अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस पर ज्ञान के प्रकाश का दीप जलायें _

5 अक्तूबर को विश्व शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। जीवन में सफलता का श्रेय शिक्षक को ही जाता है। कबीरदास जी कहते है कि बड़े-बड़े विद्वान शास्त्रों को पढ़कर ज्ञानी होने का दम भरते हैं, परंतु गुरु के बिना उन्हें ज्ञान नहीं मिलता और ज्ञान के बिना मुक्ति नहीं मिलती है।

इस बात में कोई संदेह नहीं गुरु द्वारा दिखाया गया मार्ग ही सफलती की कुंजी है। आज से ठीक एक महीने पहले यानी 5 सितंबर को शिक्षक दिवस था, जिसे पूरे देश ने मनाया गया। हर साल ऐसा ही होता है। यहां हम आपको बता रहे हैं कि विशेषता एक होने के बावजूद दिन अलग-अलग क्यों हैं।

अंतरराष्ट्रीय शिक्षक दिवस संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 1966 में यूनेस्को और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की हुई संयुक्त बैठक के कारण मनाया जाता है। उस बैठक में अध्यापकों की स्थिति को लेकर चर्चा की गई थी और सुझाव भी प्रस्तुत किए गए थे। इस दिन मुख्य रूप से कार्यरत अध्यापकों एवं सेवानिवृत्त शिक्षकों को उनके विशेष योगदान के लिए सम्मानित किया जाता है।

इस विशेष दिन भारत के पूर्व राष्ट्रपति और महान शिक्षाविद डॉ. सर्वपल्ली राधा कृष्णन का जन्म हुआ था। उनके जन्म दिवस को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। राधा कृष्णन पूरी दुनिया को स्कूल मानते थे। राधा कृष्णन का कहना था कि जब कभी भी कहीं से भी कुछ सीखने को मिले, तो उसे तभी अपने जीवन में उतार लेना चाहिए। वह अपने छात्रों को पढ़ाते वक्त उनकी पढ़ाई से ज्यादा उनके बौद्धिक विकास पर ध्यान देते थे।

एक बार राधा कृष्णन के कुछ शिष्यों ने मिलकर उनका जन्मदिन मनाने का सोचा। इसे लेकर जब वे उनसे अनुमति लेने पहुंचे तो राधा कृष्णन ने उन्हें कहा कि मेरा जन्मदिन अलग से सेलिब्रेट करने के बजाय शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाए तो मुझे गर्व होगा। इसके बाद से ही 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। आपको बता दें, पहली बार शिक्षक दिवस 1962 में मनाया गया था।

प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम”
शोध प्रशिक्षक एवं साहित्यकार
लखनऊ, उत्तर प्रदेश

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