विश्वकर्मा पूजा कब है.? जानें सही तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व

विश्वकर्मा पूजा कब है, जानें सही तारीख और पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व

हर साल भाद्रपद मास में जब सूर्य सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में जाते हैं तो विश्वकर्मा पूजा मनाई जाती है। इस दिन लोग अपने औजारों, कारखाने, दुकान, फैक्ट्री, वाहन आदि की विधि-विधान से पूजा करते हैं। वहीं, इस दिन औजार से जुड़ा काम करने वाले लोग अपने औजारों का इस्तेमाल नहीं करते हैं। साथ ही, भगवान विश्वकर्मा की पूजा विधि-विधान से करने का भी खास महत्व है। ऐसे में आइए विस्तार से जानते हैं कि इस साल विश्वकर्मा पूजा कब मनाई जाएगी और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।

विश्वकर्मा पूजा 2025 तिथि और पूजा का मुहूर्तहर साल की तरह इस बार भी विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर को मनाई जाएगी। सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश करने पर विश्वकर्मा जयंती मनाई जाती है। बता दें 16 सितंबर, मंगलवार के दिन रात में 1 बजकर 47 मिनट पर सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। ऐसे में 17 तारीख को सूर्योदय के समय से ही विश्वकर्मा पूजा का शुभ संयोग बनेगा। इसमें पूजा के लिए सबसे उत्तम समय सुबह 10 बजकर 43 मिनट से शुरू होकर दोपहर के 12 बजकर 16 मिनट तक रहेगा।

विश्वकर्मा पूजा की विधि० इस दिन सुबह उठकर अपनी मशीनों, औजारों आदि को अच्छा तरह साफ कर लें। इसके बाद, सारी मशीनों को बंद करके उनकी पूजा करें और भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर को अपनी मशीन के पास में रखें।० दोनों की एक साथ पूजा करने के बाद अपने वाहनों की पूजा भी अवश्य कर लें। अब भगवान विश्वकर्मा को मिष्ठान का भोग व प्रसाद जरूर चढ़ाना चाहिए।० इस दिन गरीब और जरूरतमंद लोगों को जरूरत के सामान दान करना भी बहुत शुभ माना जाता है।० साथ ही, विश्वकर्मा पूजा पर अपनी घर की छोटी-छोटी मशीनों की भी पूजा करने का महत्व होता है।

विश्वकर्मा पूजा का महत्वहिंदू धर्म में विश्वकर्मा पूजा का बेहद विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि जिन घरों, कारखानों, फैक्ट्री आदि में भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है वहां पर सदैव माता लक्ष्मी का वास बना रहता है। साथ ही, कारोबार में मुनाफा होता है। जो लोग लैपटॉप या मोबाइल से काम करते हैं उन्हें भी यह पूजा जरूर करनी चाहिए। ऐसा करने से काम में तरक्की होती है। भगवान विश्वकर्मा को दुनिया पहला इंजीनियर और वास्तुकार भी कहा जाता है। मान्यता है कि उन्होंने ही इंद्रपुरी, द्वारिका, हस्तिनापुर, स्वर्ग लोक और लंका का निर्माण किया था। इतना ही नहीं विश्वकर्मा भगवान ने ही विष्णुजी का सुदर्शन चक्र तैयार किया था।

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