हरियाणा कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार ने 7 अक्टूबर को चंडीगढ़ स्थित अपने घर में आत्महत्या कर ली। उनके शव के पास से एक 8 पेज का सुसाइड नोट बरामद हुआ है, जिसमें उन्होंने अपने करियर में झेले गए उत्पीड़न और भेदभाव के अनुभव साझा किए हैं।
सुसाइड नोट के मुख्य बिंदु
>- कुमार ने अपने सुसाइड नोट में 8 आईपीएस और 2 आईएएस अधिकारी सहकर्मियों पर मानसिक और प्रशासनिक दबाव बनाने का आरोप लगाया है।
>- उन्होंने जातिवाद, पोस्टिंग में भेदभाव, एसीआर में गड़बड़ी, सरकारी आवास न मिलने और प्रशासनिक शिकायतों में अनदेखी का जिक्र किया है।
>- कुमार ने अपनी पूरी संपत्ति अपनी पत्नी के नाम कर दी है।
आत्महत्या के पीछे के कारण
>- कुमार को हाल ही में रोहतक रेंज के आईजी पद से हटाकर पुलिस ट्रेनिंग सेंटर, सुनारिया में आईजी के तौर पर भेजा गया था, जिसे विभागीय हलकों में पनिशमेंट पोस्टिंग माना जा रहा था।
>- उनके पीएसओ सुशील कुमार पर एक शराब कारोबारी से रिश्वत मांगने का आरोप लगा था, जिसमें कुमार का नाम भी सामने आया था।
*पुलिस जांच और आगे की कार्रवाई*
>- पुलिस ने पूरे घटनास्थल की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी की है और फॉरेंसिक टीम ने कई अहम सबूत जुटाए हैं।
>- कुमार की पत्नी ने हरियाणा डीजीपी और रोहतक एसपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।

;>- पोस्टमॉर्टम के बाद कुमार का अंतिम संस्कार किया जाएगा ।
अधिकारी की पत्नी और वरिष्ठ आईएएस अफसर ने गिरफ्तारी की मांग
हरियाणा कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन कुमार की कथित आत्महत्या के मामले ने अब गंभीर रूप ले लिया है। अधिकारी की पत्नी और वरिष्ठ आईएएस अफसर अमनपीत पी. कुमार ने आरोप लगाया है कि यह सिर्फ आत्महत्या नहीं, बल्कि जातिगत भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न का परिणाम है। उन्होंने साफ कर दिया है कि जब तक हरियाणा के DGP शत्रुजीत कपूर और अन्य आरोपी अधिकारियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता, तब तक वह अपने पति का पोस्टमार्टम नहीं होने देंगी।
IAS पत्नी की गंभीर शिकायतेंअमनपीत पी. कुमार ने चंडीगढ़ पुलिस को दी गई लिखित शिकायत में निम्नलिखित आरोप और मांगें की हैं, SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि यह आत्महत्या नहीं, सामाजिक और मानसिक शोषण का नतीजा है। DGP शत्रुजीत कपूर और SP नरेंद्र बिजारनिया पर मानसिक उत्पीड़न और प्रणालीगत भेदभाव के आरोप लगाए हैं। उन्होंने मांग की है कि इन अधिकारियों की तत्काल गिरफ्तारी की जाए, ताकि वे सबूतों से छेड़छाड़ न कर सकें। उन्होंने कहा, जब तक जिम्मेदार लोगों की गिरफ्तारी नहीं होती, मैं पति का पोस्टमार्टम नहीं होने दूंगी। न्याय सुनिश्चित होना चाहिए।
सिस्टम पर गंभीर सवालइस मामले ने न सिर्फ हरियाणा पुलिस और प्रशासन बल्कि पूरे सिविल सेवा तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुसाइड नोट में दर्ज विवरण और पत्नी द्वारा उठाए गए गंभीर आरोप, जातिगत भेदभाव और उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर एक बड़ी बहस को जन्म दे रहे हैं।जांच और अगला कदमयह मामला अब उच्च स्तरीय जांच के दायरे में आ चुका है। सरकार और प्रशासन पर अब यह दबाव है कि इस पूरे प्रकरण में निष्पक्ष और तेज़ जांच कराते हुए दोषियों को जवाबदेह ठहराया जाए। अमनपीत पी. कुमार के इस कड़े रुख और न्याय की मांग ने प्रशासनिक गलियारों में तनाव और हलचल दोनों बढ़ा दिए हैं।







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