नववर्ष पर पाली विखं के मन्दिर और पिकनिक स्थल श्रद्धालुओं और सैलानियों से रहे गुलजार

धार्मिक एवं संस्कृति विरासत सहित प्राकृतिक सौंदर्य से ओत प्रोत है पाली विख, सैलानियों को करता अपनी ओर आकर्षित

कोरबा/पाली:-. नववर्ष 2021 के आगमन और पूरा वर्ष सुखमय मंगलमय गुजरे इसकी कामना को लेकर आज पाली क्षेत्र के धार्मिक स्थल, मंदिर और पिकनिक स्थल सैलानियों और श्रद्धालुओं से गुलजार रहे ।सभी जगह पर भीड़ देखी गई और लोगों ने अपने-अपने तरीके से नव वर्ष का स्वागत कर खुशियां मनाई।

हम सभी 2020 को अलविदा कहकर 2021 में प्रवेश कर चुके है। जैसे जैसे वर्ष बीत रहा है वैसे ही वैसे लोग अपने धार्मिक एवं संस्कृति को पीछे छोड़ते जा रहे है। जिसका मुख्य वजह पाश्चात्य संस्कृति का समाज पर हावी होना है।

किंतु इन सबसे परे पाली विकासखण्ड आज भी अपनी धार्मिक एवं संस्कृति विरासत को लेकर प्रदेश ही नही वरन देश के अनेक हिस्सों में भी अपनी एक अलग पहचान रखता है।जहाँ ऐतिहासिक केंद्र बिंदु शिवमंदिर जिसे वाण वंश के शासक विक्रमादित्य ने 870- 900 ईसवी सदी में निर्माण कराया था जहाँ महाशिवरात्रि पर्व के साथ ही नौ दिवसीय मेला का आगाज होता है

वही इसके सामने स्थित विशालकाय नौकोनिया तालाब भी आकर्षक का केंद्र है।इसके अलावा प्रदेश के 36 गढ़ में से एक लाफागढ़ की ऐतिहासिक विरासत तथा छग का शिमला कहा जाने वाला धार्मिक आस्था वाले धार्मिक पर्यटन केंद्र चैतुरगढ जहाँ के घने हरियाली से आच्छादित हसीन वादियों में पहाड़ी के शिखर पर विराजमान माँ महिषासुर मर्दिनी का मंदिर जहाँ पहुँचकर इसके विस्तृत इतिहास के साथ शंकरगुफा, सिंहद्वार व गुप्तद्वार के बारे में जानने की जिज्ञासा प्रबल हो जाती है।साथ ही पाली का बूढ़ादेव पीठ स्थल, बिलासपुर मार्ग पर ग्राम मुनगाडीह का सकरियापाठ, माँ चेंपारानी भी आस्था के केंद्र है।अब बात करें संस्कृति की तो हरेली (गेंड़ी तिहार), छेरछेरा, पोला- तीजा पर्व, राउत व देवार नाचा, सुआपंथी, गौरा- गौरी, मड़ई मेला तथा ग्रामीण आदिवासियों द्वारा हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाने वाला बार व बीदर महोत्सव भी प्रमुख है।

अब चलते है जलप्रपात एवं पिकनिक स्पॉट की ओर तो चैतुरगढ मार्ग पर लाफा व जेमरा के मध्य स्थित.कोहनी मोड़ जलप्रपात., खैराबहार का बामरजुंझा और पोटापानी में नगड़ीकूड़ा के साथ माखनपुर स्थित नागिनझरना, चैतमा से ग्राम ईरफ होते हुए 10 किलोमीटर पहाड़ी पर स्थित नरसिंह गंगा, घुइचुआं से पेंड्रा मार्ग पर तीन झरिया व झोझा जलप्रपात के साथ पोड़ी, कोडार, सैला एवं डोंगनाला का जलाशय एक आकर्षण का केंद्र के अलावा बेहतरीन पिकनिक स्पॉट के रूप में विस्तार होने के साथ प्रचलित हो चला है। आज नव वर्ष पर यह सभी केंद्र श्रद्धालुओं और सैलानियों से गुलजार रहे।

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