उचित मूल्य की दुकान में काला बाजारी । नेताप्रतिपक्ष व पार्षद ने की कलेक्टर से शिकायत
कोरबा। शासकीय उचित मूल्य की दुकान में कालाबाजारी की शिकायत नेता प्रतिपक्ष हितानंद अग्रवाल एवं वार्ड क्रमांक 5 की पार्षद श्रीमती धनश्री अजय साहू ने कलेक्टर से की है। कलेक्टर…
Read moreप्रशांत भूषण पर अवमानना केस में सोमवार को सजा सुनाएगा सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली । प्रशांत भूषण के खिलाफ अवमानना मामले में सोमवार को शीर्ष न्यायालाय अपना फैसला सुनाएगी। इससे पहले, मंगलवार को प्रशांत भूषण की सज़ा पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित…
Read moreवो यादें बचपन की…
कदम्बिनी और नंदन जैसी भारत की प्रतिष्ठित पत्रिका का बंद होना हिन्दी साहित्य जगत के लिये एक चिंतन और चिंता का विषय है। ये केवल आम पत्रिका का नहीं बल्कि…
Read moreकोरबा तहसील के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंची कलेक्टर, लिया अतिवृष्टि से हुई क्षति का जायजा दो दिनो में फसल, मकान, पशु आदि नुकसान का सर्वे कर मुआवजा प्रकरण बनाने दिए निर्देश
कोरबा । मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल द्वारा कल देर शाम वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा बैठक में दिए गए निर्देश के बाद आज कलेक्टर श्रीमती किरण कौशल ने कोरबा…
Read moreशशि भैया यूं तो ना जाना था….आपका अनुज रामचंद्र…
कहते हैं कि किसी-किसी का नाम ही काफी होता है परिचय बताने के लिए। ऐसे ही पत्रकारिता जगत में जाना पहचाना चिर-परिचित नाम था शशिकांत शर्मा। अपना अनुभव बताने में…
Read moreजफर हसन का आलेख- संघ लोक सेवा आयोग जेहाद
सुदर्शन टीवी चैनल पर एक प्रोग्राम चलाया जा रहा था जो जामेमिलिया इसलामिया के छात्रों को संघ लोक सेवा आयोग के परीक्षा में चुने जाने पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा…
Read moreनंदन, कादम्बिनी: संपूर्ण हिंदी जगत को आघात
हिन्दी पत्रिकाएँ सामाजिक व्यवस्था के लिए चतुर्थ स्तम्भ का कार्य करती है और अपनी बात को मनवाने के लिए एवं अपने पक्ष में साफ-सुथरा वातावरणतैयार करने में सदैव अमोघ अस्त्र…
Read moreतुम तन पर मंडराते मधूप
तुम्हारा इजहार था ,मेरा इंकार ।क्यूंकर ना होता …..मैं सुंदर ,सुकोमल ललना ,तुम आवारा मधुकर से ।कहते तो थे सच्चा प्यार पर ,बँधे तुम देह के आकर्षण से । तभी…
Read moreकादम्बिनी मेरी अभिभावक पत्रिका
बहुत ही दुःखद कादम्बिनी है,और नंदन जैसी उच्चस्तरीय पत्रिका का बन्द होना । इस खबर को सुनकर ,पढ़कर मुझे ऐसा लगा जैसे कि मेरे अभिभावक मुझसे सदा सदा के लिए…
Read moreहिन्दी की शीर्ष पत्रिका कादम्बिनी नंदन का अवसान-हिन्दी पत्रिकाओं में निस्संदेह कादम्बिनी शीर्ष रही है। ऐसी पत्रिका का अस्तित्व समाप्त होने से बडा दुर्भाग्य क्या होगा!
रामानंद दोषी के बाद प्रधान संपादक रहे राजेन्द्र अवस्थी ने कादम्बिनी को न सिर्फ लोकप्रिय पत्रिका बनाया, अपितु राष्ट्रभाषा के उन्नयन में सर्वाधिक योगदान देने वाला भी सिद्ध किया। इसके…
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