मंत्रियों के चमकते हुए बंगले और जनता


प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से लेकर हमारे वार्ड से पार्षद का चुनाव लड़ने वाला घंटोली एक ही बात कहते हैं कि वे राजनीति में समाज की सेवा के लिए आये हैं,लेकिन हकीकत ये नहीं कुछ और है. राजनीति में जो आता है या आ रहा है वो जनसेवा के लिए अपनी सेवा के लिए आ रहा है,या आ चुका है और अब अंतिम सांस तक बाहर नहीं जाना चाहता .
जनसेवा की संक्रामक बीमारी से पीड़ित जनसेवक भले ही सरकार को आकंठ कर्ज में डुबाने में कोई कसर न छोड़ें लेकिन उन्हें अपनी शान-शौकत से कोई समझौता बर्दाश्त नहीं .महात्मा गांधी की पूजा करने वाले चाहे कांग्रेसी हों या पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानवतावाद की माला जपने वाले भाजपाई दोनों का चरित्र एक जैसा है. क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के सर्वे सवा यानि सुप्रीमो कहे जाने वाले नेताओं का तो कहना ही क्या? आपने स्वर्गीय जय ललिता और बहन मायावती के स्वयं सेवा के किस्से सुने ही होंगे .
इन दिनों मध्यप्रदेश सरकार के पास गैस पीड़ित विधवाओं को मात्र हजार रूपये की पेंशन देने के लिए पैसे नहीं हैं कई सरकारी कर्मचारियों की तनख्वाह, डीए अटका हुआ है. परीक्षा होने के बावजूद कई छात्र नौकरी की बाट जोह रहे हैं. हर जगह तर्क कोरोना की वजह से सरकारी तिजोरी खाली है. लेकिन इस दौरान माननीय मंत्रियों की शानौशौकत में कोई कमी नहीं आने दी जा रही क्योंकि इन बेचारों को जनता की सेवा जो करना पड़ती है .
आपको जानकर हैरानी हो सकती है कि मध्यप्रदेश में मंत्रियों के बंगले सजाने के काम पर बीते दस महींने में में 4.58 करोड़ से ज्यादा खर्च कर दिए गए .आधिकारिक आंकड़ों पर यकीन किया जाये तो इस फिजूलखर्ची में मध्यप्रदेश के बच्चों के मामा श्री शिवराज सिंह चौहान के बंगले की साज-सज्जा पर सबसे ज्यादा लगभग 1 करोड़ रुपए सीएम हाउस पर खर्च हुए हैं. उनके 74 बंगला स्थित एक अन्य बंगले में भी 13.41 लाख का काम हुआ है.प्रदेश में जनसेवा के लिए जाने-पहचाने वाले पीडब्ल्यूडी मंत्री गोपाल भार्गव के बंगले की साज-सज्जा में 56 लाख रूपये खर्च कर दिए गए लगे हैं. टीनोपाल मंत्री के रूम में मशहूर गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के घर में 44,84,४५५रूप्ये का काम हुआ का काम हुआ.
बड़े मियाँ तो बड़े मियाँ लेकिन छोटे मियाँ सुभानअल्लाह वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए
नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह के घर में 31,29,269 का, स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी के बंगले पर 27,94,541 का, सहकारिता मंत्री अरविंद भदौरिया के बंगले पर 19,41,810 और परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के बंगले पर 18,75,175 का खर्च हुआ. यह सब तब जब मध्यप्रदेश पर 2 लाख करोड़ से ज्यादा का कर्ज है. विधानसभा में सरकार ने बताया है कि पिछले 8 महीने में ही वो 23000 करोड़ का कर्ज ले चुकी है सरकार का कहना है घर है खर्चा होता है, पूरे आंकड़े बजट में देंगे.
भला हो एक जनसेवक कांग्रेस विधायक पांचीलाल मेड़ा का जो उन्होंने इस बारे में राज्य विधानसभा में ये सब जानकारी मांग ली मेदा शायद जानते थे की. साल भर पहले जब कांग्रेस के नेता बंगलों में आए थे तो उन्होंने रंग रोगन में करोड़ों खर्चे थे.
प्रदेश के अत्यंत भद्र वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा, ”ये व्यवस्था में हुआ होगा, आखिर निवास है आवास है उसमें खर्चा हुआ होगा. सारी चीजें बजट में रखेंगे सब सामने आ जाएगा.” ये खर्च तब हुआ है जब, 2019 में ही मंत्रियों के बंगले को सजाने में 3 करोड़ 68 लाख रुपए खर्च हुए थे. उस वक्त सबसे ज्यादा 45,30,606 रूपये चार इमली स्थित सूबे के वित्त मंत्री तरुण भनोट के बंगले को सजाने में खर्च किया गया है.
पिछले साल सत्ता गँवा चुकी कांग्रेस के जनसेवक मंत्री भी जनधन पर छक्के-पंजे मारने में पीछे कभी नहीं रहे. आंकड़े बताते हैं कि कांग्रेस के शासनकाल में पीडब्ल्यूडी मंत्री सज्जन सिंह वर्मा के चार इमली इलाके में स्थित बंगले के मरम्मत के लिये 42.68 लाख रुपये खर्चे गये थे. इस फिजूलखर्ची में सज्जन सिंह वर्मा ने अपने मुख्यमंत्री कमलनाथ को भी पीछे छोड़ दिया था,कमलनाथ के बंगले की मरम्मत, साज सजावट पर 33.80 लाख रुपये से अधिक की राशि खर्च किये गये थे.
सत्ता गंवा चुकी कांग्रेस अब विपक्ष की हैसियत से पूछ रही है,कि कर्ज में रहकर बंगले की रंगाई क्यों की. पूर्व कैबिनेट मंत्री जीतू पटवारी ने कहा ”एक तरफ कर्ज ले रहा है मध्यप्रदेश एक साल में 33000 करोड़ रुपये, दूसरी तरफ करोड़ों रुपये करोड़ों रुपये मंत्रियों के बंगले के लिए, इस सरकार का प्रबंधन क्या है, दायित्व क्या है. भ्रष्टाचार और कर्ज का पर्याय है ये सरकार. ये ठाठ बाट, तब हैं जब साल भर पहले बदले निजाम में बंगलों की चमक बदली थी. साल भर बदले निजाम में चमकते बंगलों की चमक बदली, आपके हमारे पैसों से.”
मेरा काम आप तक आंकड़ों की ये कहानी आप तक पहुंचना था सो मैंने अपना काम कर दिया ,अब ये आपके ऊपर है कि आप विश्लेषण करें या जाने दें . जिस प्रदेश में कोरोना काल में गरीबों के घर अंधियारा है वहां साल दर साल कथित जनसेवकों के घर दीवाली से जगमग हैं. ऐसे जन सेवकों की आप चाहें तो आरती उतारें या फिर भजन -कीर्तन करें .मर्जी है आपकी,क्योंकि ये चुने हुए जनसेवक हैं आपके .
मजे की बात ये भी है कि जन धन कीहोली जलाने वाले इन जनसेवकों में से एक भी ऐसा नहीं है जिसका की भोपाल में अपना खुद का मकान न हो लेकिन इन्हें तो जनसेवा के लिए सरकारी बँगला ही चाहिए और वो भी एकदम चकाचक .मध्यप्रदेश में ढाई दर्जन छोटे-बड़े मंत्रीं हैं,इनमें से अधिकाँश के पास राजधानी के अलावा अपने मुख्यालयों पर भी सरकारी बंगले हैं .मंत्रियों के अलावा पूर्व और वर्तमान सांसदों ने भी सरकारी बंगलों पर अपना डेरा जमा रखा है .अब तो राज्य सभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया तक बंगले वाले हो गए हैं ,अन्यथा अब तक उन्हें भोपाल में होटलों में रुकना पड़ता था .
@ राकेश अचल

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