दोपहर का समय था। खाना खा ही रहा था कि मोबाइल की मैसेज टोन सुनाई पडी़। खाना खाकर उठा और ज्यों ही वाट्सअप खोलकर देखा तो विद्यालय के ग्रुप में मैसेज आया हुआ था हमारे एक सहकर्मी का पूरा परिवार कोविड पाॅसिटिव पाया गया है । खबर सुनकर न सिर्फ स्कूल स्टाॅफ के बीच बल्कि इस दौरान संम्पर्क में आए अभिभावकों के बीच हड़कंप मच गया। ग्रुप में कोरोना से लड़ने और किसी भी परिस्थिति में सहयोग करने की बातों वाले मैसेजेस की बाढ़ आ गई। मैसेजेस पढ़ते पढ़ते मेरी नज़र एक अजीब से मैसेज पर गयी। हमारे एक सहकर्मी मित्र ने संक्रमित साथी के लिए मैसेज लिखा था और मैसेज के अंत में नोट के रूप में मुझे संबोधित कर संदेश लिखा था कि तिवारी सर से रिक्वेस्ट है कि ग्रुप में गीत संगीत और अंताक्षरी करवाएं।

मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैसेज पढ़कर क्या प्रतिक्रिया दूँ। शोक एवं संवेदना व्यक्त करूँ, ढांढस बंधाऊँ या गीत संगीत करवाऊँ हो हल्ला मचाऊँ। मैं बड़बडा़ने लगा बडी़ अजीबोगरीब बात है वहाँ किसी पर कोरोना महामारी की परेशानी आन पड़ी है और यहाँ इनको अंताक्षरी करवाने की पडी़ है। मेरा बड़बडा़ना सुनकर श्रीमती जी ने टोकते हुए कहा अरे अब शान्त भी हो जाओ … पहले कुछ समझने की तो कोशिश करो कि ऐसी स्थिति में भी यदि कोई अंताक्षरी खेलने का प्रपोजल दे रहा है तो उसके पीछे कोई न कोई वजह ज़रूर होगी। श्रीमती जी उठीं और पास ही रखे अनोखेलाल जी को पकडा़ दिया – लो चढा़ लो नाक पर और देखो अंदर तक इसके, फिर जो चाहे करना गुस्साना चिल्लाना सारा गुस्सा निकाल लेना .. ।
फिर क्या था फौरन मैंने अपने चश्में महाराज को चढा़या नाक पर और लगा झाँकने चश्में के भीतर से ….. ।
हाल के दिनों में कोरोना संक्रमण के मामलों में जितनी तेजी से इजाफा हुआ है उसका बड़ा ही खतरनाक असर देखने को मिल रहा है। संक्रमण झेल रहे व्यक्ति तो परेशान हैं ही साथ ही उनके आस पास के लोग और पारिवारिक जन भी हलाकान हो रहे हैं।
बात करें कोरोना रोकथाम के लिए किए जाने वाले सरकारी प्रयासों की तो आज तक जितने भी कदम उठाए गये हैं वो सभी ऊँट के मुँह में जीरा के समान साबित हुए हैं। वहीं अगर हम आम जनता के भागीदारी की बात करें तो वह हर स्तर पर बिंदास लापरवाह और गैर जिम्मेदार साबित हुई है। मुट्ठी भर लोग ही ऐसे हैं जो कोविड 19 के प्रोटोकॉल का पूरा पूरा पालन कर रहे हैं।
आए दिन खबर आती है कि कोरोना के डर से फलां ने आत्महत्या कर ली। खुद कई कोरोना मरीजों की लचर और बदहाल व्यवस्था से परेशान होकर कोरोन्टाईन सेंटर्स से भाग जाने की घटनाएँ भी सुनने में आ रहीं हैं। होम आइसोलेशन में रह रहे कोविड मरीजों और उनके परिजनों के खुलेआम बाहर निकलकर घूमने और लोगों को परेशानी में डालने की खबरें भी आ रहीं हैं।
ऐसी परिस्थिति में राज्य के अलग अलग जिलों के अधिकारियों के द्वारा सख्त लाॅकडाउन लगाने की खबरों के बीच कोरोना संक्रमण और मौत के ग्राॅफ में हो रही बेहिसाब बढो़तरी ने आम इंसान को हिलाकर रख दिया है। मनुष्य मानसिक रूप से अत्यंत दुखी डरा हुआ एवं सहम सा गया है। इस बात का असर उसके कार्यशैली पर भी पड़ा है। आलम ऐसा हो गया है कि कोरोना से अलग सामान्य रूप से मरने वालों की संख्या भी हद से ज्यादा बढी़ हुई दर्ज की गई है।
कोरोना काल की इस भयावह स्थिति से निपटने का कोई उपाय नज़र नहीं आ रहा है। वैसे तो तरह तरह के इम्यूनिटी बुस्टर्स और काढा़ आदि पेय पदार्थ अवश्य बाजा़र में धड़ल्ले से बेचे और खरीदे जा रहे हैं लेकिन उन पर भी पूरा विश्वास नहीं कर पा रहा है आज का माॅडर्न आदमी भी ।
वैज्ञानिकों , चिकित्सकों और मनोवैज्ञानिकों की लगातार अपील आ रही है कि कोरोना महामारी कोई ऐसी बीमारी नहीं जो बिला वजह ही आकर समा जाएगी आपके अंदर । डरिए मत ! कोरोना से लड़िए और कोविद 19 प्रोटोकॉल का ईमानदारी से पालन करना सुनिश्चित करें।
कोरोना वारियर्स द्वारा किये जाने वाले प्रयासों और वैज्ञानिकों , चिकित्सकों और मनोवैज्ञानिकों द्वारा दिये जा रहे सुझावों के बीच मेरी एक गुजारिश पर आप सभी पाठक अवश्य ध्यान दें – चाहे जितनी भी बड़ी समस्या हो ….. चाहे जितने भी ज्यादा आप परेशान हों …… चाहे आप स्वयं पाॅसिटिव हो गये हों या आपका कोई अपना संक्रमित हो गया हो किसी भी हाल में अपना आत्मविश्वास न कमजोर पड़ने दें । डरे और घबराएँ तो बिलकुल ही नहीं क्योंकि गैरजिम्मेदार और भ्रष्टाचार युक्त समाज में आज भी आपका साथ देने वाले लोग अवश्य मिल जाएंगे जो आपका पूरा स्वस्थ होने तक साथ देंगे। इतना ही नहीं उदास और दुखी तो हर हाल में न हों , हमेशा मुस्कराते हुए और खुश रहें।
कोरोनाकाल में आपका इस तरह हँसते मुस्कराते और खुश रहना आपके अंदर की ऊर्जा और शक्ति को बरकरार रखेगा। आप अगर खुश रहेंगे, खेलेंगे हँसेंगे नाचेंगे गाएंगे तो आपकी यह प्रतिक्रिया एक थेरेपी से कम कारगर साबित नहीं होगी। शरीर के लिए जबरदस्त इम्यूनिटी का विकास करेगी , आप पूरी ईमानदारी और खुद की इच्छा से कोरोना रोकथाम के मानकों को अपनाने लग जाएंगे। लाॅकडाउन में लंबे समय तक घरों में कैद रहने से ऊबकर या बोर होकर घरों से बाहर निकल कर कोरोना प्रोटोकॉल को ठेंगा दिखाते हुए नहीं घूमते फिरेंगे और दूर दूर तक कोरोना वाईरस को फटकने भी नहीं देंगे।
इसलिए मैं तो कहता हूँ एक बार फिर से लाॅकडाउन लगने वाला है आप सभी डरे या घबराएँ नहीं पूरा समय अपना अपना काम करने, हँसने गाने और खेलने कूदने में बिताएँ किसी भी सूरत में उदास या दुखी न हों सदा खुश रहें और इसी खुश रहो थेरेपि से निपटें कोरोना काल में एक बार फिर से लगाए जाने वाले लाॅकडाउन के ग़म से …






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