
कोरबा, 18 जनवरी। कोरबा जिले के ग्राम भिलाई खुर्द (क्रमांक–1) के सैकड़ों विस्थापित परिवार आज गंभीर अन्याय और प्रशासनिक उपेक्षा का सामना कर रहे हैं। SECL मानिकपुर खदान विस्तार परियोजना के नाम पर ग्रामीणों को उनके पैतृक घरों से उजाड़ा जा रहा है, लेकिन बदले में उन्हें कोल इंडिया पुनर्वास नीति 2012 और छत्तीसगढ़ जिला खनिज संस्थान (DMF) नियम 2015 के अनुरूप अधिकार और राहत नहीं दी जा रही है।पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने इस गंभीर मुद्दे को लेकर भारत सरकार के माननीय कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी को विस्तृत पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। श्री अग्रवाल ने कहा कि SECL प्रबंधन द्वारा दिया जा रहा ₹6.78 लाख का विस्थापन पैकेज पूरी तरह अपर्याप्त है और यह नीति की मूल भावना “बेहतर जीवन स्तर” का खुला मजाक है।उन्होंने स्पष्ट किया कि कोल इंडिया की पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (R&R) नीति के अनुसार विस्थापितों को केवल नकद राशि ही नहीं, बल्कि आवास, सड़क, बिजली, पेयजल, स्कूल जैसी मूलभूत सुविधाएं भी निःशुल्क उपलब्ध कराई जानी चाहिए, जो वर्तमान में नहीं दी जा रही हैं।जयसिंह अग्रवाल ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि SECL प्रबंधन वर्ष 2023 की कट-ऑफ सूची के आधार पर पात्रता तय कर रहा है, जबकि भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 के अनुसार सर्वेक्षण “वर्तमान तिथि (As on Date)” तक मान्य होना चाहिए। वर्तमान में बने मकानों को बाहर रखना ग्रामीणों को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने जैसा है।उन्होंने यह भी कहा कि DMF फंड और प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (PMKKKY) का उद्देश्य खनन से प्रभावित मूल निवासियों के जीवन स्तर में सुधार करना है, लेकिन विलाई खुर्द के 50 से 60 मूल निवासी परिवारों को जानबूझकर मुआवजे से वंचित रखा गया है, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है।SECL प्रबंधन की वादाखिलाफी को उजागर करते हुए श्री अग्रवाल ने बताया कि पूर्व में प्रत्येक विस्थापित परिवार को मानिकपुर GM कार्यालय के पास 6 डिसमिल भूमि देने का स्पष्ट आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब उस वादे से मुकरते हुए ग्रामीणों को बेहद कम राशि थमाई जा रही है। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हाल ही में जमीन खरीदने वालों को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि पीढ़ियों से बसे मूल निवासियों को पात्रता सूची से बाहर किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में भारी जनाक्रोश व्याप्त है।जयसिंह अग्रवाल ने मांग की है कि DMF मद एवं SECL के संशोधित बजट से विस्थापन पैकेज की राशि तत्काल बढ़ाई जाए, वर्तमान तिथि तक बने सभी मकानों का नया भौतिक सत्यापन कर उन्हें मुआवजे में शामिल किया जाए, टूटे हुए मकानों के पुनर्निर्माण या परिवार की आवश्यकता के अनुसार किए गए विस्तार को मान्यता दी जाए तथा वंचित 60 परिवारों के नाम तत्काल पात्रता सूची में जोड़े जाएं।उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “विलाई खुर्द के ग्रामीण विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन अपने अधिकारों और सम्मान से समझौता नहीं करेंगे। यदि यह अन्याय नहीं रुका तो आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी SECL प्रबंधन और शासन-प्रशासन की होगी।”श्री अग्रवाल ने विश्वास जताया कि माननीय कोयला मंत्री की संवेदनशील पहल से विलाई खुर्द के विस्थापित परिवारों को न्याय और सम्मानजनक पुनर्वास अवश्य मिलेगा।










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