
बिलासपुर – केन्द्रीय विद्यालय सीआरपीएफ बिलासपुर में 1 नवंबर से 15 नवंबर तक जनजातीय गौरव पखवाड़ा का आयोजन बड़े धूमधाम से किया जा रहा है। इस पखवाड़े का उद्देश्य भारत की जनजातीय संस्कृति, उनकी समृद्द परंपराओं और उनके योगदान को उजागर करना है। इस कार्यक्रम के दौरान छात्रों, शिक्षकों और समुदाय के सदस्यों को आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति से अवगत कराया गया और उनके सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को सराहा गया।

इस कड़ी में दिनांक 1 नवम्बर को विद्यालय में विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ आयोजित की गईं, जिसमें आदिवासी नृत्य, संगीत और उनके योगदान पर परिचर्चा शामिल थे। बीहू, कर्मा, संबलपुरी, पहाड़ी आदि नृत्यों द्वारा कक्षा नवमीं की छात्राओं वैभवी, तनिशा, तान्या, मान्या, हिमांशी, लावण्या, अग्रिमा एवं हर्षिता ने लोक कला की विविधताओं को प्रदर्शित किया, जो आदिवासी सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न हिस्सा हैं। दिनांक 3 नवंबर को हर्षवर्धन, ओम एवं वंश ने “हम हन आदिवासी-तीर कमान हमर पहिचान” गीत को सुमधुर वाद्य यंत्रों के साथ प्रस्तुत किया।कक्षा पांचवीं के विद्यार्थियों ने महान जनजातीय विभूतियों एवं उनके योगदान को उनकी वेशभूषा में साकार रूप से प्रस्तुत किया।

आदविक बिरसा मुंडा के रूप में, आरव ने तांतिया भील, अर्पित तिवारी ने अल्लुरी सीताराम राजू, आरव सरकार ने कान्हू मुर्मू और ए. साध्या ने रानी दुर्गावती के रूप में उनके योगदान को प्रस्तुत किया।पखवाड़े के दौरान विद्यार्थियों के लिए विशेष शिक्षा सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में आदिवासी समाज की संघर्षशीलता, उनके पारंपरिक ज्ञान और उनके योगदान पर चर्चा की गई। छात्रों को आदिवासी अधिकारों, उनकी भाषा, पहनावे, कला और जीवनशैली के बारे में जानकारी दी गई।
कार्यक्रम समन्वयक सुनील पांडेय ने बताया कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आदिवासी समुदाय की संस्कृति और उनके योगदान को समाज के सामने लाना है। इसके माध्यम से यह संदेश दिया गया कि हमें उनके अधिकारों, संस्कृति और विरासत का सम्मान करना चाहिए।प्राचार्य रमाकांत कौशिक ने जानकारी देते हुए बताया कि केंद्र सरकार ने बिरसा मुंडा जयंती को जनजातीय गौरव दिवस एवं पखवाड़ा के रूप में मनाने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत 1 से 15 नवंबर तक विद्यालय में विविध गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।







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