भगत सिंह जिन्दा हैं
मेरे जज्बातों से इस तरह वाकिफ है मेरी कलममैं इश्क भी लिखना चाहूं तो इंकलाब लिख जाता है।। इन शब्दों को जीने वाले शहीदे आजम भगत सिंह को उनके जन्मदिन…
Read moreकोरोना जांच रिपोर्ट के लिए नहीं काटने पड़ेंगे अस्पताल के चक्कर, एक क्लिक से कहीं भी मोबाइल पर मिल रही रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग की साइट www.cghealth.nic.in पर दी कोरोना जांच रिपोर्ट की सुविधा
कोरबा । कोरोना जांच कराने के बाद अपनी रिपोर्ट लेने के लिये अब अस्पताल जाने की जररूत नही पड़ रही है। राज्य प्रशासन द्वारा लोगों की सहूलियत के लिए सभी…
Read moreकोरबा कोरोना अभी अभी दो और कोरोना संक्रमितो का निधन. एक ने कोविड अस्पताल तो एक ने जिला अस्पताल में ली अंतिम साँस
कोरबा । जिले के दो और कोरोना संक्रमितो का इलाज के दौरान कल देर रात आकस्मिक निधन हो गया। सिकिल सेल एनिमिया से पीड़ित एक कोरोना संक्रमित ने इलाज के…
Read moreशहीदे आज़म जन्में
शहीदे आज़म जन्में सत्ताईस सितंबर,सन उन्नीस सौ सात lशहीदे आज़म जन्में,करने नवल प्रभात l कोख से विद्यावती केसरदार किशन सिंह के घर lबंगा की धरती में,खेले विलक्षण तन धर lलाजपत…
Read moreशहीदे आज़म जन्में
सत्ताईस सितंबर,सन उन्नीस सौ सात lशहीदे आज़म जन्में,करने नवल प्रभात l कोख से विद्यावती केसरदार किशन सिंह के घर lबंगा की धरती में,खेले विलक्षण तन धर lलाजपत राय के विचारों,को…
Read more” शहीदे-ए-आज़म “
लगा था आग सीने में,इंकलाब की जिसने ठानी थी।मतवाले शहीद भगतसिंह ऐसी कहानी थी।ना विचलित ना भयभीत ऐसी उसकीतरुणाई थी।बांध कफ़न सर पर आजादी की उसने चिंगारी भड़काई थी।झूल गया…
Read more‘‘इंकलाब जिन्दाबाद’’ के नारे को साकार करने वाले- भगत सिंह
आज के समय में जब लगभग हर ऐतिहासिक व्यक्तित्व को विवादित बना दिया गया है, तब साल में दो बार, 23 मार्च और 28 सितम्बर ऐसे दिन होते है जब…
Read moreभारत का अभिमान
देखके भारत के वासी को अंग्रेजो के हाथ में,कूद पड़े तब भगतसिंह आजादी के अग्निकांड मे । तोंपो से बाते करते, बंदूकों से करते प्यार थे,इन्हे बना हथियार, मार्ग आजादी…
Read moreक्रांति का दूसरा नाम- भगत सिंह जन्मतिथि_विशेष
“मेरे जज्बात से इस कदर वाकिफ है मेरी कलम कि मैं इश्क लिखना चाहूं तो भी इंकलाब लिखा जाता है।” यह विद्रोही शब्द सुनते ही हमारे दिल में एक ऐसे…
Read moreभारत के वीर पुत्र भगत सिंह
तब अंग्रेजी हुकूमत द्वारा पीस रही थी धरती हमारी,अपने हीं घर में यातनाएं सह रहे थे लोग और खुद को पराजित महसूस कर रही थी माँ भारती हमारी,27 सितंबर 1907…
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