प्लास्टिक प्रदूषण देशों के बीच युद्ध की हालात पैदा कर रहा है।

पिछले वर्ष ही स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने भारत को प्लास्टिक प्रदूषण से मुक्त करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहे थे कि देश को प्लास्टिक कचरे से मुक्त करने के अभियान की शुरुआत भारत सरकार द्वारा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर की जाएगी। यह अभियान दोस्त स्वच्छ भारत की सफलता से प्रेरित होकर सरकार द्वारा पिछले वर्ष किया गया था। जिसमें बढ़-चढ़कर स्कूल कॉलेजों के छात्र छात्राओं ने भी भाग लिया था, हम सभी ने भी प्लास्टिक मुक्त कैंपस बनाने के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय के सभी कॉलेजों में जाकर छात्र और छात्राओं को जागरूक किए। 2 अक्टूबर को गांधी जयंती है, फिर से आओ दोस्त हम सभी मिलकर लोगों से आवाहन करते हैं कि प्लास्टिक को अपने जीवन शैली में उपयोग नहीं करेंगे । दोस्त आपको बता दें कि हाल ही में अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संगठन वर्ल्ड वाइड फंड द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक 2020 तक प्लास्टिक प्रदूषण दोगुना हो जाएगा। वैज्ञानिकों के अनुसार समुंद्र में 1950 से 2016 के बीच के इन 66 वर्षों में जितना प्लास्टिक जमा हुआ है, उतना आगे केवल एक दशक में जमा हो जाएंगे। इससे महासागरों में प्लास्टिक कचरा 30 करोड़ टन तक पहुंच सकता है । दोस्त प्लास्टिक एक ऐसा पदार्थ होता है जिसे विभिन्न आकारों में ढाला जा सकता है, आज देखे तो प्लास्टिक पूरी दुनिया के लिए एक विकट समस्या बन चुका है, इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि प्लास्टिक सालों साल मिट्टी में दबे रहने के बावजूद मिट्टी का हिस्सा नहीं बन पाते, साथ ही यह पानी को जमीन के अंदर जाने से भी रोक देते हैं। जिस रूप में आज हम जिस प्लास्टिक का प्रयोग कर रहे हैं, इसकी खोज दोस्त 27 मार्च 1933 को अनजाने में हो गई थी, जो कि आज जीव जंतुओं के साथ-साथ मानव के लिए भी खतरा बना हुआ है। आपको बता दें कि हर साल उत्पादित होने वाले कुल प्लास्टिक में से महज 20 फीसद ही रिसाइकिल हो पाता है, जबकि 39 फीसद जमीन के अंदर दबाकर नष्ट किया जाता है और आंकड़ों के मुताबिक 15 फीसद प्लास्टिक को जला दिया जाता है। जब प्लास्टिक जलाया जाता है दोस्त तब जो उत्सर्जित होने वाली कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा निकलती है यह आंकड़ों के मुताबिक 2030 तक तिगुनी हो जाएगी, जिससे हृदय रोग के मामले में तेजी से वृद्धि होने की आशंका है।
अगर हम अपने भारत की बात करें प्लास्टिक प्रदूषण की तो यहां यह समस्या दोस्त बहुत ही विकराल हो चुकी है। देखते हैं आप भी कि यहां प्लास्टिक कचरे का निस्तारण करना तो दूर, इसके सही से कलेक्शन और रखरखाव की व्यवस्था भी नहीं है। आप भी देखते होंगे कि हमारे यहां सड़क से लेकर नाली, सीवर और घरों के आसपास प्लास्टिक कचरा हर जगह नजर आता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार हमारे देश में प्रतिदिन लगभग 26 हजार टन प्लास्टिक कचरा निकलता है । वही हम वर्ल्ड इकोनामिक फोरम की आंकड़े देखें तो भारत में सालाना 56 लाख टन प्लास्टिक कूड़ा पैदा होता, दुनिया भर में जितना कूड़ा सालाना समुंद्र मे डंप किया जाता है, उसका 60 प्रतिशत भारत डंप करता है, और हम भारतीय रोजाना लगभग 15 हजार टन प्लास्टिक कचरे में फेंक देते हैं।
देखा जाए तो साल दर साल प्लास्टिक प्रदूषण हमारे पीने के पानी, भोजन और हवा को दूषित करता जा रहा है। हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार 1 वर्ष में 52 हजार से ज्यादा प्लास्टिक के माइक्रो कण खाने-पीने और सांस के जरिए इंसान के शरीर के अंदर जा रहा है, अगर हम इसमें दोस्तों वायु प्रदूषण को भी मिला दे तो हर साल करीब 1,21,000 माइक्रोप्लास्टिक्स कण हम मनुष्य के अंदर खाने-पीने और सांस के जरिए लगातार जा रहा है।
हम दोस्त प्लास्टिक प्रदूषण कितना खतरनाक है इसी से अंदाजा लगा सकते हैं कि जहां कोई प्रदूषण नहीं है, वहां भी प्लास्टिक मौजूद है। मेरा कहने का मतलब है कि माइक्रो प्लास्टिक पृथ्वी पर हर जगह मिलने वाले कणों में से एक है । चाहे दुनिया के सबसे ऊंचे ग्लेशियर हो या दोस्त सबसे गहरी समुद्री खाईयां । आंकड़ों के मुताबिक हर साल तकरीबन 10.4 करोड टन प्लास्टिक मलबा समुद्र में समा जाता है। वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि 2050 तक समुद्र में मछली से ज्यादा प्लास्टिक के टुकड़े होने की आशंका है। आज दोस्त प्लास्टिक के मलवे से समुद्री जीव पूरी तरह प्रभावित हो रहे हैं, कछुओं की दम घुटने से मौत हो रही है और व्हेल इसके जहर का शिकार हो रही है। प्रशांत महासागर में द ग्रेट पेसिफिक पैच समुंद्र में कचरे का सबसे बड़ा ठिकाना है। यहां पर आज 80 हजार टन से भी ज्यादा प्लास्टिक जमा हो गया है। प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या की विकरालता का अंदाजा इस बात से भी आप लगा सकते हैं कि आज इसे लेकर दो देशों के बीच युद्ध के हालात तक बन चुके हैं। कुछ वर्ष पहले ही फिलिपिंस ने कनाडा को कचड़ा वापस न लेने पर युद्ध की चेतावनी दी थी। यह स्थिति इसलिए उत्पन्न हो गई थी क्योंकि कनाडा ने फिलीपींस के रीसाइक्लिंग के लिए कचरे के कंटेनर भेजे थे। इसी मुद्दे पर दोनों देशों के बीच 2013- 14 में शीत युद्ध भी चला।
हम आज कह सकते हैं कि प्लास्टिक कचरा वैश्विक स्तर की बड़ी समस्या बन गया है, आज इसका नुकसान सिर्फ इंसानों को ही नहीं, बल्कि दोस्त जीव जंतुओं यहां तक कि समुद्र में रहने वाले जीवो को भी उठाना पड़ रहा है। ऐसे में इस समस्या से निपटने के लिए हम सभी को अपने स्तर पर कदम उठाने की जरूरत है साथ ही सरकार को भी बड़ा स्तर से इस पर काम करने की जरूरत है। इसके लिए सबसे पहले हमें प्लास्टिक थैले लेने से ही मना कर देना चाहिए, हमेशा कपड़े के बने हुए थैले का प्रयोग करेंगे। फिर सरकार को प्लास्टिक के उत्पादन और वितरण पर भी रोक लगाना चाहिए। सरकार को ठोस कचरा प्रबंधन नियम 2016 को प्रभावशाली और इमानदारी पूर्वक से लागू करना चाहिए, इसके अंतर्गत दोस्त कचरे को सूखे और गीले में अलग-अलग करके रखा जाना चाहिए ताकि इससे पर्यावरण को हो रही क्षति को रोका जा सके और रोजगार के अवसर भी बढ़ाया जा सके। कुछ राज्य सरकारों ने जिस प्रकार से प्लास्टिक पर पूरी तरह से पाबंदी लगाई है उसी तरह से पाबंदी देशव्यापी स्तर पर लगाने की जरूरत है।

विक्रम चौरसिया

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