
बजट पर उठे सवाल: वादों की झलक नहीं, युवाओं और ग्रामीण विकास की अनदेखी *संजीव पाल* चुनाव से पहले किए गए वादों की पूर्ति इस बजट में नजर नहीं आ रही है। युवाओं के लिए बेरोजगारी भत्ते पर कोई नई घोषणा नहीं की गई और शिक्षित बेरोजगारों को रोजगार देने की दिशा में भी ठोस पहल का अभाव दिखता है। शिक्षा, पुलिस और स्वास्थ्य विभागों में बड़ी संख्या में रिक्त पद होने के बावजूद भर्ती को लेकर कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं किया गया, जिससे युवाओं में निराशा बढ़ रही है। ग्रामीण विकास के लिए अपेक्षित बजट आवंटन नहीं दिख रहा है। पिछले दो वर्षों से पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा ग्राम पंचायतों को राशि नहीं दिए जाने का मुद्दा भी उठाया गया। वहीं भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर आरोप है कि प्रदेश की GDP को 6.30 लाख करोड़ से 7.10 लाख करोड़ करने और fiscal deficit को 2.87% तक सीमित करने की बातें सिर्फ आंकड़ों तक सीमित हैं। बिलासपुर एयरपोर्ट सहित अंबिकापुर और जगदलपुर एयरपोर्ट के लिए मात्र 80 करोड़ रुपये का प्रावधान क्षेत्र की जनता के साथ अन्याय बताया गया है। आरोप है कि सरकार आबकारी राजस्व बढ़ाने और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन पर अधिक निर्भर नजर आ रहा है। बजट पर उक्त विचार समाजसेवी संजीव पाल ने दिया।चुनाव से पहले किए गए वादों की पूर्ति इस बजट में नजर नहीं आ रही है। युवाओं के लिए बेरोजगारी भत्ते पर कोई नई घोषणा नहीं की गई और शिक्षित बेरोजगारों को रोजगार देने की दिशा में भी ठोस पहल का अभाव दिखता है।
शिक्षा, पुलिस और स्वास्थ्य विभागों में बड़ी संख्या में रिक्त पद होने के बावजूद भर्ती को लेकर कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं किया गया, जिससे युवाओं में निराशा बढ़ रही है।
ग्रामीण विकास के लिए अपेक्षित बजट आवंटन नहीं दिख रहा है। पिछले दो वर्षों से पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा ग्राम पंचायतों को राशि नहीं दिए जाने का मुद्दा भी उठाया गया।
वहीं भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर आरोप है कि प्रदेश की GDP को 6.30 लाख करोड़ से 7.10 लाख करोड़ करने और fiscal deficit को 2.87% तक सीमित करने की बातें सिर्फ आंकड़ों तक सीमित हैं।
बिलासपुर एयरपोर्ट सहित अंबिकापुर और जगदलपुर एयरपोर्ट के लिए मात्र 80 करोड़ रुपये का प्रावधान क्षेत्र की जनता के साथ अन्याय बताया गया है। आरोप है कि सरकार आबकारी राजस्व बढ़ाने और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन पर अधिक निर्भर नजर आ रहा है। बजट पर उक्त विचार समाजसेवी संजीव पाल ने दिया।






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