कोरोना महामारी में बच्चों का ख्याल कैसे रखें; जानें आयुष मंत्रालय की होमकेयर गाइडलाइन


नई दिल्ली. महामारी के वक्त में बच्चों को वायरस संक्रमण से बचाने और उनका ख्याल रखने के लिए आयुष मंत्रालय ने होमकेयर गाइडलाइन जारी की है. अपनी गाइडलाइन में मंत्रालय ने आयुर्वेदिक और प्राकृतिक चिकित्सा के उपयोग के साथ मास्क पहनने, योगा करने, बीमारी के पांच लक्षण की पहचान पर नजर रखने, डॉक्टरों के साथ टेली कंसल्टेशन की सलाह के साथ माता-पिता को टीकाकरण कराने की सलाह पर विस्तार से जानकारी दी है.
न्यूज18 ने आयुष मंत्रालय की गाइडलाइन देखी है, जिसमें कहा गया है कि किस तरह संक्रमण की दूसरी लहर ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा कर दी है. गाइडलाइन के मुताबिक बच्चों में बालिगों के मुकाबले कोरोना के हल्के मामले देखे गए हैं. इन मामलों में कुछ खास इलाज की आवश्यकता नहीं होती. लेकिन प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट को अपना कर बच्चों को खतरनाक वायरस से सुरक्षित किया जा सकता है.
गाइडलाइन के मुताबिक कई सारे अध्ययनों में, जिनमें कुछ आयुर्वेदिक दवाएं कोरोना संक्रमण के खिलाफ प्रोफिलैक्सिस में प्रभावी नजर आई हैं. दस्तावेज के मुताबिक मोटापा, शुगर टाइप 1, क्रोनिक कॉर्डियोपल्मोनरी बीमारियों या कम प्रतिरोधक क्षमता वाले बच्चों को कोरोना का खतरा ज्यादा हो सकता है. यद्यपि बच्चों में इम्युनिटी का स्तर मजबूत हो सकता है, लेकिन जिस तरह वायरस के नए-नए स्ट्रेन सामने आ रहे हैं, ऐसे में जरूरी हो जाता है कि कोविड-19 के प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन किया जाए.
गाइडलाइन कहती है कि बालिगों के मुकाबले बच्चों का ख्याल रखना चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि बच्चों मनोवैज्ञानिक, इम्युनोलॉजी और फिजियोलॉजी में अंतर देखने को मिलते हैं. डिस्क्लेमर के तौर पर गाइडलाइन कहती हैं कि यह कोविड व्यवहार का सप्लीमेंट हैं और इसे सिर्फ सुझावों के तौर पर लिया जाना चाहिए और किसी भी स्थिति में डॉक्टर से संपर्क करें, क्योंकि सभी सुझावों को बच्चों पर लागू नहीं किया जा सकता.
बच्चों के लिए सुझाव
गाइडलाइन में कहा गया है कि बच्चों को अक्सर अपने हाध धोने चाहिए और बाहर जाते वक्त मास्क का इस्तेमाल जरूर करें. अगर बच्चा हाथ धोने में ना नुकुर कर रहा है तो माता पिता उसे प्रोत्साहित करने के लिए रिवार्ड कर सकते हैं. आयुष मंत्रालय ने अपने सुझावों में कहा है कि 5 से 18 साल के बच्चों के बच्चों के लिए मास्क अनिवार्य है, जबकि 2 से 5 साल तक के बच्चों के लिए मास्क इच्छा हो तभी पहनाएं और अगर पहनाएं तो माता पिता बच्चे का ध्यान रखें. गैर मेडिकल या तीन स्तरीय सूती कपड़े का मास्क बच्चों के लिए बेहतर रहेगा, जिसे कलर, ट्रेंड को देखते हुए आकर्षक बनाया जा सकता है. गाइडलाइन कहती है कि बच्चों को जहां तक संभव हो घर पर ही रहना चाहिए और यात्रा करने से जितना बचें उतना बेहतर होगा. माता-पिता को चाहिए कि बच्चों को वीडियो और फोन कॉल्स के जरिए दोस्तों और दूर दराज के रिश्तेदारों से जोड़े रखें.
मंत्रालय ने कहा है कि अगर किसी बच्चे में कोविड संक्रमण की शंका हो तो घर के बुजुर्गों से दूर रखें, क्योंकि वे गंभीर बीमारियों के शिकार हो सकते हैं. परिजनों को बच्चों में पांच विशेष लक्षणों की पहचान करने और उन पर नजर रखने को कहा गया है. इनमें पहला अगर बच्चे में चार-पांच दिन से ज्यादा बुखार रहें. बच्चा भोजन की मात्रा कम कर दें. सांस लेने में तकलीफ महसूस हो, ऑक्सीजन लेवल 95 फीसदी से नीचे और बच्चा सुस्त लगने लगे. अगर इनमें से कोई भी लक्षण बच्चे में दिखाई दे तो तुरंत मेडिकल ओपिनियन लें.
ऐसे करें बच्चों की देखभाल
गाइडलाइन में कहा गया है कि बच्चों को हल्का गुनगुना पानी पीने के लिए दिया जाना चाहिए. सुबह और रात को दो साल से ज्यादा उम्र के बच्चों को ब्रश करना चाहिए. पांच से ज्यादा उम्र के बच्चों को तेल मालिश और गर्म पानी के साथ गरारा करना चाहिए. तेल मसाज, नाक में तेल लगाना, प्राणायाम, मेडिटेशन और अन्य शारीरिक अभ्यास के लिए भी 5 साल से ज्यादा उम्र के बच्चों की क्षमता को देखते हुए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए.
अन्य सुझावों में मंत्रालय ने कहा कि आयुर्वेदिक उपायों में बच्चों की इम्युनिटी मजबूत करने के लिए हल्दी दूध, च्वयनप्राश और प्राकृतिक जड़ी बूटियों का काढ़ा देना चाहिए. कोविड संक्रमण के लक्षणों वाले बच्चों को आयुर्वेदिक दवाओं के जानकार की देख रेख में ही दवा दी जानी चाहिए.
गाइडलाइन में कहा गया है कि बच्चों को पर्याप्त नींद लेनी चाहिए और आसानी से पचने वाले ताजा और संतुलित भोजन करना चाहिए. गाइडलाइन में बच्चों के खेलने के स्थान, चारपाई, बेड, कपड़े और खिलौनों पर प्रत्येक शाम को कीटाणु रोधक छिड़काव कराने का सुझाव दिया गया है. साथ ही न्यू नॉर्मल का पालन सकारात्मक के साथ करने के प्रति बच्चों का उत्साहवर्धन किया जाना चाहिए. बच्चों को बताया जाना चाहिए कि नई दिनचर्या किस तरह से लाभकारी बजाय की मुश्किलों को गिनाने के. उन्हें भरोसा दिया जाना चाहिए कि ये समय भी गुजर जाएगा. 

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