तुम कल अपने पिता को साथ लेकर नहीं आए तो तुम्हें सज़ा मिलेगी समझे ….।
बच्चा चुप चाप शिक्षक की बात सुनता रहा और स्कूल से छुट्टी मिलने के बाद घर आकर अपनी मां से बोला….. मां तुम मुझे नए कपड़े लेकर क्यों नहीं देती हो टिंचर मुझे फटे पुराने कपड़े पहन कर स्कूल आने से रोकते हैं।
मां बेटे की बात सुनकर उदास हो जाती हैं….. फिर बोली बेटा कहीं से पैसे आते हैं तो तुम्हें नए कपड़े बनवा कर दूंगी…..।
बच्चा बोला, अच्छा मां टीचर ने कहा है, कल अपने पिता को साथ में लेकर आना है, मां तुमने कहा था अब्बा कहीं पर जाकर सोए हुए हैं….. चलो न मां अब्बा को जगा कर स्कूल लेकर चलते हैं,…… मां कब से अब्बा सोए हैं…..टिंचर ने कहा है अगर मैं अब्बा को साथ लेकर नहीं आया तो वह मुझे सज़ा देंगे और स्कूल में पढ़ने नहीं देंगे क्योंकि अब्बा ने स्कूल का फिस नहीं जमा किया है ।
मां बच्चे की बात सुनकर स्तब्ध रह गई थी, अब उसे समझ में नहीं आ रहा था वह करें तो क्या करें क्या कभी मुर्दे भी जागा करते हैं ॽ
जब बच्चा बहुत ज़िद करने लगा तो मां ने कहा कल पिता के पास लेकर जाउंगी की बात कह कर बात को टाल दिया था।
उगले दिन बच्चा सुबह सवेरे उठकर फिर मां से अब्बा को लेकर स्कूल जाने की ज़िद करने लगा मां ने फिर शाम को चलाने की बात कहकर एक बार फिर बात टाल दिया, सोचा शाम तक अब्बा को साथ लेकर आने वाली बात भूल जाएगा और स्कूल जाकर टिंचर से इसके पिता के इस दुनियां में जीवित नहीं रहने की बता दुंगी।
शाम होते ही बच्चा फिर मां से अपने को पिता को जगा कर स्कूल लेकर जाने की ज़िद करने लगा, अब ज़िद हद से अधिक बढ़ गई थी अब वह रोने भी लगा था ।
मां अब बेबस हो रही थी अन्त में गुस्से में मां ने निर्णय लिया कि अब बच्चे को हकीकत से अवगत करा ही देगी फिर उसने बच्चे का हाथ पकड़ा और उसे यह बोलते हुए कब्रिस्तान की ओर चल पड़ी….चल अब तुम्हें तुम्हारे अब्बा के पास लेकर चलती हुं जहां वह सोए हुए हैं,
कुछ दूर चलने के बाद दोनों मां बेटे कब्रिस्तान में एक कब्र के सामने खड़े थे, मां ने एक कब्र की ओर इशारा करते हुए कहा, देखो तुम्हारे अब्बा इसी के अंदर सोए हुए हैं, तुम उठाकर देख लो अगर तुम से उठ सकतें हैं तो उठा लो ।
बच्चा रोते हुए हुई अपने पिता के की कब्र से लिपट गया और बोलने लगा….. अब्बा उठो देखा टिंचर क्या बोलते हैं अगर मैं तुम्हें साथ लेकर नहीं आया तो वह मुझे सज़ा देंगे और स्कूल में पढ़ने से भी रोक देंगे….. अब्बा उठो चलो मेरे साथ स्कूल चलो…..।
एक तरफ यह गरीब बच्चा अपने पिता की कब्र पर लपट कर रो रहा था उसे स्कूल की फीस जमा नहीं करने और स्कूल में फटे पुराने कपड़े पहन कर आने के सज़ा के रूप में स्कूल से निकाल जाने का ग़ुस्सा था और वहीं पिता के नहीं होने का ग़म था,
दूसरी ओर कुछ पैसे वाले लोग उसी कब्रिस्तान में अपने पूर्वजों के आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए हजारों हजार रुपए की कीमती चादर कब्र पर चढ़ा रहे थे,तो कोई फूल की चादर चढ़ा रहा था , कोई कीमती इतर से कब्र धो रहा था, हर कोई धार्मिक कर्मकांड चल रहा था मगर उसी कब्रिस्तान में इन्सानियत दम तोड़ रही थी, उस बच्चे के स्कूल का फिस जमा करने के लिए मदद को कोई हाथ आगे नहीं बढ़ था, उस बच्चे के फटे पुराने कपड़े की जगह ने कपड़े देने के लिए कोई हाथ आगे नहीं आया पर वर्षों पूर्व गुज़र चुके अपने पूर्वजों के आत्मा की शांति के लिए हजारों रुपए की चादर चढ़ा रहे थे।
लेखक ज़फ़र हसन
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