“मुझे भाषायें अच्छी लगती हैं
पर तीन को बहुत प्यार करता हूँ
अंग्रेज़ी को,जो मुझे रोटी देती है
हिंदी को, जो मुझे देश से जोड़ती है
सिंधी को जो मुझे सपने देती है”

इस कविता के रचनाकार ,मातृ-भाषा सिंधी के प्रतिष्ठित कवि मनीषी वासदेव मोही का आज अहमदाबाद में देहावसान हो गया।वे लगभग एक माह से निमोनिया से पीड़ित हो गहन चिकित्सा केंद्र में भर्ती थे।
आधुनिक सिंधी ग़ज़लकार के साथ ही नई कविता के प्रमुख कवि के रूप में उनका महत्वपूर्ण स्थान तो है ही,कहानीकार के रूप में भी उनका विशिष्ट योगदान है।साहित्य अकादमी पुरस्कृत श्री मोही सिंधी भाषा के अब तक के अकेले रचनाकार थे जिन्हें भारतीय भाषाओं के लिये दिये जाने वाला “सरस्वती सम्मान” भी 2019 में प्रदान किया गया।केंद्रीय साहित्य अकादमी में सिंधी भाषा परामर्श मंडल के संयोजक के रूप में भी उन्होंने भाषा और साहित्य के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट छाप छोड़ी।उनका जाना सम्पूर्ण भारतीय साहित्य जगत की बड़ी क्षति है।
उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि के साथ अंतिम प्रणाम…
हरीश करमचंदानी







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