
□ सटोरि के खाते में ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की रसीद क्या है फर्जी □
□ शिकायतकर्ता पूर्व में खाई-खजाना बेचने वाले के पास खेल चुका है सट्टा, हारने के बाद सट्टा संचालन करने वालों से पैसा वसूलने का आजमाता है नया-नया पैतरा □

कोरबा,/ शहर में सट्टा संचालन करने वालों की नींद इन दिनों उड़ी हुई है वही सट्टा संचालन करने वालों के खिलाफ शिकायत करने वाले संदेह के घेरे में है बता दे रविशंकर कोरबा निवासी द्वारा खाई-खजाना बेचने वाले और एक टटपूजिये सटोरिए निवासी पूरानी बस्ती कोरबा के खिलाफ सट्टा खेलने के लिए पैसो का लेनदेन किया गया जिस बीच ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की रसीद सटोरिए के व्हाट्सएप पर सट्टा खेलने वाले के द्वारा भेजा गया जिसका रकम सटोरिए के पास खाते में ट्रांसफर नही हुआ जबकि ट्रांजेक्शन की रसीद में ट्रांजेक्शन होना दिख रहा है जिसे लेकर दोनों के बीच विवाद उत्पन्न होने की जानकारी सूत्र दे रहे है जब मामले में विवाद बढ़ा तो सट्टा खेलने वाले के द्वारा पुलिस अधीक्षक कोरबा से शिकायत किया गया जिस मामले में आज तक कार्यवाही पूरी नही हो सकी.वही यह मामला मिडीया में उछलने पर पीड़ित पक्ष शिकायतकर्ता और सट्टा संचालन करने वाले सटोरिए की मुश्किलें बढ़ने लगी.मामले में सूत्रों के हवाले से एक व्हाट्सएप चैट प्राप्त हुआ है जिसमे सटोरिए को खेलने वाले ने अपने नंबर से ऑनलाइन पैसा का ट्रांजेक्शन भेजा है जिसमे 20-20 हजार रुपए फोन पे के माध्यम से देना बताया है लेकिन सटोरिए ने व्हाट्सएप पर लिखा है कि “Nahi aya hai.. pahle wala.bhi” साथ ही व्हाट्सएप चैट पर और भी बाते हुई है जिससे स्पष्ट हो रहा है कि सट्टा कारोबार के लिए पैसों का लेनदेन भी हुआ है जिस मामले में पुलिस जांच अधूरी है मामले में पुलिस अगर गंभीरता से जांच करे तो इन सटोरियों की पोल खुल सकती है और कोरबा पुलिस के हाथों बड़ी कामयाबी लग सकती है बहरहाल आपको बता दे शिकायत पत्र में सट्टा खेलने वाले ने लिखा है “शुरू में मुझे भरोसा दिलाया गया कि आप इसमें कमाओगे तो मैं उनके झांसे में आ गया और रुपये उनके गूगल पे और फोन पे के माध्यम से रुपए देते गया।मेरे साथ गलत होने पर मैं उनसे रुपए वापस करने की मांग की तो वह धमकी देते हुए कहने लगे कि हमारा कोई कुछ नही बिगाड़ सकता,ऊपर तक हमारा सेंटिंग है”
मामले को लेकर सूत्रों की माने तो सट्टा खेेेलने वाले द्वारा फर्जी फोन पे की रसीद सटोरिए को भेजा गया है जिसे लेकर सट्टा खेलने वाला कानून के घेरे में आने के डर से इस मामले की कार्यवाही को लेकर पीछे हो गया.उक्त जानकारी को मानकर अगर पुलिस जांच करती है तो इस मामले से जुड़े कई राज सामने आ सकते है और सटोरियों के गिरोह का भंडाफोड़ हो सकता है।







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