
कोरबा :- अपर सत्र न्यायालय (फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट ) कोरबा में सुनाए गए प्रकरण में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया गया।जैसा कि अतिरिक्त लोक अभियोजक मोहन सोनी ने बताया की घटना उरगा थाने से संबंधित है बीते दिनाँक 6 मार्च 2025 को रात 8 बजे की है, प्रार्थिया खाना खा कर अपने ससुराल घर के अपने कमरे में थी।
उसका पति खाना खा कर बाहर घूमने निकला था, तभी उसके कमरे में उसका जेठ आ गया, और कमरे का दरवाजा बंद कर लिया, और पीड़िता को पकड़ कर अश्लील हरकत , छेड़छाड़ करने लगा, पीड़िता ने मना किया और जोर जोर से चिल्लाने लगी, तो आरोपी कमरे से बाहर चला गया।
पीड़ित की आवाज सुनकर उसकी सास ,ससुर ,पति वहां आ गए , तब पीड़िता ने उन्हें सारी बात बताई की आरोपी जेठ ने उसके साथ छेड़छाड़ की है और आज से पहले भी वह गलत नियत रखते हुये अश्लील बात बोल चुका है।
तभी आरोपी पीड़िता का जेठ कमरे में आ गया ,गलत इल्ज़ाम लगाती है कहकर गंदी गालियां देते हुवे मारपीट करने लगा। वहां मौजूद पीड़िता के ससुर और पति भी घर को बदनाम करती है कहकर पीड़िता के साथ मारपीट किये। मारपीट से पीड़िता को चोट भी आई पीड़िता ने थाना उरगा में आरोपीयो के विरुद्ध शिकायत दर्ज करवाई
जहां पुलिस ने आरोपी पति एवं ससुर के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 296, 115(2) सपठित धारा 3(5) के तहत एवम आरोपी जेठ के विरुद्ध धारा 74,75(2),296,115(2) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर अभियोग पत्र माननीय अपर सत्र न्यायाधीश सीमा प्रताप चंद्रा के यहां प्रस्तुत किया गया। जहाँ पर्याप्त साक्ष्य, व ठोस दलीले पेश कर अतिरिक्त लोक अभियोजक मोहन सोनी ने मजबूती से अपना पक्ष रखा,
जिस पर माननीय न्यायालय द्वारा आरोपी ससुर और पति को धारा 115 (2) धारा 3(5) में दोषी करार देते हुये ,न्यायालय उठने तक की सज़ा और 1000 ₹ अर्थदण्ड, और आरोपी जेठ को धारा 74 में 1 वर्ष + 1000 अर्थदण्ड, और धारा 75(2) में 1 वर्ष + 1000 अर्थदण्ड, धारा 115(2) में न्यायालय उठने तक की सज़ा और 1000 ₹ अर्थदण्ड की सजा सुनाई है।
ताज़ा प्रकरण समाज,और परिवार में महिलाओं की सुरक्षा पर जहां एक ओर प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है, की आज महिलाएं अपने ही घर मे सुरक्षित नही है, वही माननीय अपर सत्र न्यायाधीश सीमा प्रताप चंद्रा द्वारा दिया ये निर्णय अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने वाली महिलाओं के मन मे, और समाज में न्याय और कानून के प्रति विश्वास पैदा करता है।







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