गरीबों के पेट में लात, अमीरों के कंधे में हाथ; नगर निगम की कोरबा को गजब की सौगात.

गरीबों के पेट में लात, अमीरों के कंधे में हाथ; नगर निगम की कोरबा को गजब की सौगात.!

कोरबा। नगर पालिका निगम कोरबा अपने विवादित फैसलों को लेकर जन सामान्य के बीच सरगम चर्चा का विषय बन गया है। शुक्रवार को सिटी कोतवाली के निकट सब्जी बेचने वाले गरीब ग्रामीण कोई यातायात में बाधक बता कर बलपूर्वक हटा दिया गया। इसके बाद नगर निगम कोरबा एक बार फिर जन चर्चा का विषय बन गया।

आपको बता दें कि सिटी कोतवाली के सामने सड़क के किनारे किनारे प्रतिदिन सुबह आसपास के ग्रामों के ग्रामीण वर्षों से छोटी-छोटी सब्जियों की दुकान लगाकर अपने परिवार का भरण पोषण करते रहे हैं लेकिन नगर पालिका निगम कोरबा को यह बात रास नहीं आई। शुक्रवार को नगर निगम कोरबा का अमला सुबह-सुबह जेसीबी लेकर दलबल के साथ मौके पर पहुंचा और गरीब सब्जी विक्रेताओं को अपनी दुकान हटाने के लिए बाध्य कर दिया गया। इससे पहले भी नगर निगम कोरबा इन सब्जी विक्रेताओं को प्रताड़ित कर चुका है। कुछ समय पहले ही नगर निगम के कारिंदों ने यहां दुकान लगा कर बैठे छोटे-छोटे सब्जी विक्रेताओं को उनकी सारी सब्जियां जप्त कर मौके से हटा दिया था। इसी दिन नगर पालिका निगम कोरबा की आयुक्त आशुतोष पाण्डेय ने कोऑपरेटिव बैंक के पास फल के ठेले लगाकर जीवन यापन करने वाले छोटे-छोटे दुकानदारों के ठेले हटाने के साथ ही सीतामढ़ी से लेकर पुराने बस स्टैंड तक सड़क किनारे दुकान लगाने वालों को बेदखली का फरमान सुना दिया था। इसके साथ ही गीतांजलि भवन में आम लोगों के आवागमन के लिए बनाई गई गैलरी पर अवैध कब्जा कर दुकान सजाने वाले दुकानदारों को अवैध कब्जा हटाने के लिए नोटिस जारी किया गया था। कुछ लोगों को दुकान के सामने किए गए अतिक्रमण को तोड़कर हटाने का भी नोटिस जारी किया गया था। लेकिन रसूखदार दुकानदारों ने अपना भेजो कब्जा नहीं हटाया और नगर निगम आयुक्त उनके खिलाफ नीम अनुसार कोई भी कार्रवाई करने में समर्थ और असफल सिद्ध हो गए। परंतु फल के ले लगाने वाले छोटे-छोटे व्यापारी दोबारा अपनी जगह पर ठेले नहीं लगा पाए बल्कि उसे स्थान पर सौंदर्यीकरण के नाम पर स्ट्रक्चर खड़ा किया जा रहा है।

खेद की बात तो यह है कि सड़क किनारे सब्जी बेचने वाले और फल का ठेला लगाकर अपने परिवार का गुजर बसर करने वाले छोटे-छोटे व्यापारियों को कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं दी गई है। लोगों का कहना है कि इन छोटे कारोबारियों को यातायात सुगम बनाने की दृष्टि से हटाया भी गया है तो कम से कम उन्हें कोई वैकल्पिक स्थान निर्धारित कर जानकारी देना चाहिए, जहां पर वह दुकान लगाकर अपना भरण पोषण कर सकें। लेकिन नगर पालिका निगम कोरबा के अफसरों को इन गरीबों की कोई चिंता नहीं है।

असर की बात तो यह भी है की ट्रांसपोर्ट नगर चौक से लेकर शुभदा काम्प्लेक्स, हीरो होंडा एजेंसी, पाम मॉल, शारदा विहार रेलवे क्रासिंग से सुनालिया ज्वेलर्स तक सड़क पर दुकानदार 10 से 20 फीट तक बेजाकब्जा कर लेते हैं, मगर इन पूंजीपतियों के खिलाफ कार्रवाई करने की हिम्मत नगर निगम बलवान अफसरों की नहीं होती। इस संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि नगर निगम के साहबों की इन प्रभावशाली पैसे वालों से सांठगांठ हो?

कुल मिलाकर नगर निगम की कार्रवाई की हर निष्पक्ष व्यक्ति निंदा कर रहा है। आम लोग कह रहे हैं- “गरीबों के पेट में लात, अमीरों के कंधे में हाथ; नगर निगम की कोरबा को गजब की सौगात.!”

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