
मंथन के तत्वावधान में आयोजित काव्य संध्या में साक्षात्कार सह काव्य गोष्ठी का प्रारम्भ डॉ शिवदत्त शर्मा द्वारा सरस्वती वंदना एवं गणपति वंदना कार्यक्रम की अध्यक्ष डॉ मीरा रामनिवास वर्मा ने समधुर स्वरों में प्रस्तुत की । संचालन एवं पटल गान डॉ राम पंच भाई जी द्वारा किया गया। पूर्व अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक डाॅ मीरा रामनिवास वर्मा का अभिवादन के साथ साक्षात्कारकर्ता डॉ राम पंचभाई ने साक्षात्कार ,जिज्ञासु साहित्यकारों की ओर मुखातिब होते हुए , प्रारंभ किया।प्रश्न -आपकी शैक्षणिक योग्यता व शासकीय सेवा में प्रवेश कैसे और कहां से हुआ?उत्तर -जन्म – जिला भरतपुर, राजस्थान शिक्षा-एम ए, पी एच डी संस्कृत साहित्य उपरांत महाविद्यालय में संस्कृत व्याख्याता के रूप में सेवाएं देने के बाद राजस्थान लेखा सेवा तदोपरांत यूपीएससी में चयनित होकर भारतीय पुलिस सेवा में कार्यरत रहते हुए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक मानव अधिकार आयोग से सेवा निवृत्त हुई।प्रश्न -आपने पीएचडी उपाधि सेवा में आने के पूर्व या बाद प्राप्त की?उत्तर – मेरे गाइड के परामर्श अनुसार पहले महाविद्यालयीन व्याख्याता का पद ग्रहण करने उपरांत भारतीय पुलिस सेवा में चयनित होने के बाद शोध।प्रश्न -शोधकार्य किस विषय पर चुना?उत्तर – *संस्कृत नाटकों में न्याय एवं दंड व्यवस्था*प्रश्न – आपको IPS में जाने की प्रेरणा कैसे मिली ?उत्तर – भोपाल में ऑंखफोड़ कांड हुआ था उसके बाद अनुभव हुआ कि पुलिस विभाग में अच्छी सोच वाले लोगों की भी जगह है । UPSC से लगाव था , उसमें सफल होकर IPS चुना ।प्रश्न – सफलता कैसे प्राप्त की ? कोचिंग या स्वाध्याय।उत्तर – तैयारी निजी तौर पर की । कारण पारिवारिक आर्थिक स्थिति नौकरी छोड़कर कोचिंग करने की नहीं थी इसलिए स्वयं अध्ययन किया।प्रश्न -स्व अध्ययन का आधार क्या था?पिछले 10 वर्षों के पेपर्स को चुनकर तैयारी की । हिंदी माध्यम की विद्यार्थी होने से परिश्रम खूब करना पड़ा , अंततः तीसरे प्रयास में सफलता मिली ।प्रश्न-आज से 40 वर्ष पहले की स्थिति और वर्तमान दशा में बतौर IPS क्या बदलाव महसूस होता है ?उत्तर – आज के दौर में सुविधाएं अत्याधुनिक हैं और हम इंटरनेट के दौर से गुजर रहे हैं , कार्य शैली में बहुत बदलाव हुए हैं । सुरक्षा व्यवस्था , साइबर क्राइम के साथ अपराध का ग्राफ बढा़ है , चुनौतियां नए स्वरूप में ज्यादा हैं । प्रश्न – साहित्य से जुड़ी थीं , IPS बनने के लिए क्या क्या सीखना पड़ा ?उत्तर – IPS की बेच में 85 लड़कों के बीच अकेली लड़की थी , प्रतिस्पर्धा लड़कों से करनी पड़ी , खुद में बहुत कुछ बदलाव लाने पड़े । प्रशिक्षण के आवश्यक अंग घुड़सवारी , स्विमिंग , रॉक क्लाइम्बिंग आदि सब आवश्यक थे जो चैलेंज के रूप में लिए और सफलता हासिल की ।प्रश्न – आपकी पहली नियुक्ति बतौर IPS?उत्तर – गुजरात काडर में प्रथम नियुक्ति अहमदाबाद में मिली ( नरोडा , शहर कोटड़ा आदि इसके प्रभाग थे ) प्रश्न – सेवा यात्रा के दौरान प्रेरणा कहाँ से मिली ?उत्तर – बड़ौदा में एक पाश एरिया में सीनियर सिटीजन्स जो NRI थे की हत्या से जुड़ा मामला था जिसमें काफी मंथन करना पड़ा और फिर हमने सीनियर सिटीजन सेवा की शुरुआत की , जो सफल होकर प्रदेश की योजना बनी । ऐसे ही ट्रेन में चोरी होने वाले बच्चों की समस्या का निदान भी बड़ी गहन सोच के साथ किया ।प्रश्न – क्या पहले भी अपराधियों को बचाने में राजनीतिक दबाव झेलना पड़ता था ?उत्तर – पहले भी यह दबाव होता था , और मुश्किल तब होती थी जब राजनेता के परिवार के लोग ही अपराध से जुड़े हों ।प्रश्न – आज से 40 वर्ष एक IPS के तौर पर नियुक्ति मेंकैसा अनुभव हुआ था ?उत्तर – बड़ा सुखद अनुभव था , जिले की पहली महिला IPS अधिकारी चुनी गई थी । जिस दिन परीक्षाफल आया उस दिन हम एक सीनियर IAS अधिकारी के यहाँ मिलने गए हुए थे , मेरे भाई स्वयं एक जज थे तो उनके साथ थी । वहां मुलाकात के दौरान अखबार पढ़ने को मिला जिसमें परीक्षाफल था और मेरी सफलता वहाँ बधाइयों के साथ मुझे मिली । साहित्य से जुड़ी थीं , IPS बनने के लिए क्या क्या सीखना पड़ा ?उत्तर – IPS की बेच में 85 लडकों के बीच अकेली लड़की थी , प्रतिस्पर्धा लड़कों से करनी पड़ी , खुद में बहुत कुछ बदलाव लाने पड़े । प्रशिक्षण के आवश्यक अंग घुड़सवारी , स्विमिंग , रॉक क्लाइम्बिंग आदि सब आवश्यक थे जोचैलेंज के रूप में लिए और सफलता हासिल की ।प्रश्न – आपकी पहली नियुक्ति बतौर IPS?उत्तर – गुजरात काडर में प्रथम नियुक्ति अहमदाबाद में मिली ( नरोडा , शहर कोटड़ा आदि इसके प्रभाग थे ) प्रश्न – सेवा यात्रा के दौरान प्रेरणा कहाँ से मिली ?उत्तर – बड़ौदा में एक पाश एरिया में सीनियर सिटीजन्स जो NRI थे कि हत्या से जुड़ा मामला था जिसमें काफी मंथन करना पड़ा और फिर हमने सीनियर सिटीजन सेवा की शुरुआत की , जो सफल होकर प्रदेश की योजना बनी । ऐसे ही ट्रेन में चोरी होने वाले बच्चों की समस्या का निदान भी बड़ी गहन सोच के साथ किया ।प्रश्न – क्या पहले भी अपराधियों को बचाने में राजनीतिक दबाव झेलना पड़ता था ?उत्तर – पहले भी यह दबाव होता था , और मुश्किल तब होती थी जब राजनेता के परिवार के लोग ही अपराध से जुड़े हों ।प्रश्न – आज से 40 वर्ष एक IPS के तौर पर नियुक्ति मेंकैसा अनुभव हुआ था ?उत्तर – बड़ा सुखद अनुभव था , जिले की पहली महिला IPS अधिकारी चुनी गई थी । जिस दिन परीक्षफल आया उस दिन हम एक सीनियर IAS अधिकारी के यहाँ मिलने गए हुए थे , मेरे भाई स्वयं एक जज थे तो उनके साथ थी । वहां मुलाकात के दौरान अखबार पढ़ने को मिला जिसमें परीक्षाफल था और मेरी सफलता वहाँ बधाइयों के साथ मुझे मिली ।प्रश्न- साहित्यिक क्षेत्र की उपलब्धियों पर प्रकाश डालेंगी?उत्तर – -शोध संपादन- “संस्कृत नाटकों में न्याय एवं दंड व्यवस्था आधुनिक परिप्रेक्ष्य में” । प्रकाशन-काव्य,कथा ,बाल-साहित्य,आलेख व 6 पुस्तकें प्रकाशित। -खाकी मन की संवेदनाएं’ (पुलिस अधिकारियों की रचनाओं का संकलन)का संपादन।प्रश्न – पुलिस सेवा में कोई विशेष उपलब्धि के बारे में चर्चा करेंगी?उत्तर – विशिष्ट पुलिस सेवाओं में सामुदायिक पुलिसिंग के अंतर्गत – पुलिस मित्र योजना ,सीनियर सिटीजन सेवा योजना,महिला हेल्प लाईन ,मानव व्यापार की रोकथाम के लिए अभियान अंतर्गत “बचपन बचाओ” नाटक का मंचन। *प्रश्न -इसके इतर गतिविधियां हों तो बताएं? महाविद्यालयों में समसामयिक विषयों पर व्याख्यान ,दूरदर्शन,आकाशवाणी से काव्य पठन, हिंदी पत्रिकाओं के लिए कथा, काव्य लेखन,बाल पत्रिकाओं के बाल साहित्य लेखन,- स्टोरी मिरर एवं प्रतिलिपि वैब साइट्स पर साहित्य लेखन जारी।प्रश्न – आपको भारतीय पुलिस सेवा में रहते हुए विशेष सम्मान मिला हो तो कृपया उल्लेख करें?उत्तर -विशिष्ट सेवा हेतु पुलिस पदक,सौराष्ट्र संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा “‘प्रशासन साहित्य भारती सम्मान'” ,अंतरराष्ट्रीय हिंदी मिशन द्वारा “अंतराष्ट्रीय हिंदी गौरव सम्मान”,अंतरराष्ट्रीय महिला क्लब द्वारा “‘सेवा सम्मान”, स्टोरी मिरर द्वारा ‘”सामाजिक सरोकार सर्टिफिकेट'”साहित्यालोक संस्था अहमदाबाद द्वारा ‘”साहित्य सारस्वत सम्मान'”,हिंदी साहित्य सभा मुंबई द्वारा “”मातृ भूमि गौरव” सम्मान'”।प्रश्न – डॉ मीरा वर्मा IPS और मीरा वर्मा में बेहतर कौन है ?उत्तर – पद पर वज्र जैसी कठोर तो मन से कोमल , संवेदनशील , मानवता के हित लड़़ने वाली मीरा , जीवन में बिल्कुल सहज और सरल है ।प्रश्न – आप सेवानिवृत कब हुई ?उत्तर – ऑक्टोम्बर 2016 में , ADG पुलिस के पद से ।प्रश्न – सेवानिवृति के बाद 9 साल के अनुभव कैसे रहे ?उत्तर – संस्कृत विषय होने से गीता अध्ययन में संलिप्तता रही , साहित्य से जुड़ी , लेखन जारी रखा , महाविद्यालयों में व्याख्यान , अपने आप को व्यस्त बनाए रखा , अनुभव सुखद रहा ।प्रश्न – क्या UPSC जैसी प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में संस्कृत जैसे विषय लेकर सफलता पाई जा सकती है ?उत्तर – अवश्य क्यों नहीं , बेहतर होगा परन्तु मुख्य परीक्षा के विषय आपकी रुचि पर निर्भर रहेगा ।इसके बाद पटल से जुड़े़ कुछ सुधी साहित्यजनों के प्रश्न -*दीपा शर्मा* -अपने कार्यकाल के दौरान कभी आपने अपने आपको असहाय सा महसूस किया क्या ?उत्तर – महिला अपराध के दौरान कुछ असहजता ज़रूर लगी । कभी यह भी हुआ कि हमारी मेहनत का श्रेय कोई और ले रहा है परंतु यह सब कार्यकाल के मध्य होता ही है ।*डॉ शिवदत्त शर्मा* -कभी किसी जघन्य अपराधी के कोर्ट से बरी होने पर कैसा महसूस हुआ ?उत्तर – ऐसा तो कभी हुआ नहीं , अपराधियों को साक्ष्य के आधार पर सजा मिलती ही है और हमारा काम अपराधी को पकड़़ कर साक्ष्य जुटाना ही होता है ।*इंजीनियर खण्डेलवाल* – भेंट द्वारका आज क्राइम नगरी दिखाई देता है , यह किसके गठजोड़ से संभव हुआ ?उत्तर – यह हिस्सा पोर्ट से जुड़ा होने से अपराध से सदैव जुड़ा रहा है , मांझी लोग कम पढ़े लिखे होते हैं , स्मगलर्स उनका ग़लत उपयोग कर अपराध करते हैं और करवाते भी रहे हैं ।*बृज व्यास* – आपका वैवाहिक जीवन कैसा रहा , क्या हमसफर IAS या IPS?उत्तर – वैवाहिक जीवन सुखद रहा , हमसफर IPS हैं , परन्तु पारिवारिक सुख पुलिस विभाग की नोकरी में कम होता है।बच्चों को भी समय दे पाना मुश्किल होता है । धीरे धीरे इन सब चीजों की सहज सी आदत हो जाती है ।*बच्चूलाल दीक्षित* -हमारे समाज से भी एक लड़़की का चयन अभी UPSC में हुआ है लोगों ने उसे सम्मानित करने के लिए बुलाया । कार्यक्रम मंदिर प्रांगण में आयोजित था।वहां वह लड़़की जूते पहने मंदिर में घूमती रही । स्टेज फोटो तक नहीं लेने दिया। बड़ा अव्यवहारिक लगा जबकि वह ग्रामीण परिवेश से सामान्य परिवार की है।क्या ऊँचे ओहदे पर जाने वाले लोग समाज से दूर होने लगते हैं ?उत्तर – जी ऐसा बिल्कुल नहीं है , हैं सब समाज का ही तो हिस्सा हैं , अपनी अपनी सोच से व्यवहार का फर्क पड़़ सकता है ,परन्तुयह समझने की बात है । कुर्सी या पद पर जब बैठते हैं तब उसके अधिकार वहाँ बैठने तक के हैं , उसके बाद तो हम सब सहज मानव ही हैं ।दूसरे सत्र में साहित्यकारों ने अपनी स्वरुचि रचनाओं का काव्य पाठ किया।अंत में डाॅ राम पंचभाई एवं डॉ शिव दत्त शर्मा ने पटल पर उपस्थित महानुभावों काआभार ज्ञापित करते हुए आगामी कार्यक्रम हेतु आमंत्रित किया।*बच्चू लाल दीक्षित* संयोजक, मंथन साहित्यिक परिवार






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