
यह कैसी सम्मान है जिसमे अपनों के खून सनी हुई है। लोग अपने सम्मान के लिए अपनों का ही हँसती खेलती मुस्कुराहट छीन लेते है । और स्वमं भी जेल चले जाते है।
लोग जाति ,धर्म व समाज के डर से ऑनर किलिंग जैसे अपराध को अंजाम दे रहे है ,ज्यादार यह महिलाओं के साथ हो रहा है।
भारत का संविधान धर्म ,जाति व समाज से ऊपर उठकर सभी मानव को समान का अधिकार दिया है । फिर भी लोग अपनी झूठी शान , सम्मान को दिखने के लिए ये कदम उठा रहे है। लोगो को अपनों की ख़ुशी में खुश रहना सीखना होगा अन्यथा लाशो की ढेर लगने में देर नहीं होगी। समाज में चले आ रहे पीढ़ी दर पीढ़ी नियम व कानून में सूधार करने का वक़्त आ चुका है क्योंकि कोई भी नियम व कानून हो उसमे समय के साथ परिवर्तन करना बहुत जरुरी होता है ताकि नई पीढ़ी बदलते दौर के साथ चल सके। इस बदलाव से जो ऑनर किलिंग की रफ़्तार लगतार बढ़ रही है उसमें लगाम लगाए जा सके । वरना परिणम तो आपके सामने ही है न जाने अब तक कितनों की मुस्कान व ख़ुशियों का गाल घोट दिया जा चूका है । यह निर्यण आपके ऊपर है कि जिसे आप ने अपने हाथों से पाला उसकी एक मुस्कान के लिए अपने क्या क्या नहीं किया उसकी जिंदगी व ख़ुशियों में रंग भरना है या अरथी सजाना है।
धन्यवाद।
डेविड बाबू
धमतरी, छत्तीसगढ़






Comments are closed.