” जिंदगी चलने का ही दूसरा नाम है यारों “

आज दोस्त भारत में हर 4 मिनट में एक शख्स आत्महत्या कर रहा है, अब सवाल यह उठता है कि ऐसी कौन सी बातें हैं, जिनकी वजह से एक इंसान अपनी जान देने पर आमादा हो जाता है?
मुझे लगता है कि आत्महत्या को प्रेरित करने वाले कारणों में घरेलू ,पारिवारिक, निजी और सामाजिक सभी पहलू शामिल है, जो कि आत्महत्या के लिए प्रेरित करते हैं। इन सभी कारणों को मिलाकर हम डिप्रेशन कहते हैं दोस्तों।
अब आप ही देखो ना पिछले दिन ही यूपीपीसीएस का अंतिम परिणाम आया जिसमें एक हमारे देश के होनहार अभ्यार्थी का अंतिम रूप से चयन नहीं होने के कारण आत्महत्या कर लिया आखिर दोस्तों आज हमारे युवाओं में इतना अवसाद क्यों बढ़ता जा रहा है? कुछ महीने पहले ही भारत में आत्महत्याओं को लेकर नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के ताजा आंकड़े जारी हुए थे, जिसमें यह बताया गया था कि भारत में हर 4 मिनट में एक शख्स आत्महत्या कर लेता है। अगर हम घंटे के हिसाब से बात करें तो 1 घंटे में 15 भारतीय किसी न किसी वजह से अपनी ही जान ले लेते हैं। दोस्तों आज यह बेहद ही गंभीर समस्या है ।
दोस्त वैसे तो डिप्रेशन के बहुत से लक्षण होते हैं, लेकिन कुछ खास लक्षणों की हम बात यहां करेंगे जिनकी पहचान कर हम इलाज करा सकते हैं और उनको प्रेरित करके जीवन में आगे बढ़ा सकते हैं। अगर आपको कोई भी व्यक्ति परेशान दिखे, जिसका मन उदास हो, बात-बात पर चिड़चिड़ा हो जा रहा हो, या कोई अपने आपको व्यर्थ समझ रहा हो, किसी प्रतियोगी परीक्षा में असफल हो गया हो ,आशाहीन महसूस कर रहा हो ऐसा व्यक्ति धीरे-धीरे अवसाद में चले जाते हैं और सोचने लगते हैं कि भगवान अब उसे उठा ले यहीं से दोस्तों आत्महत्या के प्रयास शुरू होते हैं और फिर मरने की योजना के साथ इंसान आत्महत्या कर लेता है। इसलिए आप सब से मेरा विनम्र निवेदन है कि ऐसे कोई भी निराश और परेशान व्यक्ति आपको नजर आए तो उससे बातें जरूर करें जितना संभव हो सके उसका मदद करें और प्रेरित करें कि जीवन में रुकना नहीं चाहिए बल्कि जीवन चलने का ही दूसरा नाम है। दोस्तों विश्व स्वास्थ संगठन के अनुसार कहा गया था कि इस वर्ष यानी कि 2020 तक डिप्रेशन की बीमारी इंसान की डिसेबिलिटी की दूसरी सबसे बड़ी वजह बन जाएगी, जबकि दोस्तों डब्ल्यूएचओ के मुताबिक साल 2025 -30 तक यह पहली वजह बन जाएगी। ऐसे में अगर कोई बीमारी इस तरह से कॉमन हो रही है तो इसका इलाज बहुत जरूरी है। कोई भी बीमारी हो दोस्त बीमारी तो बीमारी होती है, आप ही सोचो अगर कबूतर के आंख बंद कर लेने से बिल्ली नहीं भागेगी, बल्कि कबूतर को खुद उड़ना होगा । इसीलिए मैं कह रहा हूं दोस्तों की यह हम सबका कर्तव्य है कि कोई भी ऐसा व्यक्ति दिखे जो निराश है ,परेशान है उसका मदद अपने अनुसार करने का जरूर कोशिश करें।
आज कोविड 19 से उपजी वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के कारण बहुतों की नौकरिया चली गई है और काम धंधे चौपट हो गए हैं। हमें ऐसे लोगों का अपने सामर्थ्य अनुसार जरूर मदद करना चाहिए। दोस्त देखा गया है कि जब जीवन में संघर्ष बढ़ता है और उससे तनाव कहीं ना कहीं उपजने ही लगता है तब देखा गया है कि दिमाग में खुशी और सीमित रहने के रसायन धीरे धीरे कम होते जाते हैं, डिप्रेशन बढ़ता जाता है और लोग गलत कदम उठा लेते हैं। आंकड़ों के मुताबिक हम देख रहे हैं पुरुषों में आत्महत्या की दर कुछ ज्यादा है महिलाओं की अपेक्षा क्योंकि दोस्त महिलाओं के मुकाबले पुरुष किसी काम को अंत तक अंजाम देने की प्रवृत्ति रखते हैं। याद रखना मेरे बात को दोस्त जब भी कोई व्यवहार या स्वभाव जरूरत से ज्यादा हो या फिर कहे की जरूरत से ज्यादा समय सीमा तक के लिए हो जो इंसान के सामाजिक ,व्यवसायिक और निजी जीवन पर असर डालने लगे तो दोस्तों वही बीमारी है। आज डिप्रेशन भी ऐसी ही बीमारी है, जो इंसान के लक्षणों में बदलाव और उसके स्वभाव में परिवर्तन से हम समझ सकते हैं। आप ही देखो ना जब एक दो बार कोई व्यक्ति अपने बच्चे को चांटा मारा तो यह गुस्सा चलेगा लेकिन आप ही सोचो अगर रोज गुस्सा होकर कोई व्यक्ति अपने बच्चे को चांटा मारे तो यह कहीं ना कहीं मानसिक बीमारी है। अब दोस्तों विनम्र निवेदन आप सभी से है कि समाज में जब भी किसी व्यक्ति में ऐसे लक्षण दिखाई दे तो यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम उसे अच्छे से मनोचिकित्सक के पास लेकर जाएं कभी भी उसे मात्र तसल्ली ना देकर की चिंता मत करो सब ठीक हो जाएगा, उसे यह भी मत कहना आप की फलां बाबा के पास जाकर अपने जीवन को बदलने का उपाय पूछ लो । याद रखना दोस्त इससे डिप्रेशन ठीक नहीं होगा और इंसान फिर आत्महत्या की तरफ रुख करेगा। अगर हमें आत्महत्या को रोकना है तो डिप्रेशन के लक्षणों की अनदेखी करने से बचना होगा और मरीज को सहानुभूति के साथ डॉक्टर के पास लेकर जाना हमारा परम कर्तव्य होना चाहिए यही दोस्तों कारागार उपाय है। इसके साथ ही लोगों को प्रेरित करना चाहिए कि प्रात काल उठकर शैर करें और योगा मेडिटेशन का सहारा ले। देश के युवाओं को एक बात कहना चाहूंगा कि जिंदगी कभी रुकती नहीं है दोस्त अगर किसी परीक्षा में असफल हो जाते हो कोई बात नहीं जिंदगी में और सारे अवसर मिलेंगे जो आप एक दिन इस दुनिया के नक्शे को बदल सकते हो।

विक्रम चौरसिया

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