0 सुशासन तिहार में मामले की हुई शिकायत लंबित.
कोरबा/पाली:- पाली जनपद पंचायत का हाल क्या है? किसी से भी पूछने पर सीधा सा जवाब देगा कि सीईओ की कुर्सी इन दिनों अफसरशाही, भ्रष्ट्राचार व रिश्वतखोरी के गिरफ्त में है। जहां विकास कार्यों की मंजूरी से लेकर बगैर लेनदेन के यहां कोई काम नही होता। जिससे इस जनपद के अधीनस्थ ग्राम पंचायतों के सचिवों व सरपंचों को बिना कमीशन के कार्यालयीन कार्य कराने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जनपद पंचायत के सीईओ मनमानी पूर्वक कार्य कर रहे है तथा उन्हें अपने शीर्ष अधिकारी, यहां तक कि जिला प्रशासन का भी डर व भय नही है। आरोप है कि भ्रष्ट्राचार में लिप्त सीईओ भूपेंद्र सोनवानी द्वारा कथित तौर पर पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय राशि भी हजम करने की नीति सोच रखी थी। लेकिन सुनियोजित तरीके से रची गई इस भ्रष्ट्राचार की चर्चा आम होते देख आनन- फानन में लाखों की राशि बैंक को जारी कर दी गई।
सरकार द्वारा सरपंचों और पंचों को उनके काम के लिए मानदेय राशि दी जाती है। पूर्व में जहां सरपंचों को 2500 रुपए तो पंचों को 200 मानदेय प्राप्त होता था। लेकिन प्रदेश में भाजपा की सत्ता आने के बाद साय सरकार ने इस राशि को बढ़ाकर सरपंच का 4000 तो पंच का 500 रुपए किया है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पाली जनपद अंतर्गत संचालित 93 ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधियों का अगस्त 2024 से फरवरी 2025 तक के मानदेय राशि गबन करने की नीति पर काम हो रहा था, जहां सरपंचों और पंचों द्वारा उनके हक का पैसा नही मिलने के संबंध में जनपद सीईओ से पूछे जाने पर बजट अलॉटमेंट नही होना बताया जाता रहा। जबकि जिले के अन्य 4 जनपदों से पंचायत प्रतिनिधियों को मानदेय राशि महीने पूर्व जारी कर दी गई है। ऐसे में पीड़ित एक तत्कालीन सरपंच ने सुशासन तिहार में एक शिकायत दी थी कि जनपद सीईओ द्वारा सरपंचों और पंचों को मिलने वाली मानदेय धनराशि अपने अधीन रख लिया गया है और बजट नही आने का बहाना बनाया जा रहा है। जिस शिकायत के आधार पर कोई कार्रवाई तो नही हुई परंतु यह मामला सार्वजनिक होते ही पंचायत प्रतिनिधियों में असंतोष और आक्रोश पैदा होने लगा तथा सीईओ की कार्यप्रणाली पर उंगली उठने लगे। इससे हड़बड़ाए सीईओ ने बीते दिनों जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित, पाली शाखा को 77 लाख का चेक जारी किया लेकिन खाते में महज 3 लाख होने के कारण चेक बाउंस हो गया। इस पूरे मामले के जानकार कुछ जागरूक सरपंचों ने सीईओ श्री सोनवानी से जब जवाब मांगा तब उन्होंने आनन- फानन में 77 लाख की मानदेय राशि उक्त बैंक के खाते में एकमुशत जमा करा दी। सरपंचों का आरोप है कि जनपद सीईओ द्वारा उनके मानदेय राशि डकारने का प्रयास किया जा रहा था। ऐसे में यह न केवल एक गंभीर आरोप है, बल्कि अधिकारी के कार्य रवैये पर सवालिया निशान लगने के साथ सरकार की विश्वसनीयता एवं पारदर्शिता पर भी प्रश्नचिन्ह लगने जैसा है। मामले को गंभीरता से लेना और निष्पक्ष व पारदर्शी जांच के साथ उचित कार्रवाई किया जाना आवश्यक है।







Comments are closed.