
दुर्गा नवमी के अवसर पर हुआ भव्य आयोजन, साहित्यिक वातावरण में गुंजी कविताओं की गूंज/ बिलासपुर। दुर्गा नवमी के पावन अवसर पर शुक्रवार को बिलासपुर विधायक अमर अग्रवाल के कार्यालय में एक भव्य साहित्यिक समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें बिलासपुर जिले के पेंड्रा रोड (जीपीएम) निवासी डॉ. गुंजन मिश्रा की दो पुस्तकों ‘आनंद का खजाना’ एवं ‘मुझमें ही मिल’ का गरिमामय विमोचन किया गया। इस अवसर पर साहित्य प्रेमियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और शहर के अनेक गणमान्य नागरिकों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति रही।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि विधायक अमर अग्रवाल ने दोनों पुस्तकों का विमोचन करते हुए डॉ. गुंजन मिश्रा की साहित्यिक प्रतिभा की सराहना की। उन्होंने कहा—“डॉ. गुंजन मिश्रा की रचनाएँ जीवन के विविध रंगों को बड़े ही सरल किंतु गहन शब्दों में अभिव्यक्त करती हैं। साहित्य समाज का दर्पण है और ऐसी कृतियाँ आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेंगी। मुझे विश्वास है कि आने वाले समय में डॉ. गुंजन काव्य जगत में एक विशेष पहचान बनाएंगी।”डॉ. गुंजन मिश्रा, नारायण प्रसाद मिश्रा की सुपुत्री एवं आबकारी उपायुक्त विजय सेन शर्मा की धर्मपत्नी हैं। उन्हें बचपन से ही लेखन का शौक रहा है और उन्होंने अपनी रचनात्मकता को काव्य साहित्य में अभिव्यक्त करने का संकल्प लिया। इसी क्रम में उनकी दोनों कृतियों का विमोचन दुर्गा नवमी के विशेष दिन पर सम्पन्न हुआ।उन्होंने अपने वक्तव्य में बताया कि “आनंद का खजाना” जीवन के आंतरिक भावों, संघर्षों और आत्मिक शांति की खोज का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि विधायक के हाथों विमोचन होना उनके लिए गर्व और प्रेरणा का क्षण है।इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह ने डॉ. मिश्रा की कविताओं का रसास्वादन भी किया। कविताओं ने श्रोताओं के हृदय में गहरी छाप छोड़ी।डॉ. गुंजन मिश्रा की कविता की झलक —“ये मेरा युद्ध है, मेरे ही विरुद्ध है,लड़ना है खुदी से, जीतना भी खुद है।मैं ही प्रश्न हूँ, मैं ही उत्तर हूँ,मैं ही रणभूमि, मैं ही समर हूँ।”एक अन्य कविता में उन्होंने जीवन की सच्चाई और वर्तमान को अपनाने का भावपूर्ण संदेश दिया —“तो क्यों नकल को छोड़आज को थाम लिया जाएताकि ‘ज़ी कल’सिर्फ़ एक चैनल न रहे,बल्कि जीता-जागताआज का उत्सव बन जाए।”तीसरी कविता में उन्होंने सामाजिक और आत्मिक यथार्थ को गहराई से छुआ —“सपनों के झूले झुलाता,वादों का ये झूठा दर्पण…सच तो वही है स्थिर खड़ा,जो भीतर है, आत्मा का आसन।”कार्यक्रम में पूरा वातावरण साहित्यिक गरिमा, भक्ति और उत्साह से परिपूर्ण रहा। उपस्थित जनों ने डॉ. गुंजन मिश्रा के साहित्यिक योगदान की मुक्तकंठ से प्रशंसा की और उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दीं।







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