कह रही है सरकारें, सावधान रहो पर
लोग है की लापरवाही
करते बेखटके !
कुछ न होगा कहके, लगाते न मास्क वो
रहते भीड़ में
इससे उससे मिलते !
यही सोंच कोरोना को, फल फूलने दे रहा
जिसमे चंगुल में
फंसके मरते !
हालत ऐसा होता न, स्वस्थ रहते सभी
जो सावधानी
पहले से बरतते !
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समय है अब भी, लापरवाही बंद हो
समेट के बोरिया बिस्तर
कोरोना भगेगा !
भूल से प्रताड़ित करने, मेरे भारत को
रक्तबीज दुबारा
फिर न तकेगा !
सावधानी देखके, तुम्हारी हमारी ये
पीड़ित देश को,
सबक नव मिलेगा !
चलेंगे वो भी, नक्शे कदम पे हमारी फिर
कोरोना का आतंक,
जग से मिटेगा !
प्रभात कटगीहा
कटगी






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