देवू प्रकरण : जमीन वापस दिलाने किसानों ने की हाई कोर्ट से अपील, किसान सभा ने शुरू किया ‘हाई कोर्ट को पोस्टकार्ड’ अभियान

कोरबा। देवू द्वारा रिस्दी गांव की अधिग्रहित भूमि को उनके मूल खातेदारों को वापस करने की मांग लगातार जोर पकड़ रही है और ग्रामीण आंदोलन के अनोखे तरीके भी अपना रहे हैं। बरसों पूर्व अधिग्रहित भूमि की खुदाई कर रहे एक्सीवेटरों को भगाने में सफल होने के बाद ग्रामीणों के बीच न्याय पाने के लिए लड़ने का हौसला और बढ़ा है। आज कई ग्रामीणों ने हाई कोर्ट को पत्र लिखकर अपनी जमीन वापस दिलाने की अपील की है।

छत्तीसगढ़ किसान सभा ने आज रिस्दी गांव से ‘हाई कोर्ट को पोस्टकार्ड’ अभियान की शुरुआत की। पहले ही दिन कई ग्रामीणों ने कोरबा जिला प्रशासन की मदद से देवू द्वारा उनकी जमीन हड़पने की कोशिश की शिकायत की है और न्यायालय से गरीबों की जमीन को छीनने से बचाने की प्रार्थना की है। छत्तीसगढ़ किसान सभा के नेता जवाहर सिंह कंवर, प्रशांत झा तथा दीपक साहू की अगुवाई में ग्रामीणों के सहयोग से यह अभियान चलाया गया।

उल्लेखनीय है कि इस इलाके में पॉवर प्लांट लगाने में असफल होने के बाद दक्षिण कोरियाई कॉर्पोरेट कंपनी देवू ने बिलासपुर हाई कोर्ट में एक रिट याचिका दायर कर इस भूमि का किसी अन्य औद्योगिक प्रयोजन या रियल एस्टेट व्यापार के लिए उपयोग की अनुमति मांगी है। इस संबंध में भूपेश साहू, सुमित दान, संजय कंवर, हरिशंकर कंवर आदि ग्रामीणों का कहना है कि दिवालिया होने और किसानों से किये गए करार को पूरा न कर पाने के बाद देवू का इस भूमि पर कोई अधिकार नहीं बनता और भूमि अधिग्रहण कानून के प्रावधानों के तहत अब यह भूमि उन्हें लौटा दी जानी चाहिए। वैसे भी इस भूमि पर पिछले 27 सालों से उनका भौतिक कब्जा बरकरार है, जिस पर उन्हें अभी तक कृषि कार्यों के लिए बैंकों से ऋण मिल रहा है।

विजय यादव, भजन कंवर, भुवन कंवर, शैलेन्द्र कंवर आदि ग्रामीणों को संदेह है कि जिस प्रकार कोरबा तहसीलदार देवू के पक्ष में खड़े हुए हैं और खुदाई स्थल पर बाल्को के अधिकारी तैनात थे, उससे उन्हें लगता है कि उनकी जमीन हड़पने के मामले में प्रशासन और बाल्को की भी देवू के साथ मिलीभगत है। उन्होंने कहा कि अधिग्रहण होने के 27 साल बाद भी यह जमीन आज भी उनके नाम से है और उनकी जीविका के एकमात्र साधन को छोड़ने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता।

किसान सभा नेता प्रशांत झा ने बताया कि देवू प्रभावित सभी ग्रामीणों द्वारा हाई कोर्ट को पोस्टकार्ड लिखे जाने के बाद कोरबा के अन्य विस्थापन प्रभावित इलाकों में भी इन ग्रामीणों के समर्थन में हाई कोर्ट को पत्र लिखे जाने का अभियान चलाया जाएगा तथा आंदोलन को तेज किया जावेगा।

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