

अडाणी समूह द्वारा कोरबा पॉवर लिमिटेड (पूर्व में लैंको अमरकंटक) के अधिग्रहण के बाद अब इसके तीसरे चरण के विस्तार की तैयारी पूरी हो चुकी है। ₹16,611 करोड़ के भारी-भरकम निवेश वाली इस परियोजना के लिए 27 फरवरी को पर्यावरणीय जनसुनवाई होगी। इस विस्तार से प्लांट की कुल क्षमता 3520 मेगावाट (MW) पहुँच जाएगी और निर्माण से लेकर संचालन तक हजारों स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। ]
कोरबा, 27 फरवरी: छत्तीसगढ़ की ऊर्जा धानी कोरबा के लिए विकास का एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। अडाणी समूह के कोरबा पॉवर लिमिटेड ने अपनी विस्तार योजना के तहत तीसरे चरण (Phase-III) की शुरुआत कर दी है। इसके तहत 1600 मेगावाट की नई इकाइयां स्थापित की जाएंगी, जिससे न केवल बिजली संकट दूर होगा बल्कि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी जबरदस्त रफ्तार मिलेगी।
इस विस्तार परियोजना का सबसे सुखद पहलू रोजगार सृजन है। कंपनी द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार:
निर्माण चरण (Construction Phase): प्रोजेक्ट के निर्माण के दौरान लगभग 5,598 लोगों को रोजगार मिलेगा, जिसमें 230 स्थायी और 5,368 संविदा पद शामिल हैं।
संचालन चरण (Operational Phase): प्लांट पूरी तरह शुरू होने के बाद 2,270 कर्मियों की आवश्यकता होगी, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए लंबे समय तक आजीविका के द्वार खुलेंगे।
बिना नई जमीन के होगा महा-विस्तार
आमतौर पर बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए भूमि अधिग्रहण एक बड़ी चुनौती होती है, लेकिन अडाणी समूह के इस प्रोजेक्ट की खास बात यह है कि इसके लिए किसी नई जमीन की जरूरत नहीं है।
कंपनी के पास पहले से ही 505.58 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध है।
इसी परिसर में 800-800 मेगावाट की दो नई इकाइयां (नंबर 5 और 6) स्थापित की जाएंगी।
यह पूरी परियोजना आधुनिक अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल तकनीक पर आधारित होगी, जो पर्यावरण के अनुकूल और अधिक कुशल है।
अर्थव्यवस्था और राजस्व में वृद्धि
₹16,611 करोड़ के इस निवेश से कोरबा जिला और छत्तीसगढ़ राज्य दोनों के राजस्व में भारी वृद्धि होगी। दूसरे चरण का काम पहले ही युद्ध स्तर पर चल रहा है, जिसकी यूनिट नंबर 3 की कमिशनिंग अप्रैल-मई 2026 तक होने की उम्मीद है। तीसरे चरण के बाद प्लांट की कुल उत्पादन क्षमता 3,520 मेगावाट हो जाएगी, जिससे यह निजी क्षेत्र के सबसे बड़े पावर हब में से एक बन जाएगा।
आज होगी जनसुनवाईपरियोजना को पर्यावरणीय स्वीकृति दिलाने के लिए 27 फरवरी को जनसुनवाई आयोजित की गई है। इसमें स्थानीय ग्रामीणों और प्रशासन की मौजूदगी में परियोजना के लाभ और पर्यावरणीय पहलुओं पर चर्चा होगी।







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