अधिवक्ता स्व पी के अग्रवाल श्रद्धांजलि विशेष ( एक) आप नारियल के समान थे,जो बाहर से कठोर, भीतर से नम्र

जिला अधिवक्ता संघ कोरबा का इतिहास परम श्रद्धेय स्व पदम कुमार अग्रवाल जी के योगदान, समर्पण एवं गौरव गाथा से स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जायेगा। बहुमुखी प्रतिभा के धनी स्व.पी.के.अग्रवाल अधिवक्ता जगत के सशक्त हस्ताक्षर थे। कोरबा ही नहीं वरन् छत्तीसगढ़ एवं अविभाजित मध्यप्रदेश के अधिवक्ता गण के सुख,दुःख के सहभागी एवं सक्रिय जन प्रतिनिधि के रूप में समूचे विदर्भ में विख्यात रहे।उनका केवल वकालत में ही नहीं बल्कि सभी क्षेत्रों में अकल्पनीय योगदान रहा। एक ओर उन्होंने अपने अधिवक्ता व्यवसाय में सफलता हासिल कर सभी को प्रेरित किया तो दूसरी ओर राजनीतिक,जन हितैषी कार्य में अपनी अमिट छाप छोड़ गये।

           मैंने सन् 2008 में अपना वकालत व्यवसाय कोरबा न्यायालय में जब प्रारंभ किया।उस समय मेरे वरिष्ठ श्री एस.एल.टण्डन के मामलों में अपने वरिष्ठ की व्यस्तता एवं अनुपस्थिति में न्यायालय में अग्रवाल सर से डायस में मुखातिब होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ करता था। पहली बार न्यायालय के डायस में विरोधी अधिवक्ता के तौर पर शामिल होने पर मन में अजब सा भय समाया हुआ था।हाथ पैर अपने आप ही कांपने लगे थे।बस ऐसा महसूस हो रहा था,कि अब गिरा की तब गिरा। उन्होंने न्यायालय को नियत प्रक्रिया के विषय में अवगत कराया और कहा कि वकील साहब के सिनियर आज नहीं है।इनकी उपस्थिति दर्ज करा कर आज की कार्रवाई संपादित कर लें। मुझे कोई आपत्ति नहीं है। मैं उनके समक्ष भय वश कुछ बोल नहीं पाया। न्यायालय से बाहर निकल आया फिर उन्होंने मेरा नाम पूछा और मुझे वकालत एवं न्यायालय के प्रदर्शन के संबंध में आवश्यक सीख दी। और आवश्यक पड़ने पर हर संभव मदद का आश्वासन दिया। मैं पहली बार मुखातिब होने पर ही मुझे यह अहसास हुआ कि सर बिना कुछ बोले मेरी ओर से न्यायालय में बात रखते जो मैं शायद न्यायालय में नहीं कह पाता। वास्तव में पहली बार मिलने के बाद ही समझ गया कि अग्रवाल सर एक नारियल के समान है,जो बाहर से कठोर दिखते हैं।पर अंदर से अत्यंत कोमल एवं भावुक सहयोगी है।


     अग्रवाल जी बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने मुझे कहा था,कि बेटा आजकल अप ग्रेड का जमाना है। वकालत में फीस से ज्यादा जानकारी मायने रखता है। प्रतिदिन वकालत के साथ ही नवीन अधिनियम एवं संशोधित नियमों की जानकारी लेनी चाहिए। मैं स्वयं 2 से 3 घंटे नवीन जानकारी एकत्र करता हूं। मुझे वरिष्ठ सदस्यों द्वारा यह भी बताया गया कि कभी-कभी न्यायधीश गण भी अग्रवाल सर को बुलाकर किसी प्रकरण में सलाह ले लेते हैं और नवीन अधिनियम एवं संशोधनों पर चर्चा कर अपनी परेशानी का हल कर लेते हैं और अग्रवाल सर बड़ी ही सहजता के साथ उनके प्रश्नों का निदान कर देते हैं। इससे उनके अभूतपूर्व कार्य क्षमता का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।

मैं 2014 के जिला अधिवक्ता संघ कोरबा के चुनाव में कार्य कारिणी सदस्य पद के उम्मीदवार के रूप में आशिर्वाद लेने कोरबा स्थित अग्रवाल सर के घर गया तो उन्होंने कहा कि कार्यकारिणी सदस्य का भी बहुत काम होता है यदि काम कर सकते हो तो चुनाव लड़ो मेरा आशीर्वाद तुम्हारे साथ है और मैं सभी सदस्य के सहयोग से विजयी हुआ इसी तरह 2016 के चुनाव में मैं पुनः उनसे आशीर्वाद मांगने गया तो उन्होंने कहा की जानता हूं चुनाव आ गया है इस बार किस पद में चुनाव लड़ रहे हो तो मैंने धीमी आवाज ने कहा कि फिर से कार्यकारिणी सदस्य के पद पर चुनाव लड़ रहा हूं तो उन्होंने तपाक से कहा की कैसे उसी पद में फिर से चुनाव लड़ रहे हो, दूसरे पदाधिकारी तो अपने आप को स्वयं पदोन्नत करते हुए अगली बार बड़े पद में चुनाव लड़ते हैं फिर तुम उसी पद में…. !!
मैंने बड़ी विनम्रता से कहा कि मैं अभी बड़े पद के लायक नहीं हूं यही पद ठीक है उन्होंने सिर पर हाथ रख कर आशीर्वाद दिया और कहां की लगता है नेता बन गए हो मैं पुनः विजय जी भी हुआ सन 2018 के चुनाव में जब मैं उनके पास गया तो उन्होंने अपनी डायरी निकाली और मेरे पिछले कार्यकाल की समीक्षा कर संतोष जताकर सहमति दी और कहां की बाकी सब तो ठीक है पर कोरबा अभिभाषक मंच के एडमिन के रूप में सबके ऊपर बहुत डंडा चलाते हो और हंसते हुए पुन:विजयी होने का आशीर्वाद दिया। और मैं सभी की आशीष से पुनः नवीन पद ग्रंथालय सचिव के पद पर आसीन हुआ। यह बात बताने का मेरा आशय यह था कि वे ऐसे शख्सियत थे ही उनका प्रत्येक विषय एवं प्रत्येक जन के प्रति हमेशा ध्यान रहता था और वह सर्जक सक्रिय एवं न्याय प्रिय व मुखर थे।

     आज लगभग कोरबा जिला ही नहीं समूचा छत्तीसगढ़ प्रदेश का वरिष्ठ एवं कनिष्ठ अधिवक्ता परम श्रद्धेय श्री पी के अग्रवाल जी को अपना रोल मॉडल मानता है और उनके पद चिन्हों पर चल कर एक कुशल अधिवक्ता उनकी तरह बनना चाहता है पुण्यतिथि के क्षण में हम सभी को आदरणीय अग्रवाल सर के बताए गए आदर्श एवं दिशा मार्गदर्शन का अनुकरण करते हुए अधिवक्ता गौरव को अक्षुण्ण रखना आवश्यक है और मैं समझता हूं कि उन्हें हम उनके बताए गए मार्गों पर चलकर सच्ची श्रद्धांजलि दे सकते हैं।

के.बी . शांडिल्य
पूर्व कार्यकारिणी सदस्य,
पूर्व ग्रंथालय सचिव, जिला अधिवक्ता संघ, कोरबा

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