संयुक्त किसान मोर्चा (SKM), छत्तीसगढ़

“अडानी भगाओ — छत्तीसगढ़ बचाओ” के नारे के साथ संयुक्त किसान मोर्चा ने पूरे प्रदेश में मनाया कॉर्पोरेट विरोधी दिवस*रायपुर। संयुक्त किसान मोर्चा के देशव्यापी आह्वान पर आज छत्तीसगढ़ में भी मोर्चा के घटक संगठनों ने पूरे प्रदेश में कॉर्पोरेट विरोधी दिवस मनाया, धरना-प्रदर्शन आयोजित किए तथा राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपे गए। इस आंदोलन के जरिए संयुक्त किसान मोर्चा ने भारत छोड़ो आंदोलन की प्रासंगिकता को रेखांकित किया तथा देश के संसाधनों को चंद कारपोरेट घरानों के सुपुर्द करने का कड़ा विरोध किया। आंदोलनकारियों ने भारत के कृषि क्षेत्र को विदेशी आयात के लिए खोलने, बिहार में एसआईआर के नाम पर पिछले दरवाजे से एनआरसी को लागू करने का भी विरोध किया है।संयुक्त किसान मोर्चा ने आरोप लगाया है कि छत्तीसगढ़ को अदानी कंपनी की लूट का चारागाह बना दिया गया है। पेसा और वनाधिकार अधिनियम और सभी संवैधानिक प्रावधानों का खुला उल्लंघन करते हुए यहां जल, जंगल, जमीन और पर्यावरण का विनाश किया जा रहा है। इसके लिए उन्होंने केंद्र और राज्य की कॉर्पोरेटपरस्त नीतियों को जिम्मेदार ठहराते हुए अडानी और अन्य कॉर्पोरेट कंपनियों को छत्तीसगढ़ से भगाने की जरूरत पर भी जोर दिया है। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान के पालन के क्रम में आज भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने गरियाबंद, दुर्ग, जगदलपुर, बीजापुर और नारायणपुर जिले में, अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान संगठन और आदिवासी भारत महासभा द्वारा मैनपुर, छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा द्वारा दल्ली राजहरा और बालोद में, जिला किसान संघ द्वारा राजनांदगांव में, छत्तीसगढ़ किसान महासभा द्वारा रायपुर में, हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति द्वारा हसदेव में, छत्तीसगढ़ किसान सभा और भू विस्थापित रोजगार एकता संघ द्वारा कुसमुंडा (कोरबा) और लुण्ड्रा (सरगुजा) में धरना और प्रदर्शन किया गया। विभिन्न जगहों पर हुए इन आंदोलनों का नेतृत्व तेजराम विद्रोही, प्रवीण श्याेकंद, नरोत्तम शर्मा, सौरा यादव, भीमसेन मरकाम, युवराज नेताम, जनकलाल ठाकुर, रमाकांत बंजारे, सुदेश टीकम, आलोक शुक्ला, प्रशांत झा, जवाहर कंवर, दीपक साहू, सोमेंद्र सिंह, दामोदर श्याम और ऋषि गुप्ता आदि किसान नेताओं ने किया।सभी जगहों पर प्रशासन के अधिकारियों को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया है। ज्ञापन में अमेरिका के साथ कृषि समझौते का और भारत पर थोपे गए 50 प्रतिशत टैरिफ का विरोध किया गया है, राष्ट्रीय सहकारी नीति को किसानों के लिए नुकसानदेह बताया गया है, लाभकारी समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीदी और किसानों पर चढ़े सभी ऋणों को माफ करने और सभी वृद्ध किसानों को 10000 रुपए पेंशन देने की मांग की गई है। स्मार्ट मीटर सहित बिजली क्षेत्र के निजीकरण का विरोध किया गया है। इसके साथ ही कॉरपोरेट खनन रोकने और आदिवासियों के विस्थापन पर रोक लगाने की भी मांग की गई है।संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार को अपनी कॉर्पोरेटपरस्त नीतियों के विरोध में आम जनता और किसान समुदाय का तीखा विरोध झेलना पड़ेगा। भाजपा की मजदूर-किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ पूरे प्रदेश में किसानों और आदिवासियों को लामबंद करने की योजना बनाई जा रही है। *संजय पराते (मो : 94242-31650) द्वारा संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से जारी*

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