विशाखापटनम की संस्था सृजन की ऑनलाइन काव्य साहित्य चर्चा संपन्न

आज विशाखापटनम की लंबे समय से सक्रिय हिंदी साहित्य संस्था सृजन ने अपने सदस्यों की काव्य रचनाओं पर आज अपने 163वें कार्यक्रम के रूप में साहित्य चर्चा का ऑनलाइन आयोजन किया। सृजन के रचनाकारों ने विविध विषयों पर अपनी अपनी कविताएं प्रस्तुत की जिस पर सदस्यों द्वारा विस्तृत चर्चा हुई। इस मासिक साहित्य कार्यक्रम में डॉ टी महादेव राव सृजन ने इस आयोजन के विषय में चर्चा की और संस्था की गतिविधियों और क्रियाशीलता पर अपनी बातें रखी। कार्यक्रम का आरंभ डॉ के अनिता के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने बताया हिंदीतर क्षेत्र में हिंदी साहित्य की अलख जगाने को प्रतिबद्ध यह संस्था लंबे समय से इस क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रही है। कार्यक्रम का संचालन जयप्रकाश झा ने सफलतापूर्वक किया। कार्यक्रम की शुरुआत हुई सरस्वती वंदना से जिसे प्रस्तुत किया डॉ के अनिता ने। डॉ मधुबाला कुशवाहा ने जीवन के संघर्ष और उससे मिलती सफलता को कविता के माध्यम से बखूबी प्रस्तुत किया। डॉ के अनीता ने कार्तिक मास की विशिष्टता और बदलते मौसम की सुंदरता को जोड़कर सधी हुई रचना सुनायीं। एल चिरंजीव राव ने ज़िंदगी के अलग अलग हालातों पर सामयिक मगर प्रभावी मुक्तक स्वयं से स्वयं के पहचान, रिशे और परिस्थितियाँ प्रस्तुत किए। रोजगार में व्यस्त और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच पिसते और अवकाश को तरसते आदमी की बात पारस नाथ यादव ने अपनी कविता अवकाश में पढ़ी। डॉ शकुंतला बेहुरा ने सीमा रक्षा में संघर्ष रात, वियपरीत परिस्थितियों में झूझते हुये देश की रक्षा करते सिपाही पर मर्मस्पर्शी कविता का ओपाठ किया। एस वी आर नायडू ने तीन हास्य रचनाएँ सौतन, प्रेम और ख़यालों में सुनायीं। राम प्रसाद यादव ने नवगीत उँगली की खूंटी पर पर टंगी कमीज़ और ज़िंदगी शीर्षक अपनी कविता में विविध रूपों और विविध प्रतीकों के माध्यम से प्रभावी ढंग से प्रस्तुत लिया। रास्ता भूली मानवता पर सवेदनशील रचना मीना गुप्ता ने पढ़ा। डॉ टी महादेव राव ने सामाजिक विषमताओं पर, बदलते परिवेश पर मानव व्यवहार की कविता विनिमय का अर्थशास्त्र का पाठ किया। जय प्रकाश झा ने आसमान का आधा हिस्सा स्त्री और उसके संघर्ष, संकल्प और सफलता की कविता हाल ही में विश्व विजेता बनी महिला क्रिकेट टीम के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत किया। इस कार्यक्रम में एम माणिक्याम्बा ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया। सारी रचनाओं पर चर्चा हुई और सभी ने काव्य साहित्य चर्चा को उपयोगी, प्रेरणास्पद और लेखन के लिए उत्प्रेरक बताया। कार्यक्रम का समापन एल चिरंजीव राव के कार्यक्रम की संक्षिप्त समीक्षा और धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। डॉ टी महादेव राव, सचिव सृजन , विशाखापटनम

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