नाराज़गी से भरा शख्स थोड़े सुकून में…


-दिनेश श्रीनेत

उसकी आँखों के पीछे कुछ सुलगता रहता था। एक नाराज़गी, जो जाने कब लंबी उदासी में तब्दील हो चुकी थी- उसके चेहरे का स्थायी भाव बन गई थी। वह मुस्कुराता तो लगता कि किसी पर एहसान कर रहा है। कंधों पर उसका कोट झूलता रहता था। कमीज़ अक्सर बाहर होती थी। उसका गुस्सा निजी हदों को पार कर जाता था। उसकी नाराज़गी पूरे सिस्टम से थी। हमें हमेशा महसूस होता था कि उसकी सुलगन कभी भी एक भभकती आग में बदल सकती है। और ये सलीम-जावेद का कमाल था, जिन्होंने क्रोध को कविता में बदल दिया था। अमिताभ के खामोश गुस्से वाले वाले उन किरदारों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। सारी दुनिया से नाराज़ यह शख्स भी प्रेम करता था। उसकी आवाज़ में कोमलता आ जाती थी। उसके इस प्रेम में सामने वाले के प्रति सम्मान था। वह अपने प्रेम को अभिव्यक्त नहीं करना चाहता था। प्रेम पानी की तरह खुद ही उसके भीतर अपनी शक्ल ले लेता था। मुझे तीन चेहरे याद आते हैं, तीन फिल्में याद आती हैं और तीन गीत भी याद आते हैं। फिल्में हैं- ‘काला पत्थर’, ‘त्रिशूल’ और ‘शक्ति’। 
‘काला पत्थर’ में अंधेरी रात और बारिश के बीच एक छतरी के नीचे जाते राखी और अमिताभ को हम देखते हैं। ढाबे की धधकती भट्टी और धुएं के बीच पंजाबी गीत के बोल उठते हैं-  
इश्क़ और मुश्क़ कदे न छुपदे
ते चाहे लख छुपाइये
अखाँ लख झुकाके चलिये
पल्ला लख बचाइए
इश्क़ है सच्चे रब दी रहमत
इश्क़ तो क्यूँ शर्माइए
राखी असहज हो उठी हैं मगर अमिताभ उसी तरह मंथर चाल से सिर झुकाए उनके साथ कदम मिलाते हुए आगे बढ़ रहे हैं। ये कुछ ही कदमों में सिमटा हुआ गीत है। उस समय के चलन के विपरीत न तो नायक नायिका ख्वाब देखते हैं और न ही उनकी ड्रेस बदलती है। निर्देशक यश चोपड़ा बड़ी खूबसूरती से कदमों का यह सफर नायक नायिका के साथ तय करते हैं। अमिताभ की खामोशी यहां बोलती है। उनकी आंखें, वे जिस तरह चलते हैं, जैसे उन्होंने एक हाथ में छतरी और दूसरे हाथ में बाक्स थाम रखा है। बारिश और प्रेम की अभिव्यक्ति के मिलते-जुलते बहुत से गीत हिंदी फिल्मों में हैं। उनमें से ये गीत बेहद खूबसूरत है मगर अंडररेटेड है, इसकी कोई चर्चा नहीं मिलती।
 
दूसरा एक पार्टी गीत है। ख़य्याम की खूबसूरत धुन मानों पर्वतों से आने वाली ठंडी हवा हो। पिछले गीत की तरह यहां भी बोल साहिर के हैं, फिल्म है ‘त्रिशूल’। प्रेम में डूबा एक जोड़ा गीत शुरू करता है और साहिर उसे एक धारदार बहस में तब्दील कर देते हैं। निजी प्रतिशोध में सुलगता हुआ एक व्यक्ति जो अपने ही वजूद के एक हिस्से यानी अपने पिता से नफरत लेकर आया है प्रेम को किस तरह देखता है? साहिर लिखते हैं- 
किताबों में छपते है, चाहत के किस्से
हक़ीकत की दुनिया में चाहत नहीं
ज़माने के बाज़ार में, ये वो शै’ है 
के जिसकी किसी को, ज़रूरत नहीं है
ये बेकार बेदाम की चीज़ है
इस झुंझलाहट के बीच राखी की मौजूदगी भी है। वे पार्टी ड्रेस में हैं और उन्होंने आरेंज साड़ी पहन रखी है। ऐसा लगता है कि जैसे वे उसे छटपटाते गु्स्से को समझ रही हैं। अमिताभ जब उनकी तरफ देखते हैं तो लगता है कि उनकी निगाहों में एक उम्मीद है कि कोई मुझे समझ पाएगा।
 
आखिरी गीत ‘शक्ति’ फिल्म से है। पूरी फिल्म में कंधे पर कोट थामे एक नाराज़गी से भरा शख्स यहां पर थोड़े सुकून में दिखता है। उसके चेहरे पर मुस्कुराहट भी है और वह प्रेम का इज़हार भी कर पा रहा है। खुश वो इतने हैं कि खिलते हुए फूलों के बीच जाकर कहते हैं, “लगता है मेरा सेहरा तैयार हो गया…” उनके साथ एक सांवली, खूबसूरत, उनके ही जैसी गंभीर स्त्री है- स्मिता पाटील। हालांकि जब आप पूरी फिल्म देखते हैं तो इस गीत में निहित त्रासदी उभर कर आती है, क्योंकि उनके बीच यह खुशी लंबे समय तक टिकने वाली नहीं है। 
इन तीनों फिल्मों में अमिताभ जिस खूबसूरती से अपनी कठोरता, क्रोध, खुद के जीवन की त्रासदी के बीच प्रेम की कोमलता को अभिव्यक्त करते हैं, उसमें कविता छिपी है। वे एक साथ लाखों लोगों के दिल पर असर कर जाते हैं। समय की सीमा पार कर जाते हैं और उनकी खामोश सुलगती निगाहें, वो सौम्य प्रेम- हमेशा-हमेशा के लिए आपके मन में बस जाता है। यह अमिताभ के अभिनय का कमाल तो है ही, ये सलीम-जावेद थे जिन्होंने उदासी, गुस्से और प्रेम के इन रंगों का ऐसा खूबसूरत संतुलन बनाया था। टॉमस हार्डी के किरदारों की तरह त्रासदी कहीं बाहर नहीं इन किरदारों के भीतर ही थी। जमाने से नाराज़गी भी, प्रेम भी, जिंदगी जीने की ललक भी और मृत्यु भी। (फेसबुक से)

  • Related Posts

    स्व-सहायता समूह की दीदियों ने कलेक्टोरेट और जिला पंचायत में लगाया प्राकृतिक रंगों से बने गुलाल का स्टॉल

    महिला सशक्तिकरण की सशक्त मिसाल, वोकल फॉर लोकल को मिल रहा बढ़ावा नैना और प्रगति स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने लगाया हर्बल गुलाल का स्टॉलजांजगीर-चांपा, 3 मार्च 2026/ कलेक्टर जन्मेजय…

    Read more

    कलेक्टर ने कोटपा एक्ट के सख्त पालन के निर्देश, शैक्षणिक परिसरों को एक माह में तंबाकू-मुक्त बनाने का लक्ष्य

    *कलेक्टर ने कोटपा एक्ट के सख्त पालन के निर्देश, शैक्षणिक परिसरों को एक माह में तंबाकू-मुक्त बनाने का लक्ष्य  जिले में मादक पदार्थों की उपलब्धता, सेवन एवं अवैध बिक्री पर…

    Read more

    Comments are closed.

    You Missed

    स्व-सहायता समूह की दीदियों ने कलेक्टोरेट और जिला पंचायत में लगाया प्राकृतिक रंगों से बने गुलाल का स्टॉल

    स्व-सहायता समूह की दीदियों ने कलेक्टोरेट और जिला पंचायत में लगाया प्राकृतिक रंगों से बने गुलाल का स्टॉल

    कलेक्टर ने कोटपा एक्ट के सख्त पालन के निर्देश, शैक्षणिक परिसरों को एक माह में तंबाकू-मुक्त बनाने का लक्ष्य

    कलेक्टर ने कोटपा एक्ट के सख्त पालन के निर्देश, शैक्षणिक परिसरों को एक माह में तंबाकू-मुक्त बनाने का लक्ष्य

    Amarjeet Bhagat : छत्तीसगढ़ राज्यसभा टिकट के लिए कांग्रेस में घमासान, दिल्ली दरबार पहुंचे अमरजीत भगत

    Amarjeet Bhagat : छत्तीसगढ़ राज्यसभा टिकट के लिए कांग्रेस में घमासान, दिल्ली दरबार पहुंचे अमरजीत भगत

    होली पर्व के अवसर पर कोरबा जिले में 4 मार्च को रहेगा शुष्क दिवस, मदिरा दुकानें रहेंगी पूर्णतः बंद

    होली पर्व के अवसर पर कोरबा जिले में 4 मार्च को रहेगा शुष्क दिवस, मदिरा दुकानें रहेंगी पूर्णतः बंद

    जंगल में बकरी चराने गए चरवाहे पर भालू ने किया हमला, हुई मौत

    जंगल में बकरी चराने गए चरवाहे पर भालू ने किया हमला, हुई मौत

    श्री श्री सोलापुरी माता पूजा समिति बंगलायार्ड की बैठक संपन्न माता पूजा 2026 को ऐतिहासिक बनाने का संकल्प

    श्री श्री सोलापुरी माता पूजा समिति बंगलायार्ड की बैठक संपन्न माता पूजा 2026 को ऐतिहासिक बनाने का संकल्प
    error: Content is protected !!