
कोरबा।विद्युत विभाग की ओर से अधिवक्ता दीपक बजाज की प्रभावशाली पैरवी के चलते, विशेष न्यायाधीश (विद्युत अधिनियम) एस. शर्मा की अदालत ने बिजली चोरी के मामले में आरोपी अश्वनी कुमार शर्मा को दोषी करार देते हुए ₹88,500 का अर्थदंड लगाया है। डिफॉल्ट की स्थिति में आरोपी को दो माह का साधारण कारावास भुगतना होगा।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला 28 सितंबर 2018 का है, जब विद्युत निरीक्षक आर.के. पटेल के नेतृत्व में विशेष टीम ने साईं श्याम कुंज, साईं इंकेलेव, कोरबा में छापेमारी की। जांच में पाया गया कि आरोपी बिना मीटर सीधे एलटी लाइन से 2758 वॉट लोड की बिजली का उपयोग कर रहा था। इससे विभाग को ₹73,764 का नुकसान हुआ।प्रावधानों के तहत ₹29,500 के वित्तीय लाभ की गणना की गई, जिसे तीन गुना कर ₹88,500 का अर्थदंड तय किया गया। मामले में धारा 135 और 138 विद्युत अधिनियम, 2003 के तहत कार्यवाही हुई।
अदालत में सुनवाई
विभाग की ओर से अधिवक्ता दीपक बजाज ने ठोस दस्तावेजी और मौखिक साक्ष्यों के आधार पर दलीलें पेश कीं। बचाव पक्ष का यह तर्क—कि आरोपी मकान का मालिक नहीं है और मौके पर कोई स्वतंत्र गवाह मौजूद नहीं था—अदालत ने स्वीकार नहीं किया। अदालत ने माना कि आरोपी ने जानबूझकर बिजली चोरी की है।
फैसले का असर
विशेष न्यायाधीश ने आरोपी को दोषी मानते हुए निर्धारित जुर्माना अदा करने का आदेश दिया।
अधिवक्ता दीपक बजाज की अहम भूमिका
इस मामले में अधिवक्ता दीपक बजाज की कानूनी रणनीति और सटीक दलीलों ने निर्णायक भूमिका निभाई। उनकी पेशेवर दक्षता और तर्कशक्ति ने न्यायालय के सामने सच्चाई स्पष्ट रूप से स्थापित की, जिससे विभाग को न्याय मिला और आरोपी को सजा सुनिश्चित हुई।








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