दूसरे युद्ध से पहले कवच पहन लेना जरूरी…?️तारन प्रकाश सिन्हा

इस समय हम सब कोविड-19 की दूसरी लहर का सामना कर रहे हैं।
सालभर पहले जब पहली लहर आई थी तो हमने बहुत सफलतापूर्वक उसका सामना किया था, और अंततः संक्रमण को नियंत्रित भी कर लिया था। तब पूरे विश्व के साथ-साथ भारत के सामने भी अभूतपूर्व परिस्थितियां उठ खड़ी हुई थीं। देश ने पहली बार इतना लंबा लाकडाउन झेला था। लाखों लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट उठ खड़ा हुआ था। तब हम इस वायरस के बारे में कुछ भी नहीं जानते थे।

इससे कैसे निपटा जाए, यह भी नहीं जानते थे। डाक्टरों को न तो इसके इलाज का तरीका पता था, न वैज्ञानिकों को वायरस के स्वरूप का। इस महामारी ने हम सबको अचानक एक अंधकार में ला खड़ा किया था, जिसमें टटोल-टटोल कर ही आगे बढ़ा जा सकता था। लेकिन उस अंधकार में हम सबने तुरंत एक-दूसरे का हाथ थाम लिया, ताकि एक-दूसरों को किसी भी तरह की ठोकर से बचाया जा सके। डाक्टरों, नर्सों, पुलिस के जवानों, प्रशासन के अधिकारियों-कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों, समाज-सेवियों ने मिलकर मोर्चा संभाला और अंततः फतह हासिल की।
कोविड-19 ने दूसरी बार हमला किया है। यह ठीक वैसा ही है जैसे जंग जीत कर सुस्ता रहे सैनिकों पर मौके का फायदा उठाते हुए दुश्मन दुबारा हमला कर दे। पहली लहर पर मिली जीत के बाद हम सब भी सुस्ता ही रहे थे। थोड़े लापरवाह, थोड़े निश्चिंत और बहुत ज्यादा आत्मविश्वासी भी हो गए थे। निश्चित ही इसीलिए इस महामारी ने फिर सेंधमारी कर दी है। यह भी तय है कि पिछली बार की तुलना में इस बार कोविड-19 को हम ज्यादा तेजी से परास्त करने वाले हैं। अब हम इस वायरस को भी जानते हैं, इसके इलाज के बेहतर तरीके जानते हैं और वायरस को नख-दंत विहीन करने की क्षमता भी हमारे पास है। हम हमारे पास वैक्सीन के रूप में एक मजबूत सुरक्षा-कवच है।

कोविड-19 की दूसरी लहर से मुकाबला करने के लिए हम सबको कवच धारण करना ही होगा। हम सबको वैक्सीन लगवानी ही होगी। जैसी एकजुटता पिछली लहर से मुकाबले के लिए नजर आई थी, वैसी ही एकजुटता अब स्वयं की सुरक्षा के लिए दिखानी होगी। मानवता की रक्षा के लिए इस समय सबसे बड़ा धर्म यही है कि हम स्वयं को बचाएं और दूसरों को भी प्रेरित करें। पहली लहर के दौरान हम लोगों के सामने वायरस के साथ-साथ तरह-तरह की अफवाहों ने भी चुनौतियां खड़ी की थीं, इस दूसरी लहर के दौरान भी वैसी ही कोशिशें की जा रहीं हैं, हालांकि अब हम सब ज्यादा अनुभवी और ज्यादा जागरुक हैं।

लेखक- छत्तीसगढ़ सरकार में जनसंपर्क आयुक्त हैं।

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