
कोरबा। लोकसदन दैनिक समाचार पत्र के 12 वें स्थापना दिवस पर दिनांक-18.05.2021 को लोकसदन परिवार की ओर से संपादक सुरेशचंद रोहरा के मार्गदर्शन में एक ऑनलाइन संगोष्ठी काव्यसम्मेलन का आयोजन बड़े ही भव्य रूप से किया गया। लोक सदन औद्योगिक नगर कोरबा से प्रकाशित राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी के सिद्धांतों का प्रचार प्रसार का बीड़ा उठाकर चलने वाला देश का बहुमूल्य अखबार है इस अवसर पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को नमन करते हुए कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया।
कार्यक्रम के संयोजक आशा आजाद कवियत्री ने बताया कि वर्चुअल कार्यक्रम में विभिन्न प्रांत के साहित्यकार,लेखक,पाठकों की उपस्थिति में कार्यक्रम की शुरुआत की गई।
ऑनलाइन कार्यक्रम में सम्मानीय बुद्धि जीवी साहित्यकारों ने अपना वक्तव्य विस्तार से रखा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ लेखक पत्रकार राकेश श्रीवास्तव, लखनऊ, उत्तर प्रदेश ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के योगदान का उल्लेख करते हुए बताया कि किस तरह आज भी महात्मा गांधी की बताई बातें समीचीन है 100 वर्ष पूर्व उन्होंने जो कहा था वह आज भी यथार्थ है।
कार्यक्रम की शुरुआत श्रीमती गायत्री शर्मा,( छत्तीसगढ़) द्वारा माँ वीणापाणि की वंदना दोहे के रूप में समर्पित कर कार्यक्रम का प्रारंभ किया। संपादक सुरेशचंद रोहरा ने अपने उद्बोधन में लोकसदन दैनिक समाचार पत्रिका के बारे में विस्तार से बताया एवं सभी को 12 वीं स्थापना दिवस की शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए नित्य लेखन करने की आग्रह किया उन्होंने कहा बापू के सिद्धांत को जन-जन तक पहुंचाना हमारा ध्येय है,हमें उसे अपने व्यक्तिगत जीवन में उनके आदर्शों को स्वीकारना चाहिए ।
उद्बोधन के पश्चात कविवर महेन्द्र साहू ने सभी को 12 वीं स्थापना की शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए कहा कि हमें नित्य समाचार पत्रिकाओं को पढ़ना चाहिए और हमें उससे लाभ लेना चाहिए, उन्होंने गीत “अमावस की रात में” प्रस्तुत किया कवि प्रभात शर्मा द्वारा छत्तीसगढ़ी गीत,”तेंदू पत्ता” का बखान करते हुए बहुत ही सुंदर गीत प्रस्तुत किया। कवि रामसाय श्रीवास द्वारा गजल “अपने दिल के जख्मों को सारे छुपाके रखता हूँ” प्रस्तुत किया।
कवियत्री श्रीमती कौशल्या खुराना श द्वारा अपने छत्तीसगढ़ी गीत ” हाय रे हाय रे कोरोना जियन दे ना रे ” प्रस्तुत कर सुंदर संदेश दिया।अगली कड़ी में लोक सदन के प्रमुख स्तंभ गुस्ताखी माफ के लेखक जफर हसन, मुजफ्फरपुर, बिहार द्वारा गांधी जी के सिद्धांतों पर सुंदर लेख प्रस्तुत किया गया कोरोना से महामारी में हमें दृढ़ शक्ति के साथ कार्य करना होगा। कवियत्री नम्रता सिंह द्वारा छत्तीसगढ़ी रचना प्रस्तुत की गई- “अब ना शंशो न गम हे जिनगी,न इ खोजो तोला कहूँ जा जिनगी”प्रस्तुत कर समा बांध दिया। सरस्वती साहू नवोदित कवियत्री ने अपने गीत”जरख उतर कर तो देखो” से समा बांधा। आगे कवियत्री दौपदी साहू द्वारा छत्तीसगढ़ी गीत “आमा फरे हे झूले झूल झूल” प्रस्तुत किया।
तत्पश्चात लेखक, चश्मे के भीतर के रचयिता घनश्याम तिवारी द्वारा गांधी जी के शुभ संदेश को सभी के समक्ष रखा और एक सुंदर गीत “आप मिल जाइए” प्रस्तुत किया।तत्पश्चात गायत्री शर्मा जी द्वारा दोहे और गीत” दुख सुख को साझा करें” से समा बाँध दिया। हैदराबाद से रमाकांत श्रीवास द्वारा शुभकामना बधाई देते हुए एक गीत प्रस्तुत किया “हौसला रख तू बंदे भोर अब निकलने वाली है” से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।अंतिम कड़ी में वर्चुअल कार्यक्रम की संयोजक छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण कवियत्री आशा आजाद “कृति” द्वारा दोहे प्रस्तुत किए गए जो पूर्ण रूप से लोकसदन दैनिक समाचार पत्र को समर्पित किया
“लोक सदन अखबार की, वर्षगांठ है आज ।
समाचार के क्षेत्र में, नित्य-नव आगाज ।।
अंत में लोक सदन दैनिक समाचार पत्रिका के संपादक द्वारा सभी सम्मानीय साहित्यकारों को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए अपने कलम को नित्य चलाने एवं गरिमा बनाएँ रखने के लिए सहृदय आभार व्यक्त किया।इस प्रकार सभी साहित्यकारों के साथ लोकसदन दैनिक पत्र का 12 वां वर्षगांठ गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ। लोक सदन के इस वर्चुअल संगोष्ठी की संयोजक श्रीमती आशा आजाद “कृति ” एवं सहायक इंजीनियर रमाकांत श्रीवास थे।







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