
छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन जिला कोरबा के आह्वान पर आयोजित तीन दिवसीय आंदोलन का समापन 31 दिसंबर को विशाल रैली के साथ हुआ। अंतिम दिवस जिलेभर से आए हजारों कर्मचारियों एवं अधिकारियों ने अपनी लंबित और जायज़ मांगों को लेकर खुलकर आक्रोश व्यक्त किया। इस आंदोलन को अभूतपूर्व समर्थन मिला और पूरे जिले में इसका व्यापक असर देखने को मिला।

तीन दिवसीय आंदोलन के अंतिम दिन कर्मचारियों ने एकजुट होकर विशाल रैली निकाली। रैली के पश्चात फेडरेशन के पदाधिकारियों के.आर. डहरिया, जगदीश खरे, तरुण सिंह राठौर, ओमप्रकाश बघेल, आर.डी. श्रीवास, पीयूष निर्मलकर, एम.एस. राठिया, नित्यानंद यादव, कृति लहरे, विनोद सांडे, आर.आर. श्रीवास, राजेश तिवारी, सी.एल. पटेल, रामकपुर कुर्रे, तरुण वैष्णव, लोकनाथ सेन, अशोक राठिया, अशोक कश्यप, संतोषी सिंह, सपना राजपूत, ज्योति सिंह एवं सीमा लाल सहित अन्य प्रमुख पदाधिकारियों के नेतृत्व में अपर कलेक्टर ओंकार यादव को मुख्य ज्ञापन सौंपा गया। यह ज्ञापन कलेक्टर कोरबा के माध्यम से मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन एवं मुख्य सचिव के नाम प्रेषित किया गया।
ज्ञापन में फेडरेशन द्वारा कर्मचारियों की प्रमुख मांगों को प्रमुखता से रखा गया।
इनमें केंद्रीय कर्मचारियों के समान देय तिथि से महंगाई भत्ता (डीए) प्रदान करना, समयमान वेतनमान लागू करना, कैशलेस चिकित्सा सुविधा, अर्जित अवकाश के नगदीकरण की व्यवस्था शामिल है। इसके साथ ही संविदा, दैनिक वेतनभोगी एवं अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण, टेट की अनिवार्यता को समाप्त करने, विद्या समीक्षा केंद्र (VSK) ऐप को निजी मोबाइल से हटाकर शासन द्वारा आवश्यक सिस्टम उपलब्ध कराने सहित कुल 11 सूत्रीय मांगों को शीघ्र पूर्ण करने की मांग की गई।

इस अवसर पर फेडरेशन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि शासन द्वारा शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो भविष्य में आंदोलन को और अधिक उग्र रूप दिया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। अपर कलेक्टर ओंकार यादव ने ज्ञापन प्राप्त कर इसे शासन स्तर तक भेजने का आश्वासन दिया।

अंत में छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन जिला कोरबा के महासचिव ओमप्रकाश बघेल ने आंदोलन को सफल बनाने के लिए जिले के समस्त कर्मचारी-अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए एकजुटता बनाए रखने का आह्वान किया।







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