काशी – कुछ कवितायें- डॉ टी महादेव राव

काशी के घाट और गंगा

दशाश्वमेध घाट पर
भोर में भोलेबाबा की जयकार के साथ
निकलता है दिन काशी में
यात्रियों की हुज़ूम
रिमझिम तेज़ बारिश

इधर से उधर
उधर से इधर आते भगवाधारी सन्यासी
गंगा की सैर से जीविका जोड़ता माझी
शिव वेष में बच्चे
पिंडदान और पूजा के लिए पूछते पंडित
झुंड में स्नान करते यात्री
दूसरी ओर गंगा में दीपदान करती स्त्रियां
नाव में बैठ गंगा के घाट निहारते पर्यटक

गश्त लगाते पुलिसवाले
सफाई करते मज़दूर
घाट पर टीका लगाते पंडे
दूर क्षितिज से झांक बाहर आता सूरज
पास के पेड़ से उड़कर नाव पर बैठा कौवा
मंदिरों के एक शिखर से दूसरे शिखर उड़ते कबूतर
घाट की सीढ़ियों पर सोये कुत्ते
जोर जोर से बतियाता वृद्ध
नाव की सैर का मोलभाव करते कुछ शहरी

बूढ़े की हाथ थामे सीढियां उतारती देहात की अम्मा
घूंघट काढ़े नये वस्त्रों से लदी नव वधू
धीरे धीरे फैलता उजाला
थमती बारिश
जीवन की चपलता बताती हर चेष्टा

समय के साथ पल पल दौड़ती ज़िंदगी
नए अर्थ देती नए पर्याय बनाती
गंगा सी निरंतर प्रवाहमयी
बेरोक-टोक हृदयस्पंदनों सी सक्रिय ज़िंदगी
काशी में घाटों पर

मणिकर्णिका घाट

मणिकर्णिका घाट पर
लक्कड़ों के ढेर से लदी नावें
ऊपर ही ऊपर उठता धुआं
सांचों में चिताओं पर दहन होती लाशें
कतार में लाशें और पास खड़े लोग
मणिकर्णिका घाट का धुआं
बगल में बहती गंगा
जीवन-मृत्यु के सच को बताती
वैराग्य को जन्मते घाट और नदी
नज़र नहीं हट पाती राख होती लाशों पर से
बार बार देखने का मन करता है
कलकल करती जीवधारा गंगा को

जीवन सत्य को पलों में बताते दृश्य
तभी काशी में आते ही घर करती है
जीवन चेष्टाओं के प्रति तटस्थता
बनती है अजीब सी मनःस्थिति
जो न सांसारिक है न आध्यात्मिक
होती है मध्यस्थिति लटकते त्रिशंकु सी
महादेव सा निराडम्बर और सादा
अनायास हो जाता है भोले का चेला

हरिश्चन्द्र घाट

हरिश्चन्द्र घाट पर
जलते शव उठता धुंआ
हरिश्चन्द्र के डोम होने की कथा
पूरे मनोयोग से सुनाता माझी
सत्य और कपट के संघर्ष को बताता

शव के पास खड़े राम नाम के नारे लगाते बंधुगण
घाट के पास से गुजरते हुए आंखों के सामने
लोहिताश्व, तारामती और हरिश्चन्द्र
उनके सत्य के संघर्ष के दृश्य
धीरे धीरे घाट नज़र से ओझल होता है

गंगा मौनी बाबा सी बहती रहती है

काशी अलसाया सा

सूरज निकलता है
अलस्सुबह
लोग करते हैं गंगा स्नान
लेकिन काशी और उसके बाशिंदे
अलसाए से
धीरे धीरे करवट बदलकर जागते हैं

मुस्तैद होते हैं
हो चुकता है तीर्थ यात्री का दिन तब तक आधा

जागती है वारणसी धीमे धीमे
भीड़ भी अलसाया सा
कोई जल्दी नहीं होगा सब आराम से
बारिश में भी हौले हौले भींगते
गंगा नदी की धीमी रफ्तार से भी
धीमी है वारणसी की चेष्टायें
पूरा शहर धीमे धीमे पूरा करता है अपने सभी काम


  • Related Posts

    BREAKING KORBA: जंगली हाथी का हमला, मंडी प्रभारी की कुचलकर मौत

    कोरबा, जिले के कोरकोमा क्षेत्र से एक दर्दनाक घटना सामने आई है। उपार्जन केंद्र कुदमुरा समिति कोरकोमा में पदस्थ मंडी प्रभारी राजेश कुमार सिंह (55) की बीती रात जंगली हाथी…

    Read more

    पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के स्वर्ण सिटी निवास पर होली मिलन पर उमड़ा जनसैलाब

    कोरबा। ऊर्जा की नगरी कोरबा में इस बार होली केवल रंगों तक सीमित नहीं रही, बल्कि सामाजिक आत्मीयता और जनसंवाद का भी बड़ा माध्यम बनकर उभरी है। शहर में जगह-जगह…

    Read more

    Comments are closed.

    You Missed

    BREAKING KORBA: जंगली हाथी का हमला, मंडी प्रभारी की कुचलकर मौत

    BREAKING KORBA: जंगली हाथी का हमला, मंडी प्रभारी की कुचलकर मौत

    पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के स्वर्ण सिटी निवास पर होली मिलन पर उमड़ा जनसैलाब

    पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के स्वर्ण सिटी निवास पर होली मिलन पर उमड़ा जनसैलाब

    कोरबा में होली पर नशेड़ियों का तांडव: चाकू और सर्जिकल ब्लेड से हमला, चार युवक गंभीर रूप से घायल

    कोरबा में होली पर नशेड़ियों का तांडव: चाकू और सर्जिकल ब्लेड से हमला, चार युवक गंभीर रूप से घायल

    खरसिया के परासकोल में युवक के अंधे हत्या का खुलासा,आरोपी गिरफ्तार

    खरसिया के परासकोल में युवक के अंधे हत्या का खुलासा,आरोपी गिरफ्तार

    स्व-सहायता समूह की दीदियों ने कलेक्टोरेट और जिला पंचायत में लगाया प्राकृतिक रंगों से बने गुलाल का स्टॉल

    स्व-सहायता समूह की दीदियों ने कलेक्टोरेट और जिला पंचायत में लगाया प्राकृतिक रंगों से बने गुलाल का स्टॉल

    कलेक्टर ने कोटपा एक्ट के सख्त पालन के निर्देश, शैक्षणिक परिसरों को एक माह में तंबाकू-मुक्त बनाने का लक्ष्य

    कलेक्टर ने कोटपा एक्ट के सख्त पालन के निर्देश, शैक्षणिक परिसरों को एक माह में तंबाकू-मुक्त बनाने का लक्ष्य
    error: Content is protected !!